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56 की उम्र में जज्बा हो तो ग्रैंडमॉम आशा जैसा
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अनुराग बाजपेई
56 साल की उम्र महज उनके लिए एक नंबर है। शायद यही कारण है कि चार साल के पौत्र आर्यन और डेढ़ साल की पौत्री अकीरा की दादी मां ‘अल्ट्रारनर’ आशा सिंह के लिए फिलहाल कोई भी चुनौती असंभव नहीं दिख रही है।
हालिया उपलब्धि के तहत वे बंगलूरू में दो और तीन जुलाई को होने वाली 24 ऑवर एशिया एंड ओसियाना अल्ट्रा रनिंग चैंपियनशिप में सबसे उम्रदराज एथलीट बन गई हैं।
आशा इससे पहले भी कई उपलब्धियां अपने खाते में दर्ज करा चुकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वे इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ अल्ट्रा मैराथन के तत्वावधान में बंगलूरू में होने वाले आयोजन में अपनी से आधी उम्र की एथलीट को पीछे छोड़कर देश को पदक दिलाने का करिश्मा कर सकती हैं।
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आशा ने बीते साल चार-पांच दिसंबर में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए ट्रायल में भाग लिया था, जहां उन्होंने 24 घंटे तक लगातार दौड़कर 178.8 किमी. की दूरी नापी थी, जबकि मानक 24 घंटे में कम से कम 175 किमी. रखा गया था।
इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन बंगलूरू में होने वाली 24 ऑवर एशिया एंड ओसियाना अल्ट्रा रनिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ है। 12 सदस्यीय टीम में छह महिलाएं शामिल हैं, जिसमें 56 की आशा लखनऊ की एकमात्र एथलीट हैं।
प्रदर्शन की बात करें तो आशा इससे पहले 50 वर्ष की उम्र से अधिक एथलीटों के वर्ग में तमाम उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। यह पहला मौका होगा कि वह ओपन कैटगरी में अपनी से आधी उम्र की एथलीटों से मुकाबला करेंगी।
आशा का अब तक का प्रदर्शन एक नजर में
- 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग में देश में मैराथन पूरी करने में सबसे कम समय का रिकॉर्ड (3 घंटे 41 मिनट)
- 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग में देश में हाफ मैराथन पूरी करने में सबसे कम समय का रिकॉर्ड (एक घंटा 44 मिनट)
- ओपन कैटगरी 12 घंटे में 114.70 किमी की दूरी नापने का रिकॉर्ड
- छह साल के कॅरिअर में 30 मैराथन, एक अल्ट्रा मैराथन (50 किमी), एक 12 ऑवर रन, तीन 100 किमी. रन पूरी की।
एबॉट वर्ल्ड मैराथन के लिए भी चयनित
आशा के हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन लंदन में दो अक्तूबर को होने वाले वांडा एजग्रुप वर्ल्ड मैराथन चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इसमें वे 55 पार वाले आयुवर्ग में चुनौती पेश करेंगी। अभी तक वे इस आयुवर्ग में भारत से शामिल होने वाली एकमात्र एथलीट हैं।
शौक बन कॅरिअर बना, पता नहीं चला : आशा सिंह
उम्र के 50 साल पूरे होने के बाद पति के साथ शौकिया तौर पर रनिंग शुरू की थी। कभी अल्ट्रारनर बनने का सोचा नहीं था, अपने आप ही सब कुछ हो गया। 24 ऑवर रनिंग में पहली बार देश का प्रतिनिधित्व करके रोमांचित हूं। आजकल ट्रेनिंग शेड्यूल थोड़ा बिजी है। सुबह तीन घंटे रनिंग और शाम को दो घंटे वर्कआउट करके खुद को फिट रखने का प्रयास करती हूं। बंगलूरू में केवल भाग लेकर खुश नहीं होना चाहती हूं। यहां देश के लिए पदक जीतने का पूरा प्रयास होगा। अगर पदक जीता तो इसे अपने पौत्र और पौत्री को दूंगी।
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56 साल की उम्र महज उनके लिए एक नंबर है। शायद यही कारण है कि चार साल के पौत्र आर्यन और डेढ़ साल की पौत्री अकीरा की दादी मां ‘अल्ट्रारनर’ आशा सिंह के लिए फिलहाल कोई भी चुनौती असंभव नहीं दिख रही है।
हालिया उपलब्धि के तहत वे बंगलूरू में दो और तीन जुलाई को होने वाली 24 ऑवर एशिया एंड ओसियाना अल्ट्रा रनिंग चैंपियनशिप में सबसे उम्रदराज एथलीट बन गई हैं।
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आशा इससे पहले भी कई उपलब्धियां अपने खाते में दर्ज करा चुकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वे इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ अल्ट्रा मैराथन के तत्वावधान में बंगलूरू में होने वाले आयोजन में अपनी से आधी उम्र की एथलीट को पीछे छोड़कर देश को पदक दिलाने का करिश्मा कर सकती हैं।
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आशा ने बीते साल चार-पांच दिसंबर में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए ट्रायल में भाग लिया था, जहां उन्होंने 24 घंटे तक लगातार दौड़कर 178.8 किमी. की दूरी नापी थी, जबकि मानक 24 घंटे में कम से कम 175 किमी. रखा गया था।
इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन बंगलूरू में होने वाली 24 ऑवर एशिया एंड ओसियाना अल्ट्रा रनिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ है। 12 सदस्यीय टीम में छह महिलाएं शामिल हैं, जिसमें 56 की आशा लखनऊ की एकमात्र एथलीट हैं।
प्रदर्शन की बात करें तो आशा इससे पहले 50 वर्ष की उम्र से अधिक एथलीटों के वर्ग में तमाम उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। यह पहला मौका होगा कि वह ओपन कैटगरी में अपनी से आधी उम्र की एथलीटों से मुकाबला करेंगी।
आशा का अब तक का प्रदर्शन एक नजर में
- 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग में देश में मैराथन पूरी करने में सबसे कम समय का रिकॉर्ड (3 घंटे 41 मिनट)
- 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग में देश में हाफ मैराथन पूरी करने में सबसे कम समय का रिकॉर्ड (एक घंटा 44 मिनट)
- ओपन कैटगरी 12 घंटे में 114.70 किमी की दूरी नापने का रिकॉर्ड
- छह साल के कॅरिअर में 30 मैराथन, एक अल्ट्रा मैराथन (50 किमी), एक 12 ऑवर रन, तीन 100 किमी. रन पूरी की।
एबॉट वर्ल्ड मैराथन के लिए भी चयनित
आशा के हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन लंदन में दो अक्तूबर को होने वाले वांडा एजग्रुप वर्ल्ड मैराथन चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इसमें वे 55 पार वाले आयुवर्ग में चुनौती पेश करेंगी। अभी तक वे इस आयुवर्ग में भारत से शामिल होने वाली एकमात्र एथलीट हैं।
शौक बन कॅरिअर बना, पता नहीं चला : आशा सिंह
उम्र के 50 साल पूरे होने के बाद पति के साथ शौकिया तौर पर रनिंग शुरू की थी। कभी अल्ट्रारनर बनने का सोचा नहीं था, अपने आप ही सब कुछ हो गया। 24 ऑवर रनिंग में पहली बार देश का प्रतिनिधित्व करके रोमांचित हूं। आजकल ट्रेनिंग शेड्यूल थोड़ा बिजी है। सुबह तीन घंटे रनिंग और शाम को दो घंटे वर्कआउट करके खुद को फिट रखने का प्रयास करती हूं। बंगलूरू में केवल भाग लेकर खुश नहीं होना चाहती हूं। यहां देश के लिए पदक जीतने का पूरा प्रयास होगा। अगर पदक जीता तो इसे अपने पौत्र और पौत्री को दूंगी।