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Lucknow News: पत्थर के औजारों से धातु की चमक तक पहुंचा मानव
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कार्यक्रम में राज्य पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पू
लखनऊ। पाषाण के साधारण औजारों से शुरू हुई मानव की विकास यात्रा तकनीक, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में बदलाव के साथ धातु युग तक पहुंची। पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण और ताम्रपाषाण काल में मानव जीवन किस तरह बदला, इसकी तस्वीर शनिवार को उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से आयोजित पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के तीसरे दिन सामने आई। कार्यक्रम में मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास के साथ पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
प्रथम सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार ने ‘पाषाण उपकरणों से धातु तक प्रागैतिहासिक संस्कृतियों का विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास तथा प्रागैतिहासिक संस्कृतियों की क्रमिक विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण और ताम्रपाषाण काल से धातु युग तक मानव जीवन में हुए तकनीकी, आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की।
द्वितीय सत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद इंदु प्रकाश ने ‘एंटीक्वैरियन लॉ-लीगल प्रोविजन्स फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स’ विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। कहा कि स्मारकों एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण राज्य के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। अंत में विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने पौधा एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर वक्ताओं का सम्मान किया। मंच संचालन सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने किया। कार्यक्रम में 100 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन तथा 50 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। इस मौके पर विभाग के बलिहारी सेठ, अभयराज, अनिल, संतोष, आशीष, अकील, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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प्रथम सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार ने ‘पाषाण उपकरणों से धातु तक प्रागैतिहासिक संस्कृतियों का विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास तथा प्रागैतिहासिक संस्कृतियों की क्रमिक विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण और ताम्रपाषाण काल से धातु युग तक मानव जीवन में हुए तकनीकी, आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की।
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द्वितीय सत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद इंदु प्रकाश ने ‘एंटीक्वैरियन लॉ-लीगल प्रोविजन्स फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स’ विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। कहा कि स्मारकों एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण राज्य के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। अंत में विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने पौधा एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर वक्ताओं का सम्मान किया। मंच संचालन सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने किया। कार्यक्रम में 100 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन तथा 50 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। इस मौके पर विभाग के बलिहारी सेठ, अभयराज, अनिल, संतोष, आशीष, अकील, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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