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कल से खरमास शुरू : 52 दिन तक अस्त रहेंगे शुक्र, इस समय तक रहेगा धनु संक्रांति का पुण्यकाल, एक फरवरी को उदय
Mon, 15 Dec 2025 05:05 PM IST
आकाश द्विवेदी
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Mon, 15 Dec 2025 05:05 PM IST
सार
16 दिसंबर से सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास की शुरुआत हो गई है, इस दौरान 52 दिन तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा। खरमास में विवाह व अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, जबकि दान-पुण्य और भगवान विष्णु व शिव की पूजा शुभ फल देती है।
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खरमास।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
वृश्चिक राशि से निकलकर सूर्यदेव 16 दिसंबर दिन मंगलवार को धनु राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ खरमास की शुरुआत भी हो जाएगी। 12 दिसंबर को शुक्र ग्रह अस्त हो चुके हैं और 52 दिनों तक अस्त रहेंगे। एक फरवरी 2026 के बाद शुक्र का उदय होगा। इस दौरान खरमास में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि सूर्यदेव एक राशि में लगभग 30 दिन रहते है, सूर्यदेव किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन सूर्यदेव की संक्रांति होती है। मंगलवार को सुबह 4:19 बजे सूर्यदेव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। नववर्ष में 14 जनवरी 2026 को मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे।
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सूर्य की संक्रांति में पुण्यकाल का बहुत महत्व होता है। धनु संक्रांति का पुण्यकाल 16 दिसंबर की सुबह 10:43 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान गोदावरी या अन्य पवित्र नदी में स्नान और वस्त्र दान का विशेष महत्व होता है। एक फरवरी 2026 को शुक्र उदय होने के तीन-चार दिन बाद से शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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एसएस नागपाल ने बताया कि खरमास में कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। भगवान सूर्य जब देवगुरु बृहस्पति के घर में आते हैं तो वे अपना तेज कम कर देते हैं। साथ ही इस दौरान बृहस्पति ग्रह की शुभता कम हो जाती है।
भगवान सूर्य के तेज कम होने और देवगुरु बृहस्पति की शुभता का प्रभाव कम होने के कारण से ही खरमास में विवाह, सगाई, यज्ञोपवीत, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ-मांगलिक कार्य नहीं कराए जाते हैं। खरमास के समय भगवान विष्णु व भगवान शंकर की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। खरमास में दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।