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Lucknow News: दूसरी तारीख पर भी नहीं हुई अंसल मामले की सुनवाई
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लखनऊ। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में अंसल एपीआई की सुशांत गोल्फ सिटी मामले की सुनवाई शुक्रवार को दूसरी बार टल गई। शुक्रवार को केस का नंबर नहीं आ सका। अब केस की सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख लगी है। इस मामले से सुशांत गोल्फ सिटी के लिए करीब पांच हजार आवंटियों का हित जुड़ा है।
बीते वर्ष 17 दिसंबर को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अंसल मामले की सुनवाई हुई थी। फैसले में आवंटियों को यह राहत दी गई थी कि वह अपना पक्ष एनसीएलटी के सामने रख सकेंगे। इसके लिए एनसीएलटी को निर्देश भी दिए गए थे कि वह आवंटियों का पक्ष सुने। इसके बाद आवंटियों ने अपना पक्ष रखने के लिए एनसीएलटी में फिर से अपील की। 15 मई को पहली तारीख लगी थी। केस का नंबर नहीं आने से उस दिन सुनवाई नहीं हुई और तीन जुलाई की तारीख तय की गई। आवंटी और निवेशक गगन टंडन ने बताया कि केस का नंबर ही नहीं आ पाया। अब तीस जुलाई की तारीख मिली है।
यह है मामला
आवंटी व निवेशक गगन टंडन ने बताया कि बीते साल फरवरी में एनसीएलटी ने अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया था। उससे पहले न तो आवंटियों और निवेशकों का पक्ष जाना और न अंसल को कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस देने वाली संस्था एलडीए का पक्ष। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने से करीब पांच हजार आवंटियों परेशानी में आ गए थे क्योंकि पैसा जमा किए जाने के बाद भी अंसल ने उन्हें प्लॉट, मकान या फ्लैट नहीं दिए। एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ आवंटी अपीलीय कोर्ट में गए थे। करीब 10 महीने इंतजार के बाद आदेश हुआ कि आवंटियों का पक्ष सुना जाए। जिसके बाद आवंटियों ने एनसीएलटी में अपील की है।
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बीते वर्ष 17 दिसंबर को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अंसल मामले की सुनवाई हुई थी। फैसले में आवंटियों को यह राहत दी गई थी कि वह अपना पक्ष एनसीएलटी के सामने रख सकेंगे। इसके लिए एनसीएलटी को निर्देश भी दिए गए थे कि वह आवंटियों का पक्ष सुने। इसके बाद आवंटियों ने अपना पक्ष रखने के लिए एनसीएलटी में फिर से अपील की। 15 मई को पहली तारीख लगी थी। केस का नंबर नहीं आने से उस दिन सुनवाई नहीं हुई और तीन जुलाई की तारीख तय की गई। आवंटी और निवेशक गगन टंडन ने बताया कि केस का नंबर ही नहीं आ पाया। अब तीस जुलाई की तारीख मिली है।
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यह है मामला
आवंटी व निवेशक गगन टंडन ने बताया कि बीते साल फरवरी में एनसीएलटी ने अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया था। उससे पहले न तो आवंटियों और निवेशकों का पक्ष जाना और न अंसल को कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस देने वाली संस्था एलडीए का पक्ष। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने से करीब पांच हजार आवंटियों परेशानी में आ गए थे क्योंकि पैसा जमा किए जाने के बाद भी अंसल ने उन्हें प्लॉट, मकान या फ्लैट नहीं दिए। एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ आवंटी अपीलीय कोर्ट में गए थे। करीब 10 महीने इंतजार के बाद आदेश हुआ कि आवंटियों का पक्ष सुना जाए। जिसके बाद आवंटियों ने एनसीएलटी में अपील की है।
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