यूपी में उद्योग लगाना होगा बेहद आसान, औद्योगिक सेवा गारंटी एक्ट लाएगी सरकार
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यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार सूबे में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए औद्योगिक सेवा गारंटी अधिनियम लाएगी। इससे निवेशकों को तय समय में सभी सुविधाएं प्राप्त होंगी। हर काम के लिए एक टाइमलाइन तय की जाएगी। साथ ही औद्योगिक विवादों के न्यायालय जाने से पहले सुलझाने के लिए एक ट्रिब्यूनल गठित करने की योजना है।
नई सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नई औद्योगिक निवेश नीति लाने का एलान किया था। इसके बाद इस काम के लिए उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में एक मंत्रिसमूह गठित किया गया। यह समूह कई बैठकें कर नीति के प्रारूप की रूपरेखा तय कर चुका है।
सूत्रों ने बताया समूह ने नई नीति पांच साल के लिए बनाने पर सहमति बनाई है। विभिन्न विभागों की सेवाएं तय दिनों में प्राप्त करने के लिए जिस तरह जनहित गारंटी अधिनियम बना है, उसी तरह औद्योगिक सेवाओं के लिए अलग से औद्योगिक सेवा गारंटी अधिनियम बनाए जाने की योजना है।
इसमें हर काम की समय सीमा तय होगी, जो 30 दिन से अधिक नहीं होगी। इंडस्ट्री लगाने के लिए सभी जरूरी अनुमोदन व क्लीयरेंस इस अधिनियम के तहत दिए जाएंगे। इससे कारोबारियों को किसी काम के लिए अनावश्यक दौड़ना नहीं पड़ेगा।
देरी होने पर दंडित किए जाएंगे अधिकारी
एक्ट में यह प्रावधान भी होगा कि यदि किसी सेवा के मिलने में देरी होती है तो संबंधित अधिकारी दंडित किए जाएं। मंत्रिसमूह ने औद्योगिक विवादों को कोर्ट में सुलझाए जाने के पहले उद्यमियों को सहूलियत देने के लिए एक स्टेट इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल के गठन पर भी सहमति जताई है।
न सहूलियतों पर भी विचार
- विभागों से ऐसी सेवाओं की पहचान करने को कहा गया है जिसमें वह वर्तमान में तो अनापत्ति देता है, लेकिन उसकी आवश्यकता खत्म की जा सकती है।
- जिन सेवाओं का व्यक्तिगत सत्यापन किया जा सकता है, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है।
- जिन सेवाओं में देरी हुई हो क्या उनका डीम्ड अप्रूवल दिया जा सकता है, उनका ब्यौरा।
बुंदेलखंड व पूर्वांचल के लिए खास प्रावधान
नई नीति में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बुंदेलखंड व पूर्वांचल में मेगा परियोजना लगाने पर पात्रता में छूट दी जाएगी।
इन क्षेत्रों में निवेश की निर्धारित न्यूनतम सीमा का 50 फीसदी होने पर ही जरूरी लाभ मिल सकेंगे। इन क्षेत्रों में स्थापित होने वाले उद्योगों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विशेष प्रोत्साहन भी देने का विचार है।
एससी, एसटी, महिलाओं, दिव्यांगों को विशेष सुविधा
नई नीति में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, दिव्यांगों, महिला उद्यमियों को विशेष इन्सेंटिव देने की योजना है। इसमें नीति के अंतर्गत प्रस्तावित इन्सेंटिव की रकम पर पांच प्रतिशत की दर से अतिरिक्त लाभ दिया जा सकेगा।
औद्योगिक इकाई की स्थापना के लिए यदि इन वर्ग के आवेदकों की इकाई में मालिकाना हिस्सेदारी न्यूनतम 75 प्रतिशत होगी तो भी पूरा लाभ मिलेगा।
ये भी हैं प्रस्ताव
- उद्यमियों को पर्याप्त सुरक्षा के लिए नोएडा, कानपुर, गोरखपुर, बुंदेलखंड व पूर्वांचल आदि क्षेत्रों में स्थित इंडस्ट्रियल कलस्टर्स व क्षेत्रों के क्षेत्रफल के आधार पर विशेष पुलिस अधिकारी व विशेष पुलिस बल तैनात किया जाए।
- लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे व अन्य एक्सप्रेस-वे के अलावा महत्वपूर्ण मार्गों, प्रदेश से होकर गुजरने वाले फ्रेट कॉरीडोर के दोनों ओर औद्योगिक हब विकसित किए जाएं।
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश अथवा किसी देश विशेष के कलस्टर में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष औद्योगिक एरिया डवलप की जाए।
- निजी क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले औद्योगिक पार्कों को प्रोत्साहन दिया जाए।
- औद्योगिक पार्कों में स्थापित इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों की आवासीय व्यवस्था का प्रावधान भी हो।
- अंग्रेजी दवाओं की आवश्यकता व खपत को पूरा करने के लिए फार्मा पार्क की स्थापना पर भी सहमति।