पाकिस्तानी जालसाज की कंपनी के दो निदेशक गिरफ्तार, 50 हजार लोगों से करीब 12 करोड़ की ठगी की
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पोंजी स्कीम चलाकर दुनियाभर में लाखों लोगों से अरबों रुपये ठगने वाली यूके की कंपनी के दो क्षेत्रीय निदेशकों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। इस कंपनी का मुखिया पाकिस्तानी है। दोनों के कब्जों से मिले अहम दस्तावेजों से फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक, दोनों जालसाज भारत में आईजेनिटेर100 व सोलमैक्स ग्रुप के नाम से वेबसाइट चलाकर ठगी कर रहे थे।
एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक अमित कुमार नागर के मुताबिक, कंपनी द्वारा ठगी की शिकायतें आने के बाद जांच के लिए टीम बनाई गई। टीम ने जांच में पाया कि मूलरूप से पाकिस्तानी अब्दुल रहमान संधु और फ्लोरियन करूगर कंपनी चलाकर ठगी का धंधा कर रहे थे। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन यूके में कराया गया। पकड़े गए जालसाजों में मूलरूप से जौनपुर का अनिरुद्ध नारायण और मऊ के मोहम्मदाबाद मदीउल्ला निवासी दीपक राय है। दोनों गोमतीनगर के सरस्वती अपार्टमेंट और गोकुल विहार में रहकर जालसाजी कर रहे थे। गाजीपुर थाने में कई पीड़ितों ने जालसाजी के मुकदमे दर्ज कराए थे।
एसटीएफ के मुताबिक, इस कंपनी के संचालकों ने विश्व में कई देशों के साथ भारत में पिछले साल अप्रैल में शाखा खोली थी। जिसे पंजाब के होशियारपुर निवासी राकेश सैनी चला रहा था। राकेश ने कम समय में ही 50 हजार लोगों का कंपनी में रजिस्ट्रेशन कराकर पोंजी स्कीम के नाम पर 12 करोड़ रुपये से अधिक राशि विदेशी खातों में जमा करा दी। जांच में सामने आया कि कंपनी पूरे विश्व में 10 लाख से अधिक लोगों से तीन अरब की ठगी कर चुकी है।
26 कंपनियां पंजीकृत, रिकॉर्ड मिला
एसटीएफ के मुताबिक, दोनों कंपनियों के कोफाउंडर अब्दुल रहमान संधू के नाम यूनाइटेड किंगडम में 26 कंपनियां और पंजीकृत हैं। वह मूलरूप से पाकिस्तान का रहने वाला है और यूनाइटेड किंगडम में बस गया है।
ब्रिटेन की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से खुद को बचाने के लिए इस कंपनी को विधिवत पंजीकृत कराया हुआ है और अवैध कार्य से दूर रखा गया है। लेकिन अन्य देशों में सोलमैक्स ग्रुप को सामने रखकर खुलेआम पोंजी स्कीम चला रहा है।
एजुकेशनल पैकेज ऑनलाइन सेल के नाम पर भेजते थे रकम
पुलिस के मुताबिक, जालसाजों द्वारा झांसा देकर जुटाई रकम को एजुकेशनल पैकेज ऑन लाइन सेल के नाम से निवेश किया जा रहा था। ताकि इतनी बड़ी रकम को विदेशी खातों में आसानी से ट्रांसफर किया जा सके। यह कंपनी न तो भारत में रजिस्टर्ड थी और न ही इसका कोई कार्यालय है। यहां तक कि जालसाजों ने किसी निवेशक को रकम जमा करने के बाद रसीद तक नहीं दी।
कंपनी ने मुनाफे का लालच देकर विदेश में निवेश कराया। यह रकम 25 पाउंड से लेकर 5 हजार पाउंड तक 8 श्रेणियों में जमा कराई जाती थी। बदले में कंपनी के शेयर का हिस्सा देने का वादा किया जाता था जबकि यह कंपनी किसी भी शेयर बाजार में पंजीकृत तक नहीं है।
तीन क्षेत्रीय निदेशक सहित कई की तलाश शुरू
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि कंपनी ने अनिरुद्ध नारायण के समकक्ष देश में तीन और लोगों को निदेशक बनाया था। इसमें पंजाब के गुरप्रीत सिंह, गुजरात के अमरजीत पुरवा और संजय सोनरके शामिल हैं। वहीं, अनिरुद्ध के खिलाफ बिहार के भभुआ में दो मुकदमे पहले से पंजीकृत हैं। निवेश करने वालों को लालच देने के लिए महंगे तोहफे देते थे। इसमें एपल वॉच, मर्सीडीज बेंज कार, रोल्सराय कार, एपल मैकबुक जैसे गिफ्ट निवेश के बाद देने का वादा किया जाता था। अनिरुद्ध ने कुबूला कि उसके द्वारा 20 हजार लोगों को जोड़ा गया है। इनके द्वारा उसने हासिल की गई पांच करोड़ की रकम विदेशी खातों में जमा कराया है। इसके अलावा जमीनों की खरीद-फरोख्त की।