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Lucknow News: सुभाष छात्रावास में मारपीट के मामले में पांच छात्र निलंबित
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लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के सुभाष छात्रावास में गत 31 अगस्त को हुए विवाद के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विवेचना अवधि तक निलंबन के साथ उनके छात्रावास के कमरों का आवंटन भी निरस्त कर दिया गया है। सभी छात्र विश्वविद्यालय के दोनों परिसरों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। आरोप था कि मेस में खाने को लेकर छात्रों ने मारपीट की थी।
विवि के कुलानुशासक कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, एक सितंबर को हसनगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 115(2), 352 और 351(3) के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपित छात्रों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब को प्रथम दृष्टया भ्रामक और ग्राह्य न मानते हुए और जांच समिति की नौ सितंबर की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई। निलंबित छात्रों में एमकॉम द्वितीय वर्ष के रिषु जायसवाल, सत्यम प्रताप सिंह, अस्मित सिंह और सुनील कुमार सिंह और विवेक पांडेय शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में इन्हें छात्रोचित सभी सुविधाओं से भी वंचित रखा जाएगा।
शिवाजी यादव का पुराना निलंबन भी प्रभावी
इस मामले में एमए हिंदी द्वितीय वर्ष के छात्र शिवाजी यादव का पूर्व में जारी निलंबन आदेश भी यथावत प्रभावी रहेगा। विश्वविद्यालय ने उन्हें इस घटना में भी निलंबित माना है। सभी संबंधित छात्रों को आदेश प्राप्त होने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब न देने पर विश्वविद्यालय प्रशासन उनके विरुद्ध अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करेगा।
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विवि के कुलानुशासक कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, एक सितंबर को हसनगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 115(2), 352 और 351(3) के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपित छात्रों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब को प्रथम दृष्टया भ्रामक और ग्राह्य न मानते हुए और जांच समिति की नौ सितंबर की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई। निलंबित छात्रों में एमकॉम द्वितीय वर्ष के रिषु जायसवाल, सत्यम प्रताप सिंह, अस्मित सिंह और सुनील कुमार सिंह और विवेक पांडेय शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में इन्हें छात्रोचित सभी सुविधाओं से भी वंचित रखा जाएगा।
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शिवाजी यादव का पुराना निलंबन भी प्रभावी
इस मामले में एमए हिंदी द्वितीय वर्ष के छात्र शिवाजी यादव का पूर्व में जारी निलंबन आदेश भी यथावत प्रभावी रहेगा। विश्वविद्यालय ने उन्हें इस घटना में भी निलंबित माना है। सभी संबंधित छात्रों को आदेश प्राप्त होने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब न देने पर विश्वविद्यालय प्रशासन उनके विरुद्ध अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करेगा।
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