मोदी बेअसर, गोडसे का मंदिर बनाएगी हिंदू महासभा!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही विवादित मुद्दों से अपनी सरकार को बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हिंदूवादी संगठन उनके लिए नई मुसीबत ले आए हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को अब पूजा जाएगा। हिंदू महासभा अभी तक तो सिर्फ नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लगाने की ही बात कर रही थी, मगर अब गोडसे का मंदिर बनेगा।
गोडसे के इस मंदिर का निर्माण उसी दिन शुरू होगा, जिस दिन उसने बापू को गोली मारी थी। अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने सोमवार को ये घोषणा की है कि गांधी के हत्यारे गोडसे का मंदिर लखनऊ के पास सीतापुर शहर में बनवाया जाएगा।
इस मंदिर के लिए सिधौली के पारा गांव में जमीन भी खरीद ली गई है। इसी जमीन पर 30 जनवरी से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अग्रेंजी दैनिक अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इस मंदिर में रखने के लिए गोडसे की अस्थियों के कलश को पुणे से सीतापुर लाया जाएगा।
हिंदू महासभा के प्रवक्ता शरद गुप्ता ने बताया कि गोडसे के इस कलश को बकायदा कलश यात्रा के जरिए मंगवाया जाएगा। ये कलश गोडसे की रिश्तेदार हिमानी सावरकर के पास है।
भारत माता मंदिर की जगह पर बनेगा ये मंदिर
चौंकाने वाली बात है कि ये मंदिर उसी भूमि पर बनवाया जाएगा, जहां पहले भारत माता का मंदिर बनने वाला था। ये जमीन हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी से जुड़ी हुई है। रोचक बात है कि महासभा के सदस्य इस जमीन को लेकर एक दूसरे को फंसाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
हिंदू महासभा ने बताया कि भारत माता के इस मंदिर के नींव का पत्थर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखने वाले थे लेकिन इस हिंदूवादी सोच में कांग्रेस की ही तरह भाजपा भी ज्यादा रूचि नहीं दिखा रही थी। इसी वजह से यहां महासभा ने गोडसे का मंदिर बनाने का फैसला किया है।
गोरखपुर से भाजपा के सांसद राधा मोहन दास ने बताया कि महासभा के सदस्य अगर आपसी असहमतियों को सुलझा ले तभी वो अपने काम सही ढंग से पूरे कर सकती है।
गोडसे की प्रतिमा के साथ ही हिंदू महासभा कुछ और नेशनल हीरो के स्टेच्यु को लगवा चाहती है। इसमें एक बार हिंदू महासभा के अध्यक्ष रह चुके विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा लगवाने की भी बात कही। विनायक दामोदर सावरकर ने घर वापसी और हिंदू बनाने के अभियान भी वकालत की थी।
गांधी से बड़ा देशभक्त था नाथूराम
हिंदू महासभा ने ही कुछ दिन पहले ये बयान दिया था कि नाथूराम गोडसे गांधी से भी बड़ा देशभक्त था। गोडसे ने गांधी जी की हत्या सिर्फ इसलिए की थी क्योंकि उन्होंने भारत का विभाजन करवाया था। हालांकि इस महासभा के इस बयान ने विवाद का रूप भी ले लिया।
गोडसे की प्रतिमा लगवाने को लेकर भी पिछले कुछ दिनों से राजनीति चल रही है। नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लगाने की मांग पर हिन्दू महासभा के दोनों गुटों में ठन गई थी। एक गुट का कहना है कि प्रतिमा लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए, जबकि दूसरे गुट का कहना है कि इस तरह की मांग उठाना समाज में कटुता को बढ़ावा देगा और इससे गलत संदेश जाएगा।
एक गुट के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी का दावा था कि उनका गुट ही असली हिन्दू महासभा है। उन्होंने गोडसे के प्रचार के लिए दूसरे गुट के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश कौशिक की आलोचना की थी। चक्रपाणी ने कहा कि चंद्रप्रकाश सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा कर रहे हैं।
वहीं गोडसे को लेकर यूपी के कबीना मंत्री आजम खां ने बयान दिया था कि देश का सबसे पहला आतंकवादी नाथूराम गोडसे ही था। उसने आतंकवादी वाला काम ही किया था। अब देखना ये है कि ऐसे में यूपी में जब गोडसे का मंदिर बनेगा तो इससे कितना बड़ा विवाद और बवाल जन्म लेगा।