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Raebareli: कार के अंदर दम घुटने से दो बच्चों की मौत, खबर सुनकर रो पड़ा सऊदी में नौकरी कर रहा पिता

Wed, 29 May 2024 04:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, परशदेपुर (रायबरेली)
संवाद न्यूज एजेंसी, परशदेपुर (रायबरेली) Updated Wed, 29 May 2024 04:15 PM IST
सार

बच्चों की मौत कार के अंदर दम घुटने से हुई है। बताया जा रहा है कि अगर हल्का सा भी शीशा खुला होता तो उनकी जान बच सकती थी। अनजान होने के कारण बच्चे लॉक हुई एसयूवी के गेट को भी नहीं खोल पाए। 

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Two died in a car: Father cries in Saudi after hearing the news of child's death
मृतकों के घर पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कार के अंदर फंसकर दम घुटने से दो बच्चों की मौत के बाद परशदेपुर के सात मोहल्लों और जायस में मातम का माहौल है। ननिहाल में गर्मी की छुट्टी बिताने गए अब्दुल्ला की मौत की खबर ने सऊदी के रियाद में रह रहे पिता चांद को झकझोर दिया। घर के इकलौते चिराग के बुझते ही वह दहाड़े मारकर रो पड़ा। दोनों परिवारों में कोहराम मचा है। सगे संबंधी भी ढांढस बंधाने के लिए पहुंच रहे हैं।

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अमेठी जिले के जायस निवासी चांदनी बीती 26 मई को गर्मी की छुट्टी बिताने अपने मायके परशदेपुर कस्बे के कजियाना मोहल्ला आई थी। उसके घर का इकलौता चिराग अब्दुल्ला भी मां के साथ ननिहाल आया था। कार में दम घुटने से चार साल के अब्दुल्ला के साथ ही उसके छह साल के मामा कोनैन ने भी दम तोड़ दिया।
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अब्दुल्ला के पिता मो. चांद परिवार के भरण पोषण के लिए सऊदी में नौकरी करते है। बेटे की मौत की खबर ने उसे झकझोर दिया। वह बेटे के जनाजे में शामिल होने के लिए सऊदी से निकल लिया है। मृतक अब्दुल्ला की मां चांदनी बेटे की मौत के बाद बदहवास है। मुख से बस यही निकलता है कि ई का होइ गवा, अब केहके सहारे जियब और रोने लगती है।
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दोनों बच्चों की दर्दनाक मौत से पूरा कस्बा सहम गया। परिजन रो-रोकर बेहाल हैं। बेटे की मौत के बाद पिता मो. रासिद व मां कैसरून बानों सहम गईं। मृतक अब्दुल्ला की मां चांदनी गम में बेहोश होकर गिर पड़ी। चौकी इंचार्ज मोहित कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

आठ भाई-बहनों में सबसे छोटा था कोनैन
कोनैन अपने आठ भाई बहनों में सबसे छोटा था। वह सभी का दुलारा था। पिता मो. रासिद किसानों की फसल खरीद कर उसे बेचकर अपना परिवार चलाता है। बेटे की दर्दनाक मौत के बाद उसके आंसू नहीं थम रहे हैं। पूरे परिवार में गम का माहौल है। सगे संबंधी घर पहुंचकर परिवार के लोगों को ढांढस बंधा रहे हैं।


कार के शीशे खुले होते तो न जाती जान
घर के पीछे खड़ी कार के शीशे थोड़े भी खुले होते तो बच्चों की जान न जाती। अनजान होने के कारण बच्चे लॉक हुई एसयूवी के गेट को भी नहीं खोल पाए। एसयूवी के अंदर फंसे बच्चों ने जान बचाने के लिए बहुत प्रयास किया होगा, लेकिन वे कार का कोई भी गेट नहीं खोल पाए।

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