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Lucknow News: युवती घायल... 40 मिनट तक नहीं आई एंबुलेंस, मौत
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पारुल। फाइल फोटो
मलिहाबाद। रहीमाबाद में हरदोई-लखनऊ हाईवे पर मंगलवार रात आठ बजे ढाबे के पास बाइक से टक्कर में स्कूटी सवार पारुल (30) घायल हो गईं। उनकी चचेरी बहन सावित्री को मामूली चोट लगी।
पारुल करीब 40 मिनट तक सड़क पर घायल पड़ी रहीं। राहगीर फोन करते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में उन्हें बाइक से निजी अस्पताल पहुंचाया गया। पारुल की हालत को देखकर डॉक्टरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। सावित्री को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
इंस्पेक्टर रहीमाबाद अरुण कुमार त्रिगुनायक ने बताया कि माल के अहमदपुर निवासी पारुल और सावित्री संडीला की हल्दीराम नमकीन फैकटरी में सुपरवाइजर थीं।
मंगलवार शाम दोनों वहां से रहीमाबाद के शेरनगर गांव गई थीं। स्कूटी पारुल चला रही थीं। उन्होंने हेलमेट भी लगाया था। लौटते वक्त ढाबे के पास तेज रफ्तार बाइक की स्कूटी में सामने से टक्कर हो गई। पारुल को गंभीर चोट आई।
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g 400 मीटर दूरी पर था अस्पताल, फिर भी करते रहे इंतजार पारुल जिस जगह घायल पड़ी रहीं वहां से निजी अस्पताल 400 मीटर की दूरी पर था। बावजूद इसके मौके पर मौजूद लोग 40 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें बाइक से अस्पताल ले जाया गया। अगर लोग पहले ही अस्पताल लेकर चले गए होते तो शायद पारुल की जान बच सकती थी।
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पारुल करीब 40 मिनट तक सड़क पर घायल पड़ी रहीं। राहगीर फोन करते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में उन्हें बाइक से निजी अस्पताल पहुंचाया गया। पारुल की हालत को देखकर डॉक्टरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। सावित्री को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
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इंस्पेक्टर रहीमाबाद अरुण कुमार त्रिगुनायक ने बताया कि माल के अहमदपुर निवासी पारुल और सावित्री संडीला की हल्दीराम नमकीन फैकटरी में सुपरवाइजर थीं।
मंगलवार शाम दोनों वहां से रहीमाबाद के शेरनगर गांव गई थीं। स्कूटी पारुल चला रही थीं। उन्होंने हेलमेट भी लगाया था। लौटते वक्त ढाबे के पास तेज रफ्तार बाइक की स्कूटी में सामने से टक्कर हो गई। पारुल को गंभीर चोट आई।
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g 400 मीटर दूरी पर था अस्पताल, फिर भी करते रहे इंतजार पारुल जिस जगह घायल पड़ी रहीं वहां से निजी अस्पताल 400 मीटर की दूरी पर था। बावजूद इसके मौके पर मौजूद लोग 40 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें बाइक से अस्पताल ले जाया गया। अगर लोग पहले ही अस्पताल लेकर चले गए होते तो शायद पारुल की जान बच सकती थी।