UP Chunav 2022: इधर या उधर, नहीं कोई अगर-मगर, ग्राउंड जीरो से मतदाताओं के मन की बात
मतदाता सबको देख रहा है। परख रहा है। पर, वह किसी दुविधा में नहीं है। उसने भी तय कर लिया है कि किधर रुख करना है। ज्यादातर के मन-मस्तिष्क पर जाति-मजहब के समीकरण हावी हैं।
विस्तार
कहीं जाति-धर्म तो कहीं काम हावी, प्रत्याशी घोषित होने का भी इंतजार यूपी चुनाव का रण सज चुका है। मुद्दों की बारिश हो रही है। उनके असर को परखा जा रहा है। धार पैनी कर हथियार बनाए जा रहे हैं। ध्रुवीकरण के लिए जाति और धर्म का रंग घोला जा रहा है। उसे और गाढ़ा किया जा रहा है। भले ही फॉर्मूला पुराना हो, रंग नए हैं। सियासी हैसियत और जातीय अस्मिता के सवाल उछाले जा रहे हैं। दूसरी ओर मतदाता है, जो सबको देख रहा है। परख रहा है। पर, वह किसी दुविधा में नहीं है। उसने भी तय कर लिया है कि किधर रुख करना है। ज्यादातर के मन-मस्तिष्क पर जाति-मजहब के समीकरण हावी हैं। काम के आधार पर भी वे मूल्यांकन करते दिख रहे हैं, पर जाति-मजहब के दायरे में बंधकर...। वहीं, कुछ सीटों पर प्रत्याशी घोषित होने का भी इंतजार है। ये ज्यादातर वह सीटें हैं, जहां मौजूदा विधायकों से नाराजगी है। पेश है मतदाताओं के मिजाज की थाह लेती ये खास रिपोर्ट...
लखीमपुर : प्रत्याशी पर निर्भर होगी हार-जीत
लखीमपुर जिले में विधानसभा की आठ सीटें हैं। इन सीटों पर मतदाताओं का कैसा मिजाज है, यह जानने के लिए हम सीतापुर से लखीमपुर के लिए निकले। दोनों जिलों की सीमा पर लखीमपुर सदर का पहला गांव है-मरखापुर। यहां चाय की दुकान पर मायाराम चुनावी चर्चा में मशगूल मिले। बहस का मुद्दा है, ‘कौन पार्टी कैसा प्रदर्शन करेगी।’ एक से बढ़कर एक दलीलें दी जा रही हैं। मायाराम तर्क देते हैं, ‘मैं तो कहे देता हूं, जीते चाहे जो कोई पर टक्कर तो सपा और भाजपा के बीच ही रहेगी। लिखकर रख लो।’ उन्होंने पूरे विश्वास के साथ यह दलील दी। तो बीच से सवाल उछला, कैसे...? मायाराम बोले, गणित चाहे जो लगाओ, पर मेरी मानो तो आरक्षण सबसे बड़ा मुद्दा है। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में आरक्षण के लिए खतरा पैदा हो गया है। सबकी बातें ध्यान से सुन रहीं पिंकी देवी भी मैदान में उतर गईं। उन्होंने विषयांतर करते हुए कहा- सबसे अच्छा तो माया राज था। पर, अब बसपा उतनी मजबूत नहीं दिखती। रंजीत कुमार पिंकी की हां में हां मिलाते हुए कहते हैं, ये तो जरूर है। बसपा ने हमारे क्षेत्र से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा तो भाजपा को नुकसान हो सकता है।
ध्रुवीकरण के भी दिख रहे रंग
लखीमपुर सदर क्षेत्र में ही ओयल ढकवा के चित्र कुमार कनौजिया और संतोष अवस्थी मिले। चुनावी चर्चा चलते ही दोनों सरकार के काम ऐसे गिनाने लगे, जैसे रटे हों। संतोष अवस्थी बोले, देखो भइया प्रत्याशी चाहे जो हो, हमें तो कमल निशान से मतलब है। बस इतने में ही सब समझ लो। वहीं, लखीमपुर शहर के पिपरिया चौराहे पर प्रिंस रस्तोगी मिले। उनसे हमने सवाल किया कि इस चुनाव में लखीमपुर कांड का कितना असर दिखेगा? उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि बहुत ज्यादा असर होगा। कैसे...? आप बताइए घटना और चुनाव के बीच समय का लंबा