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Lucknow News: पीएमओ का अफसर बन ठगी करने वाला गिरफ्तार, कानपुर के कारोबारी से वसूले थे 20 लाख
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लखनऊ। पीएमओ का अफसर बन ठगी करने वाले जालसाज और उसके ड्राइवर को एसटीएफ ने विभूतिखंड इलाके से गिरफ्तार किया।
जालसाज ने कुछ वक्त पहले ही कानपुर के एक रियल एस्टेट कारोबारी से 20 लाख की उगाही की थी। कानपुर के बिठूर थाने में दर्ज केस में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
एसटीएफ ने खुलासा किया है कि आरोप कुछ वर्षों में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अलावा दबाव प्रभाव बनाकर करोड़ों की ठगी कर चुका है।
एसटीएफ सीओ विमल कुमार सिंह के मुताबिक, मूलरूप से वाराणसी निवासी संतोष सिंह उर्फ अभिषेक सिंह को उसके ड्राइवर धर्मेंद्र कुमार यादव को विभूतिखंड में एक होटल के पास से गिरफ्तार किया गया।
दोनों आरोपी कानपुर के बिठूर सिंहपुर में रह रहे थे। अभिषेक खुद को पीएमओ में तैनात अफसर बताता था। सरकारी काम कराने के एवज में रकम लेकर रफूचक्कर हो जाता था।
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कुछ ऐसी शिकायतें भी सामने आईं, जिसमें वह पीएमओ में तैनाती बताकर लोगों को दबाव में लेता था। ब्लैकमेल कर उगाही करता था।
एसटीएफ की जांच में ये भी सामने आया कि आरोपी का असल नाम संतोष सिंह है। लेकिन, वह अधिकतर लोगों को अपना नाम अभिषेक सिंह बताता था। इसी नाम से तमाम दस्तावेज भी उसने तैयार किए थे।
भाई को बना देता था शासन का अफसर
एसटीएफ के मुताबिक, इस खेल में उसका ममेरा भाई प्रदीप सिंह भी शामिल है। जिस किसी को वह जाल में फंसाता था तो वह विश्वास में लेने के लिए अपने भाई से फोन पर बात करवाता था। इसमें दावा करता था कि जिससे बात करवा रहा है कि वह संबंधित सरकारी विभाग के सचिव, प्रमुख सचिव या मंत्री का निजी सचिव या पीआरओ है। मोबाइल नंबर भी आईएएस, निजी सचिव आदि के नाम से सेव करता था। ट्रू कॉलर में भी इसी तरह के नाम लिखता था।
दूसरों के नाम पर फाइनेंस कराईं कारें, लगा था पुलिस का लोगो
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो कारें बरामद की। एक कार आरोपी के परिचित मऊ निवासी एमके शाही और दूसरी कार वाराणसी के शशिकांत सिंह पर है। एसटीएफ का दावा है कि आरोपी ने बताया कि ये कारें उसने उगाही की रकम से दोस्तों के नाम पर फाइनेंस कराईं। दो आईफोन, डेबिट कार्ड आदि बरामद हुए हैं।
प्रेमिका की एमबीबीएस की फीस भरी
संतोष अपने ड्राइवर व एक प्रेमिका के साथ रहता है। प्रेमिका मंधना स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी फीस भी उसी ने भरी है। पांच लाख रुपये एमके शाही को ठेकेदारी करने के लिए दिए। 22 लाख रुपये वाराणसी के डॉक्टर गुलाब चंद को व्यापार के लिए दिया है। खाते में 30 लाख रुपये मिले। जानकारी के मुताबिक, कई करोड़ रुपये आरोपी इसी तरह ठग चुका है।
बिठूर थाने में दर्ज इस केस में गिरफ्तारी
कानपुर के बिठूर सिंहपुर में एक विला में संतोष रहता है। स्वरूपनगर एमरॉल्ड गार्डन निवासी निखिल शर्मा के मुताबिक, उसकी मुलाकात संतोष सिंह से हुई थी। उसने अपना नाम अभिषेक सिंह बताया था और दावा किया था कि पीएमओ में तैनात है। उसकी सुरक्षा में एक पुलिसकर्मी भी तैनात रहता था। इसलिए वह प्रभाव में आ गए। नवंबर 2022 में उसने 20 लाख की उगाही की। आईफोन, लैपटॉप के अलावा कुछ और रकम भी हड़पी। आरोप है कि 12 अगस्त को फिर से दो लाख रुपये मांगे। न देने पर फर्जी केस दर्ज कराने की धमकी दी। तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
