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हाथरस कांड: आरोपियों के वकील की मांग, केस का न हो मीडिया ट्रायल, पीड़ित परिवार ने की ये गुजारिश
Tue, 03 Nov 2020 12:21 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Nov 2020 12:21 AM IST
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Hathras Gang Rape Case
- फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीबीआई से हाथरस केस की जांच रिपोर्ट 25 नवंबर से पहले तलब की है। सोमवार को स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन राय की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हाईकोर्ट हाथरस कांड की सीबीआई जांच की निगरानी कर रहा है। हाथरस केस में नियुक्त न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पीड़िता के परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा मुहैया करा दी गई है।
साथ ही उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने 12 अक्तूबर के आदेश में राज्य सरकार को रात में शव का अंतिम संस्कार करने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस नीति का ड्राफ्ट बनाकर उनके पास भेजा है। इसका परीक्षण करके वह कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
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माथुर के मुताबिक राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि हाथरस कांड में राज्य सरकार पूरा सहयोग कर रही है।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हाईकोर्ट हाथरस कांड की सीबीआई जांच की निगरानी कर रहा है। हाथरस केस में नियुक्त न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पीड़िता के परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा मुहैया करा दी गई है।
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साथ ही उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने 12 अक्तूबर के आदेश में राज्य सरकार को रात में शव का अंतिम संस्कार करने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस नीति का ड्राफ्ट बनाकर उनके पास भेजा है। इसका परीक्षण करके वह कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
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माथुर के मुताबिक राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि हाथरस कांड में राज्य सरकार पूरा सहयोग कर रही है।
वहीं, आरोपियों की तरफ से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस केस का मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। जबकि पीड़िता के परिजनों की ओर से पेश अधिवक्ता सीमा कुशवाहा ने कोर्ट से पीड़िता के परिजनों के लिए एक स्थायी निवास और किसी एक परिजन को सरकारी नौकरी दिलाए जाने की गुजारिश की। कोर्ट अब इस मामले में अपना आदेश सुनाएगी।