फासला है कि नहीं? है न...? इससे घटना को लेकर लोगों का गुस्सा काफी कम हुआ है। हां, अगर गैप कम होता, तब जरूर भाजपा को नुकसान उठाना पड़ता। छुट्टा पशुओं को लेकर नाराजगी भी दिखाएगी असर लखीमपुर से गोला रोड पर आगे बढ़ने पर रुकुंदीपुर चौराहे पर लोगों की बैठकी चलती मिली। यह क्षेत्र श्रीनगर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। चर्चा छिड़ते ही कृष्णा राम वर्मा, राजाराम गौतम और वीरेंद्र कुमार छुट्टा पशुओं से हो रही परेशानी गिनाने लगे। राजाराम बोले, ‘इन जानवरों ने तो नींद हराम कर दी है। अपने जो जानवर पाले हैं उनके चारे के लिए बरसीम तक नहीं लगा सकते। सब छुट्टा जानवर चर जाते हैं।’ गौशालाओं में सुविधा नहीं है? वीरेंद्र तपाक से बोल पड़े, काहे की सुविधा? सुविधा होती तो काहे किसान परेशान होता। हमने उनसे गन्ना किसानों के सियासी मिजाज के बारे में जानना चाहा। राजाराम बोले, ‘बजाज चीनी मिल है। लोगों का पेमेंट ही नहीं करती। लटकाए रहती है। अलबत्ता अवध शुगर मिल, हरगांव से समय से पैसा मिल जाता है।’ इन लोगों का साफ-साफ कहना है कि इस चुनाव में वे सपा की ओर देखते हैं। मूर्तिहा गांव और रजागंज के लल्ला सिंह यादव, आरिफ खान और प्रमोद पासी भी ऐसी ही समस्याएं बताते हुए सपा को अपनी पसंद बताते हैं। अलबत्ता इसी क्षेत्र के दुर्गेश पांडेय भाजपा सरकार के कामों की प्रशंसा करते हैं।
कांटे की टक्कर के लिए तैयार हो रही जमीन
गोला गोकर्णनाथ (छोटी काशी) के लोग वाराणसी (काशी) में हुए कामों से बहुत प्रभावित हैं। आनंद कश्यप और रवि गुप्ता भाजपा की जीत को लेकर पूरी तरह से मुतमईन दिखे। वहीं, जितेंद्र यादव, रक्षपाल और मनीराम चुनावी चर्चा उठते ही सवाल उठाते हैं। वे जो कुछ कहते हैं उसका लब्बोलुआब है, किसानों की स्थिति में उतना सुधार नहीं हुआ जितनी उम्मीद थी। पलिया विधानसभा क्षेत्र के ही कस्बा संसारपुर के विकास सक्सेना, चंद्रभान, अजीत सिंह रघुवंशी, अचल जायसवाल और अनिल कुमार पासी दलील देते हैं, ‘इस चुनाव में भी ध्रुवीकरण रंग दिखाएगा। अयोध्या में मंदिर निर्माण का फायदा भाजपा को चुनाव में मिलेगा।’ वहीं, त्रिवेश और अजय रघुवंशी कहते हैं कि टक्कर सपा से ही होगी। उसे कमजोर कतई न समझा जाए।
पीलीभीत : समीकरण साधने में होगी परीक्षा
पीलीभीत जिले में विधानसभा की 4 सीटें हैं। यहां माहौल कुछ अलग है। पूरनपुुर (पीलीभीत) के राजीव गुप्ता और परवेज एक साथ काम करते हैं। पर, चुनावी चर्चा शुरू होते ही वे सियासी विचारधारा के अलग-अलग ध्रुवों पर न केवल खड़े नजर आते हैं, बल्कि उनकी मत भिन्नता भी उभरकर सतह पर आ जाती है। राजीव गुप्ता जिले की ज्यादातर सीटों पर भाजपा की जीत के प्रति आश्वस्त हैं, तो परवेज कहते हैं कि इस बार सपा आगे रहेगी। पीलीभीत शहर में मिले बहादुर अली, मो. इमरान और विवेक कुमार कहते हैं, ‘शहर की सीट पर हार-जीत का अंतर बहुत मामूली रहेगा। इसलिए पुख्ता तौर पर नहीं कह सकते कि कौन पार्टी जीतेगी।’ हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि जिले में भाजपा अपने एक से ज्यादा विधायकों के टिकट काटेगी। अगर ऐसा नहीं करती है, तो नुकसान तय है। जिले की बीसलपुर सीट पर बसपा के एक नेता का नाम लेते हुए वे कहते हैं कि उनको प्रत्याशी बनाने पर यहां मुस्लिम, दलित और सिख का समीकरण कमाल कर सकता है।
बदायूं : कहीं-कहीं विधायकों से नाराजगी
बदायूं जिले में 6 सीटें हैं। आंवला होते हुए हम बदायूं के कुंवरगांव पहुंचे। कुंवरगांव सदर क्षेत्र में आता है। यहां के राम औतार सागर, शेर सिंह, सोरन लाल और रूपचंद राजनीतिक परिचर्चा के दौरान स्पष्ट कहते हैं, ‘हमारे यहां मतदाताओं का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण अभी से महसूस होने लगा है।’ जिले की छह में से पांच सीटें भाजपा के पास हैं, लेकिन वे मानते हैं कि एक-दो सीटों पर जीते भाजपा के विधायक क्षेत्र में कभी आम जनता के बीच नहीं दिखे। वहीं, बदायूं के मोहल्ला नवादा के नितिन कश्यप और विनावर के विष्णु चौहान चुनावी माहौल पर कहते हैं, अंगूठा लगाकर राशन मिल रहा है। गड़बड़ी की गुंजाइश काफी कम हो गई है। किसानों के खातों में सम्मान निधि समय से आ जाती है। इन सबको देखते हुए फैसला लिया जाएगा।
कानून-व्यवस्था के पैमाने पर भी आंक रहा मतदाता
शेखपुर विधानसभा क्षेत्र के ऋषिदेव कुर्मी, महेंद्र सिंह और कैलाश सिंह कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की तारीफें करते हैं। वे कहते हैं, गुंडागर्दी काफी कम हुई है। पहले रात में खेतों तक जाने में डर लगता था। कैलाश सिंह बोले, ‘पहले तो शाम के सात बजते ही खेतों की ओर रुख करने पर चोट्टे (चोर-बदमाश) रपटाते थे, लेकिन अब न मोटर चोरी हो रहे हैं और न ही भैंसें खोलकर ले जा रहे हैं।’ बिल्सी के गांव कुरऊ के ओमवीर पाल और बरायमय खेड़ा के राजेश सिंह और होराम सिंह कहते हैं कि इस बार उनके यहां भाजपा और सपा में कांटे की टक्कर होगी। बिसौली के ग्राम तारापुर के मुंतियाज सैफी सपा को अपनी पसंद बताते हैं, तो अवनेश प्रजापति योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पहल पसंद बताते हैं। सहसवान विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रतनपुर के सत्येंद्र सक्सेना ‘लड्डू’ कहते हैं कि अभी मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी तय नहीं हैं। इसलिए मतदाता भी अपनी राय पूरी तरह से जाहिर नहीं कर पा रहे हैं। जातिगत समीकरणों की बात कर रहे वोटर बिसौली (बदायूं) में आदित्य मिश्रा चाय की दुकान चलाते हैं। चुनावी चर्चा छिड़ते ही वह कहने लगे कि कौन आगे या पीछे रहेगा, यह तो नतीजे ही बताएंगे। लेकिन, जाति बताओ तो मैं बता सकता हूं कि कौन किसको समर्थन करेगा। यहां तो चुनाव पूरी तरह से जातिगत समीकरणों पर निर्भर करता है। इसके साथ ही उन्होंने तफसील से बताया कि सामान्य वर्ग की जातियां किसके साथ हैं तो मुसलमान, कश्यप, जाटव, कुम्हार, वाल्मीकि और यादव किस पार्टी को समर्थन करेंगे। वह दावे के साथ कहते हैं, ‘मेरी दुकान पर सब आते-जाते रहते हैं। जो मैंने बताया है, उसमें 5-10 फीसदी वोट ही इधर से उधर होगा।’
बरेली : अधिकतर सीटों पर भाजपा- सपा में टक्कर