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जालसाज ने कुछ वक्त पहले ही कानपुर के एक रियल एस्टेट कारोबारी से 20 लाख की उगाही की थी। कानपुर के बिठूर थाने में दर्ज केस में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
एसटीएफ ने खुलासा किया है कि आरोप कुछ वर्षों में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अलावा दबाव प्रभाव बनाकर करोड़ों की ठगी कर चुका है।
एसटीएफ सीओ विमल कुमार सिंह के मुताबिक, मूलरूप से वाराणसी निवासी संतोष सिंह उर्फ अभिषेक सिंह को उसके ड्राइवर धर्मेंद्र कुमार यादव को विभूतिखंड में एक होटल के पास से गिरफ्तार किया गया।
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दोनों आरोपी कानपुर के बिठूर सिंहपुर में रह रहे थे। अभिषेक खुद को पीएमओ में तैनात अफसर बताता था। सरकारी काम कराने के एवज में रकम लेकर रफूचक्कर हो जाता था।
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कुछ ऐसी शिकायतें भी सामने आईं, जिसमें वह पीएमओ में तैनाती बताकर लोगों को दबाव में लेता था। ब्लैकमेल कर उगाही करता था।
एसटीएफ की जांच में ये भी सामने आया कि आरोपी का असल नाम संतोष सिंह है। लेकिन, वह अधिकतर लोगों को अपना नाम अभिषेक सिंह बताता था। इसी नाम से तमाम दस्तावेज भी उसने तैयार किए थे।
भाई को बना देता था शासन का अफसर
एसटीएफ के मुताबिक, इस खेल में उसका ममेरा भाई प्रदीप सिंह भी शामिल है। जिस किसी को वह जाल में फंसाता था तो वह विश्वास में लेने के लिए अपने भाई से फोन पर बात करवाता था। इसमें दावा करता था कि जिससे बात करवा रहा है कि वह संबंधित सरकारी विभाग के सचिव, प्रमुख सचिव या मंत्री का निजी सचिव या पीआरओ है। मोबाइल नंबर भी आईएएस, निजी सचिव आदि के नाम से सेव करता था। ट्रू कॉलर में भी इसी तरह के नाम लिखता था।
दूसरों के नाम पर फाइनेंस कराईं कारें, लगा था पुलिस का लोगो
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो कारें बरामद की। एक कार आरोपी के परिचित मऊ निवासी एमके शाही और दूसरी कार वाराणसी के शशिकांत सिंह पर है। एसटीएफ का दावा है कि आरोपी ने बताया कि ये कारें उसने उगाही की रकम से दोस्तों के नाम पर फाइनेंस कराईं। दो आईफोन, डेबिट कार्ड आदि बरामद हुए हैं।
प्रेमिका की एमबीबीएस की फीस भरी
संतोष अपने ड्राइवर व एक प्रेमिका के साथ रहता है। प्रेमिका मंधना स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी फीस भी उसी ने भरी है। पांच लाख रुपये एमके शाही को ठेकेदारी करने के लिए दिए। 22 लाख रुपये वाराणसी के डॉक्टर गुलाब चंद को व्यापार के लिए दिया है। खाते में 30 लाख रुपये मिले। जानकारी के मुताबिक, कई करोड़ रुपये आरोपी इसी तरह ठग चुका है।
बिठूर थाने में दर्ज इस केस में गिरफ्तारी
कानपुर के बिठूर सिंहपुर में एक विला में संतोष रहता है। स्वरूपनगर एमरॉल्ड गार्डन निवासी निखिल शर्मा के मुताबिक, उसकी मुलाकात संतोष सिंह से हुई थी। उसने अपना नाम अभिषेक सिंह बताया था और दावा किया था कि पीएमओ में तैनात है। उसकी सुरक्षा में एक पुलिसकर्मी भी तैनात रहता था। इसलिए वह प्रभाव में आ गए। नवंबर 2022 में उसने 20 लाख की उगाही की। आईफोन, लैपटॉप के अलावा कुछ और रकम भी हड़पी। आरोप है कि 12 अगस्त को फिर से दो लाख रुपये मांगे। न देने पर फर्जी केस दर्ज कराने की धमकी दी। तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की।