फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lalji tandon death updates he celebrate birthday at shamshan ghat all planning of ram janmabhoomi made at tandon bunglow 13 know interesting facts

लालजी टंडन श्मशान में मनाते थे अपना जन्मदिन, उनकी ही कोठी पर बनी थी राम जन्मभूमि की सारी रणनीति

Tue, 21 Jul 2020 11:31 AM IST
पूजा त्रिपाठी अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 21 Jul 2020 11:31 AM IST
विज्ञापन
Lalji tandon death updates he celebrate birthday at shamshan ghat all planning of ram janmabhoomi made at tandon bunglow 13 know interesting facts
धर्म भाई लालजी टंडन को राखी बांधतीं मायावती - फोटो : पीटीआई

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का आज निधन हो गया। उनका जाना लखनऊ के लिए एक अपूर्णनीय क्षति है। जानिए लालजी टंडन के बारे में कुछ ऐसी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं और वह बहुत ही दिलचस्प हैं....

विज्ञापन


श्मशान में जन्मदिन
यह शायद शिवभक्त होने का प्रभाव था कि वैभवशाली जीवन जीने वाले टंडन ने अपना जन्मदिन मनाने का स्थान श्मशान चुना। वह कहते थे 'व्यक्ति अपने प्रत्येक जन्मदिन के साथ अपनी मृत्यु के और निकट पहुंच जाता है। मेरा मानना है कि मृत्यु हम सबके लिए वरणीय हो, इसके लिए जीवन को निष्काम भाव से जीना जरूरी है। मैं मानता हूं कि मृत्यु जीवन के विश्राम की अंतिम घड़ी नहीं बल्कि आगामी यात्रा की शुरुआत है। इसीलिए मैने अपना जन्मदिन श्मशान में मनाने का फैसला किया।'
विज्ञापन


टंडन का एक जन्मदिन न सिर्फ लखनऊ के लिए कड़वी यादें छोड़ गया बल्कि उसी के बाद टंडन ने अपने जन्मदिन पर समर्थकों को कोई समारोह करने पर प्रतिबंध लगा दिया। हुआ यह कि 2004 के लोकसभा चुनाव के बीच टंडन के जन्मदिन पर कुछ लोगों ने गरीब महिलाओं को साड़ियां देने का कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें जुटी भारी भीड़ में भगदड़ मच गई और कई महिलाओं को मृत्यु हो गई। इस पर अटल बिहारी वाजपेयी की नाराजगी का सामना भी टंडन को करना पड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन

शख्सियतों का साथ

Lalji tandon death updates he celebrate birthday at shamshan ghat all planning of ram janmabhoomi made at tandon bunglow 13 know interesting facts
लालजी टंडन अपनी किताब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट करते हुए - फोटो : पीटीआई

व्यापारी होने के बावजूद वह सियासी, सांस्कृतिक, सामाजिक व साहित्यक सरोकारों में सक्रिय रहे। नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी ही नहीं डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे खांटी समाजवादी के भी प्रिय रहे। पं. दीनदयाल उपाध्याय और भाऊराव देवरस के सानिध्य का तो सौभाग्य टंडन को मिला ही। सुचेता कृपलानी, जेवी कृपलानी, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सियासी शख्सियतों के साथ अमृतलाल नागर, श्री नारायण चतुर्वेदी, भगवतीचरण वर्मा और यशपाल जैसी साहित्यिक हस्तियों की नजदीकी का लाभ भी उन्हें मिला। जनसंघ व भाजपा की राजनीति करने के बावजूद उनके रिश्ते कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के नेताओं से भी काफी मधुर रहे। मुलायम सिंह यादव हों या चंद्रशेखर अथवा डॉ. हलीम जैसे सोशलिस्टी तथा जेड.ए. अहमद जैसे खांटी वामपंथी, टंडन के रिश्तों की डोर सभी तक फैली थी।

अटल से मिले तो उन्हीं के हो लिए
टंडन के रिश्तों के विस्तार में अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख किए बिना तो बात पूरी ही नहीं हो सकती। सभासद से राजनीति करने वाले टंडन की अटल जी से मुलाकात 50 के दशक में हुई। उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी, पं. दीनदयाल उपाध्याय, भाऊराव देवरस और नाना जी देशमुख का केंद्र लखनऊ ही था। पहली मुलाकात के बाद ही उन्होंने खुद को अटल के लिए ही समर्पित कर दिया। यहां तक बाद में टंडन को बिना लिखा-पढ़ी और औपचारिक घोषणा के अटल का अधिकृत प्रतिनिधि माना जाने लगा।

जिस किसी को अटल तक बात पहुंचानी होती तो वह टंडन को ही जरिया बनाता। टंडन जो कहते तो मान लिया जाता है कि वे अटल के ही हैं। अटल जब लखनऊ से सांसद बने तो भी टंडन ने ही उनके संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से लेकर अन्य जिम्मेदारियों का निर्वाह किया। यह बात दीगर है कि अटल कभी-कभार टंडन की भूमिका की चुटकी लेने से भी बाज नहीं आते थे।

कोठी पर महत्वपूर्ण काम पर रहे बेनाम

Lalji tandon death updates he celebrate birthday at shamshan ghat all planning of ram janmabhoomi made at tandon bunglow 13 know interesting facts
लालजी टंडन - फोटो : पीटीआई

टंडन की जिंदगी पर जब भी चर्चा होगी तो लखनऊ में तीन स्थानों का जिक्र हुए बिना बात नहीं बनेगी। एक चौक के सोंधी टोला का मकान नंबर 64, दूसरा 7 विधानसभा मार्ग अर्थात भाजपा मुख्यालय और माल एवन्यू की कोठी नंबर-13।

वैसे तो उनकी जिंदगी के अंतिम दिनों में भाजपा मुख्यालय के पड़ोस त्रिलोक नाथ रोड स्थित कोठी से भी रिश्ता रहा लेकिन 13 नंबर कोठी का महत्व सबसे अलग रहा। अयोध्या के जिस मंदिर निर्माण के समाचार आज देश-दुनिया में मीडिया की प्रमुख खबर बनते हैं, उस अयोध्या की वर्तमान परिणिति का नए सिरे से तानाबाना टंडन की इसी कोठी नंबर 13 पर बुना गया।

कल्याण सिंह सरकार में टंडन अयोध्या मामलों के प्रभारी मंत्री थे। उस नाते राम जन्मभूमि मुद्दे पर सरकार से लेकर संगठन की सारी रणनीति का केंद्र यह कोठी ही रही। बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें इसी कोठी में हुई। कल्याण सिंह की भाजपा में वापसी का गवाह भी यही कोठी बनी।

बसपा से भाजपा के रिश्तों की पृष्ठभूमि भी इसी कोठी में बनी तो यहीं पर मायावती से रिश्ता तोड़कर सरकार से समर्थन वापस लेने का तानाबाना भी बुना गया जिसके फलस्वरूप मुलायम सिंह यादव की सत्ता में वापसी हुई। पर, हर मामले में टंडन ने खुद को पीछे ही रखा। तभी तो जिस अयोध्या और रामजन्मभूमि की सारी रणनीति जिनकी कोठी पर बनी वे टंडन पूरे मामले में कहीं मुकदमे में नहीं आए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed