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लखनऊ की फैक्ट्री में चर्बी से बन रहा था घी, शहर भर में हो रहा था सप्लाई

Thu, 05 Jul 2018 01:05 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 05 Jul 2018 01:05 AM IST
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illegal factory of ghee caught in lucknow
गिरफ्तार मो. सलीम - फोटो : amar ujala
लखनऊ के बाजार खाला में स्लॉटर हाउस के गंदे नाले के पास झोपड़ी में जानवरों की चर्बी से घी बनाने की फैक्ट्री चल रही थी। चर्बी से बने घी में सुगंध मिलाकर पीपों में भरकर शहर में सप्लाई किया जाता था। पुलिस टीम ने मंगलवार सुबह छापा मारकर कढ़ाई में भरी अधपकी चर्बी और फैक्ट्री के बाहर खड़े लोडर से नकली घी से भरे 50 पीपे बरामद किए।
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मौके से एक को गिरफ्तार किया है। चर्बी से घी बना रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, पर तीन भाग निकले। प्रभारी निरीक्षक सुजीत कुमार दुबे ने बताया कि वध किए गए पशुओं की चर्बी से घी बनाए जाने की सूचना पर पुलिस टीम ने स्लाटर हाउस के नाले के पास स्थित झोपड़ी पर छापा मारा।
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कढ़ाई में करीब 10 किलो चर्बी पका रहे हबीबनगर निवासी मो. सलीम को गिरफ्तार किया गया, जबकि नई बस्ती मोतीझील कॉलोनी ऐशबाग निवासी जाबिर, राशिद और फारूख मौके से भाग निकले। झोपड़ी के बाहर खड़े लोडर पर लदे 50 पीपों में चर्बी से बनाया गया 760 किलो घी भरा था। उसमें देशी घी जैसी महक थी। पुलिस टीम ने बरामद माल कब्जे में लेने के साथ घी बनाने वालों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी।
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आधी कीमत पर घी खरीदने की होड़

illegal factory of ghee caught in lucknow
पीपों में भरा चर्बी से बना घी - फोटो : amar ujala
हत्थे चढ़े मो. सलीम ने खुलासा किया कि स्लॉटर हाउस व नाले से चर्बी एकत्र करके उसे कढ़ाई में पकाने के साथ देशी घी की खुशबू मिला देते थे। प्रत्येक पीपे में 15 किलो नकली घी भरकर उसे शहर के विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करते थे। ग्राहकों के बारे में पूछताछ में कुबूला कि चाट का ठेला लगाने वालों को नकली घी बेचते थे।

दरअसल, चाट विक्रेता एक दिन की खपत के हिसाब से रोजाना खरीदारी करते हैं। चर्बी से बना घी अधिक समय तक रखने पर देशी घी की खुशबू खत्म और दुर्गंध आनी शुरू हो जाती है। उपनिरीक्षक राजेंद्र तिवारी व राकेश चौरसिया की पूछताछ में सलीम ने कुबूला कि बाजार में देशी घी चार-पांच सौ रुपये किलो के हिसाब से बिकता है।

चर्बी से बने घी को गांव से आया घी बताते थे और मोलभाव करके दो-तीन सौ रुपये किलो के हिसाब से बेच देते थे। उसने कहा कि जाबिर, राशिद व फारूख शहर के विभिन्न स्थानों पर माल बेचने जाते थे।
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