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आम आदमी की आवाज हूं मैं: जावेद जाफरी
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Apr 2014 08:58 AM IST
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जाने-माने फिल्म स्टार व लखनऊ संसदीय सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जावेद जाफरी कहते हैं कि वे आम आदमी की आवाज बनने लखनऊ आ रहे हैं।
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लखनऊ की संस्कृति व गंगा-जमुनी तहजीब ही उन्हें यहां खींच कर लाई है। प्रस्तुत हैं ‘अमर उजाला’ की फोन पर उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश...
आम आदमी पार्टी के बारे में...
देखिए...! राजनीति में मेरी कभी कोई दिलचस्पी नहीं थी। हां, देश में क्या चल रहा है, राजनीतिक दल क्या कर रहे हैं इसको लेकर जागरूक जरूर था। बचपन से देखता आ रहा हूं कि चीजें बदल ही नहीं रही हैं।
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जो विकास हो रहा है, वह केवल अमीरों के लिए हो रहा है। गरीब और भी ज्यादा गरीब होता जा रहा है। उसके लिए कोई भी राजनीतिक दल सोचता नहीं है।
देश में भ्रष्टाचार व सांप्रदायिकता बढ़ती जा रही है। फिर अन्ना के लोकपाल आंदोलन को देखा। इसमें शामिल लोगों की बातों ने दिल तक असर किया।
पहले सोचा कि आम आदमी पार्टी के लिए केवल प्रचार करूंगा, पर बाद में लगा मैं भी देश के लिए कुछ कर सकता हूं। इसलिए आम आदमी पार्टी से जुड़ गया।
लखनऊ आपके लिए नया है, इसके बारे में...
लखनऊ मेरे लिए नया नहीं है। यहां की संस्कृति व भाषा मेरी अपनी है। यहां मेरे काफी दोस्त व रिश्तेदार हैं। यहां की गंगा-जमुनी तहजीब ने हमेशा मेरे दिल को छुआ है।
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भाजपा व कांग्रेस के बारे में...
देश की जनता दोनों ही प्रमुख दलों को अरसे से देखती आ रही है, लेकिन देश में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि दोनों ही दलों में सभी लोग बुरे हैं।
इनमें कुछ अच्छे लोग भी हैं, लेकिन अब समय आ गया है जब देश की जनता को इन पार्टियों की नीयत देखकर अपना फैसला करना होगा।
दिग्गजों के सामने चुनाव लड़ने के बारे में...
हां...! राजनाथ सिंह व रीता बहुगुणा जोशी राजनीति में काफी सीनियर हैं। सबके अपने-अपने मुद्दे हैं। मैं भी अपने मुद्दों को लेकर आम जनता के बीच जाऊंगा। फिर फैसला जनता जनार्दन के हाथ है।
भाजपा व आप की साठगांठ...
सब बकवास है। यदि साठगांठ होती तो वाराणसी में नरेंद्र मोदी के सामने अरविंद केजरीवाल चुनाव क्यों लड़ते?
चुनाव के मुद्दों के बारे में...
भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, आरटीआई और ग्राम सभा को मजबूत करने की बात ही मेरे मुद्दे होंगे। पैसा किस तरह, कितना और कहां खर्च होना है, यह निर्णय ऊपर के बजाय ग्राम सभा व वार्ड स्तर से होना चाहिए।
बाकी स्थानीय मुद्दे बिजली, पानी व सड़क जैसी दिक्कतों को जनता के बीच जाकर समझूंगा। देखिए...! जब एक बार सिस्टम क्लीन हो जाएगा तो छोटी-मोटी दिक्कतें अपने आप दूर हो जाएंगी।