फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Instead of recovering huge amount from defaulters of electricity bills, terminating connections in Lucknow

घालमेल: सरकारी रिकॉर्ड में कनेक्शन बंद.... मौके पर जल रही बिजली; मोटी रकम के बिलों को खत्म करने का खेल

Sun, 01 Dec 2024 08:29 AM IST
भूपेन्द्र सिंह नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 01 Dec 2024 08:29 AM IST
सार

लखनऊ में सरकारी रिकॉर्ड में कनेक्शन बंद है। लेकिन, मौके पर बिजली जल रही है। मोटी रकम के बिलों को खत्म करने का खेल शुरू हो गया है। 

विज्ञापन
Instead of recovering huge amount from defaulters of electricity bills, terminating connections in Lucknow
खंभे पर बिजली के तार दुरुस्त करता कर्मी (फाइल)

विस्तार

राजधानी लखनऊ में मोटी रकम के बिजली बिलों के बकायेदारों से वसूली के बजाय जुगाड़ से कनेक्शन खत्म करने का नया खेल शुरू हो गया है। इसके लिए ऐसे कनेक्शनों को सरकारी रिकॉर्ड में बंद दिखा दिया जा रहा है, लेकिन परिसर में बिजली जलवाई जा रही है।

विज्ञापन


बिलिंग एजेंसी के मीटर रीडरों ने ऐसे मामले पकड़ने के बाद इलाकाई इंजीनियरों को जानकारी दी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस खेल की शिकायत शक्ति भवन तक पहुंची तो आननफानन जांच शुरू हुई है।
विज्ञापन


सेस खंड दो के पारा में उपभोक्ता धमेंद्र कुमार वर्मा के व्यावसायिक स्थल पर फर्जी मीटर से बिजली जलाने और उसके कनेक्शन के बंद होने की बात कही गई। अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता राम विशाल वर्मा की टीम 20 नवंबर को कनेक्शन स्थल की जांच करने पहुंची तो शिकायत सही निकली।

विज्ञापन
विज्ञापन

21 माह से लटकाए थे नए मीटर की बिल पर फीडिंग

धमेंद्र के यहां जो मीटर लगा मिला उसे 30 फरवरी 2022 को बदलने का दावा किया गया, पर नए मीटर की उपभोक्ता के बिल पर इंट्री नहीं थी। परीक्षण खंड के एक्सईएन विवेक कुमार के कार्यालय में इस मीटर की फीडिंग 21 माह से अटकी थी, जिसमें 13,219 यूनिट रीडिंग स्टोर मिली थी। 


दो किलोवाट के कनेक्शन पर आठ किलोवाट तक का लोड चल चुका था। अधिशासी अभियंता राम विशाल वर्मा ने बताया कि इस कनेक्शन का स्थायी विच्छेदन करने का मामला एफसीआई उपखंड के एसडीओ प्रशांत गिरि जुलाई से लटकाए थे। विभाग के रिकॉर्ड यह कनेक्शन बंद होने जा रहा था, पर व्यावसायिक स्थल पर बिजली का इस्तेमाल हो रहा था।

उपभोक्ता को न दिया बिल और न ही वसूली रकम

अधिशासी अभियंता ने बताया कि स्टोर रीडिंग मिलने के बाद उसे सिस्टम में फीड करा दिया गया, जिससे डेढ़ लाख रुपये बिल बनेगा। हालांकि, 10 दिन बाद भी अधिशासी अभियंता ने उस उपभोक्ता को बिल देकर वसूली नहीं की। 

अधीक्षण अभियंता योगेंद्र कुमार सिंह को खेल की भनक लगी तो वह पिछले हफ्ते एसडीओ प्रशांत गिरि के कार्यालय बिलों की जांच करने पहुंचे। पाया कि दो-दो लाख के बिजली बिलों को संशोधित कर कम रकम का बना दिया गया। एसडीओ से पूछा कि किस आधार पर ऐसा किया। प्रकरण की जांच शुरू हो चुकी है।

ऐसे चल रहा खेल

कुछ इलाकाई इंजीनियरों, कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं उपकेंद्र के संविदा कर्मियों के गठजोड़ से यह खेल चल रहा है। किसी उपभोक्ता पर एक लाख रुपये का बिल बकाया है तो सरकारी रिकॉर्ड में उसकी बिजली को काटकर मीटर व सर्विस केबल को उतारना दिखा देते हैं। असल में ऐसे बकायेदार सांठगांठ से बिजली जलाते रहते हैं। बिलिंग एजेंसी के रीडर को झांसा देने के लिए कहीं-कहीं फर्जी मीटर तक लगा दिया जाता है। खंड के लोगों की संलिप्तता के कारण ऐसे कटे कनेक्शनों की रेंडम जांच नहीं होती।

घालमेल की हो रही जांच

अधिशासी अभियंता से जांच कराई गई। मीटर में 13,219 यूनिट रीडिंग स्टोर मिलना व उस मीटर का बिल पर इंट्री न होना घालमेल का साक्ष्य है। प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है। - रजत जुनेजा, मुख्य अभियंता अमौसी जोन लेसा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed