{"_id":"6aa70ec51d134d65f8002c6b","slug":"laparoscopic-treatment-results-in-less-pain-and-bleeding-lucknow-news-c-13-lko1070-1918321-2026-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: दूरबीन विधि से इलाज में कम होता है दर्द व रक्तस्राव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: दूरबीन विधि से इलाज में कम होता है दर्द व रक्तस्राव
विज्ञापन
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। घुटने या कंधे की गंभीर चोटों के इलाज के लिए अब बड़े चीरे की आवश्यकता कम हो गई है। दूरबीन विधि (आर्थ्रोस्कोपी) से दर्द और रक्तस्राव कम होता है। मरीज इस विधि से जल्द ठीक होकर सामान्य कामकाज पर लौट सकते हैं।
ये जानकारी केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने दी। रविवार को नौवीं केजीएमयू आर्थ्रोस्कोपी कॉन्क्लेव व कैडवरिक वर्कशॉप में डॉ. आशीष ने बताया कि आर्थ्रोस्कोपी में जोड़ के पास छोटे छेद किए जाते हैं। इनमें कैमरा डालकर अंदर की चोट को देखा जाता है। फिर विशेष उपकरणों से ऑपरेशन किया जाता है।
कार्यशाला के सचिव कुमार शांतनु ने बताया कि यह विधि घुटने और कंधे की लिगामेंट, मेनिस्कस, कार्टिलेज तथा खेल से जुड़ी चोटों में कारगर है। खिलाड़ियों और रक्षा कर्मियों के लिए इसका विशेष महत्व है। इलाज के बाद उन्हें जल्द खेल, प्रशिक्षण और ड्यूटी पर लौटाना एक चुनौती होती है। आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी और पुनर्वास इसमें काफी मदद करते हैं। कार्यशाला में डॉ. शाह वली उल्लाह, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. मयंक महेंद्र आदि डॉक्टर उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये जानकारी केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने दी। रविवार को नौवीं केजीएमयू आर्थ्रोस्कोपी कॉन्क्लेव व कैडवरिक वर्कशॉप में डॉ. आशीष ने बताया कि आर्थ्रोस्कोपी में जोड़ के पास छोटे छेद किए जाते हैं। इनमें कैमरा डालकर अंदर की चोट को देखा जाता है। फिर विशेष उपकरणों से ऑपरेशन किया जाता है।
विज्ञापन
कार्यशाला के सचिव कुमार शांतनु ने बताया कि यह विधि घुटने और कंधे की लिगामेंट, मेनिस्कस, कार्टिलेज तथा खेल से जुड़ी चोटों में कारगर है। खिलाड़ियों और रक्षा कर्मियों के लिए इसका विशेष महत्व है। इलाज के बाद उन्हें जल्द खेल, प्रशिक्षण और ड्यूटी पर लौटाना एक चुनौती होती है। आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी और पुनर्वास इसमें काफी मदद करते हैं। कार्यशाला में डॉ. शाह वली उल्लाह, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. मयंक महेंद्र आदि डॉक्टर उपस्थित रहे।
विज्ञापन