बरेली जिले की बात करें तो यहां विधानसभा की 9 सीटें हैं। यहां की नवाबगंज सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के केसर सिंह गंगवार ने सपा के भगवत सरन गंगवार को मात दी थी। कोरोना संक्रमण के कारण केसर सिंह गंगवार का निधन हो गया। यहां पान की दुकान पर मिले कौशल पटेल, छोटे लाल, योगेंद्र प्रजापति और बख्तियार मोहम्मद मानते हैं कि उनके क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर रहेगी। हालांकि, वे यह भी जोड़ते हैं कि दोनों पार्टियां किसे प्रत्याशी बनाती हैं, बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करेगा। योजनाओं के फायदे का दिखेगा असर : आंवला विधानसभा क्षेत्र के गांव गैनी में गंगा मंदिर के पास लोग आपसी चर्चाओं में मशगूल मिले। इन्हीं में से एक कल्यान सिंह यादव कहते हैं, इस सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। सपा राज में हुए कामों को ही आगे बढ़ाया। उनके यह कहते ही होरी लाल गुर्जर, अमर सिंह और सतीश तिवारी बहस में पिल पड़े। दलीलें आईं- मुफ्त राशन मिल रहा है। किसानों को सम्मान निधि मिल रही है। शौचालय व आवास भी बिना किसी भेदभाव के मिल रहे हैं।...और क्या चाहिए? होरी लाल सवालों के हमले से संभलते हुए बोले, ‘सपा ने भाजपा के एक अन्य क्षेत्र के विधायक को टिकट दिया तो यहां से भाजपा की सीट निकलनी तय है।’ यहां मिले सभी लोग टक्कर भाजपा और सपा में ही मानते हैं। विधायकों के काम-काज को परख रहे लोग बरेली शहर के रविंद्र सहारा और सुरेंद्र गंगवार मानते हैं कि विधायकों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठेंगे। वे बताते हैं, ‘जिले की कई सीटों पर भाजपा को अपने मौजूदा विधायकों के टिकट काटने होंगे, वरना अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे।’ दोनों खुद को भाजपा का ही समर्थक बताते हैं। भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र के विकास कुमार और शिवराज सिंह भी योगी सरकार के कामों को अच्छा बताते हुए रविंद्र की बातों का समर्थन करते हैं। कैंट के सुभाषनगर के सौरभ और संजय सिंह भाजपा, सपा और कांग्रेस को मुकाबले में मानते हैं। बिथरी चैनपुर विधानभा क्षेत्र के सौरभ पाराशरी और प्रभात सिंह कहते हैं, उनके यहां चुनाव में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होना तय है।
शाहजहांपुर : ध्रुवीकरण का असर कहीं ज्यादा
शाहजहांपुर में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। एनएच-730 पर हमें पुवायां विधानसभा क्षेत्र के खुटार निवासी वरुण सिंह मिले। बीएससी के छात्र वरुण चुनावी माहौल पर सवाल उठते ही तपाक से बोल पड़े, मैं हिंदू हूं। इस वजह से मेरी पसंद तो भाजपा ही है। अंकित वर्मा और जगतपाल गुप्ता भी यही दोहराते हैं। राजाराम पाल कहते हैं, ‘हार-जीत के बारे में भविष्यवाणी तो नहीं कर सकते, पर सत्ताधारी दल को टक्कर सपा ही देगी।’ शाहरुख सपा की जीत को लेकर मुतमईन दिखे। शाहजहांपुर शहर में बरेली मोड़ पर मुनीश्वर और जगतपाल मिले। दोनों पेशे से मजदूर हैं। वे कहते हैं, यह सरकार राशन, चना और तेल भी मुफ्त में दे रही है। तो फिर और किसकी ओर जाएंगे? ददरौल विधानसभा क्षेत्र के गांव मौजमपुर के ओमप्रकाश भी चर्चा के दौरान इसी का समर्थन करते हैं। अलबत्ता मोईन खान, धीरू निषाद और रविंद्र यादव अपने पत्ते नहीं खोलते। वे कहते हैं, ‘सही समय आने पर ही बताएंगे कि हमारे मन में क्या है।’ कमोबेश जिले की शेष सीटों पर भी इसी तरह का माहौल मिला।