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सरकारी अस्पतालों में लगे वेंटिलेटर से नहीं मिल रही मरीजों को राहत, एक से दूसरे अस्पताल जाने में जा रही जान

Tue, 15 Sep 2020 05:46 PM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ
हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 15 Sep 2020 05:46 PM IST
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important information about ventilator unit in government hospitals
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

लखनऊ में केजीएमयू और पीजीआई को छोड़कर अन्य सरकारी अस्पतालों में लगे वेंटिलेटर मरीजों को राहत नहीं पहुंचा पा रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल में वेंटिलेटर हैं तो उसे चलाने वाले नहीं हैं। जबकि रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल में डेढ़ साल बाद भी सीसीयू शुरू नहीं हो पायी है।

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लोकबंधु में वेंटिलेटर यूनिट होने के बावजूद केजीएमयू रेफर किया जा रहा है। इसके अलावा रामसागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय में वेंटिलेटर इंस्टॉल नहीं हो पाए तो दूसरे संस्थान भेज दिए गए। ऐसे में एक से दूसरे अस्पताल की दौड़ में मरीज की सांसें उखड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर लापरवाह बने हुए हैं।

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आठ वेंटिलेटर... पर चलाने वाला कोई नहीं
बलरामपुर अस्पताल में आठ वेंटिलेटर आईसीयू में लगाए गए थे। मैनपावर व एनेस्थीसिया डॉक्टर के संकट से यह यूनिट पहले साल तक नहीं चली। अस्पताल निदेशक दावा करते रहे कि आईसीयू का संचालन 24 घंटे न होने से मरीजों को वेंटिलेटर पर महज दो से चार घंटे तक रखा जाता है। इसके बाद गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मैनपावर का संकट है, फिर भी गंभीर मरीज को कई दिन तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है। 

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डेढ़ करोड़ की लागत से बनी क्रिटिकल केयर यूनिट बंद

रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में डेढ़ साल पहले क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनाए जाने का प्रस्ताव आया था। बिल्डिंग के निर्माण संग उपकरण की खरीद कर ली गई। दो बेड वेंटिलेटर के लिए रखे गए थे। करीब डेढ़ करोड़ खर्च करने बावजूद स्वास्थ्य विभाग मरीजों को गहन चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं दे पा रहा है। सीएमएस डॉ. अनिल कुमार आर्य ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर कभी चले ही नहीं हैं।

अफसरों की लापरवाही से  दूसरे संस्थान में लगा दिए वेंटिलेटर 
रामसागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय कोविड अस्पताल है। शासन ने इसे लेवल-1 से अपग्रेड करके लेवल-2 में किए जाने का फैसला लिया था। अस्पताल में दस वेंटिलेटर लगाए जाने थेे। चार वेंटिलेटर आ भी गए। अफसरों की लापरवाही से यह यूनिट इंस्टॉल नहीं हो पाई। इन वेंटिलेटर को दूसरे संस्थान में लगा दिया गया।

लोकबंधु अस्पताल में 30 बेड, 14 वेंटिलेटर

लोकबंधु अस्पताल में 30 बेड आईसीयू के रखे गए हैं। यहां पर 14 वेंटिलेटर होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद मरीजों की हालत गंभीर होने पर केजीएमयू भेजा जा रहा है। अफसरों का कहना है कि कोविड के उन मरीजों को केजीएमयू भेजा जाता है। जो दूसरी असाध्य बीमारी से पीड़ित होते हैं ताकि कोविड संग उन्हें दूसरी बीमारी का भी इलाज मिल सके।

राजधानी में जितने भी कोविड अस्पताल हैं। वहां पर वेंटिलेटर यूनिट काम कर रही हैं। नॉन कोविड में जहां भी वेंटिलेटर यूनिट बंद पड़ी हैं। उन अस्पतालों से जवाब मांगा जाएगा। मैनपावर समेत अन्य दिक्कतों को दूर किया जाएगा। - डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक  
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