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Lucknow News: 25 लाख और बढ़ेगा हर पार्षद का कोटा, 10 लाख से काम के ई-टेंडर से बाहर
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पप्पू और रावण कहने पर सदन में कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच भिड़ंत
लखनऊ। नवगठित नगर निगम सदन की शनिवार को हुई पहली बैठक में पप्पू और रावण कहने पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच कई बार कहासुनी और हंगामा भ हुआ। हालांकि इसी बीच पार्षद कोटा 1.50 करोड़ से बढ़ाकर 1.75 करोड़ सालाना और 10 लाख रुपये से कम के काम भी ई टेंडर से नहीं कराने पर सहमति बन गई। नगर आयुक्त ने सदन में कहा कि वार्ड विकास निधि से होने वाले महापौर कोटा, नगर आयुक्त कोटा और पार्षद कोटा सभी के काम मैनुअल टेंडर से कराए जाएंगे। करीब सात घंटे चली सदन की बैठक हंगामे के चलते दो बार स्थगित हुई और एजेंडे में शामिल कचरा प्रबंधन, मार्ग प्रकाश लाइटों की खरीद, सफाई उपकरणोंं की खरीद सहित कई प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। अब रविवार को फिर सदन की बैठक होगी, जिसमें प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी। बीती 26 जून को हुई नगर निगम कार्यकारिणी की पहली बैठक में महापौर कोटा 17 करोड़ से बढ़ाकर 35 करोड़, नगर आयुक्त कोटा 10 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ और पार्षद कोटा 1.25 करोड़ से बढ़ाकर 1.50 करोड़ किया गया था। सदन में भाजपा पार्षद सौरभ सिंह मोनू ने प्रस्ताव रखा कि कार्यकारिणी में पास प्रस्ताव के तहत महापौर और पार्षद कोटे में जीएसटी शामिल न हो, पार्षद कोटा जो बढ़कर 1.50 करोड़ किया गया है, उमसें करीब 25 लाख रुपये जीएसटी भी शामिल है। जिस पर सदन में सहमति जताई। भाजपा पार्षद दल के उप नेता सुशील तिवारी पम्मी ने सदन में कहा कि कार्यकारिणी ने 10 लाख रुपये से कम के काम मैनुअल टेंडर से कराए जाने का प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद पार्षद और महापौर कोटे पर तो यह नियम लागू है, मगर नगर आयुक्त कोटे के काम ई टेंडर से हो रहे हैं। वार्ड विकास निधि में यह दोहरी व्यवस्था नहीं चलेगी। नगर आयुक्त कोटे के काम भी मैनुअल टेंडर से कराए जाएं। इसपर नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने सदन में कहा कि वार्ड नगर आयुक्त कोटे के काम भी मैनुअल टेंडर से कराए जाएंगे, लेकिन 15वां वित्त या अवस्थापना निधि के काम ई टेंडर से ही कराए जाएंगे। इस बीच भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान और कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी ने कहा कि जब प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 10 लाख रुपये तक के काम ई टेंडर से बाहर कर दिए तो फिर नगर निगम अड़ंगा क्यों लगा रहा है। जिस पर नगर आयुक्त ने केंद्र व राज्य सरकार से मिलने वाले बजट को लेकर शासनादेश का हवाला दिया कि उसमें ई टेंडर ही लागू होगा।
पप्पू और रावण से गर्माया माहौल
कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान और भाजपा पार्षद भृगुनाथ शुक्ला के बीच पप्पू और रावण कहने को लेकर दो बार हंगामा बवाल हुआ, जिसके कारण एक बार सदन की बैठक भी स्थगित की गई। सदन में चर्चा के दौरान जहां भाजपा पार्षद ने कांग्रेस पार्षद के बीच में बोलने पर राहुल का नाम लिए बिना ही पप्पू कहा तो कांग्रेस पार्षद ने मोदी का नाम लिए बिना कहा कि अहंकार तो रावण का नहीं चला, इसको लेकर खूब हंगामा हुआ।
रंजीत ने फेंका माइक
नगर निगम सदन की पहली बैठक शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई। पार्षदोंं को वार्ड की समस्याओंं को उठाने के लिए मौका दिया गया। वार्ड के सीरियल नंबर से शुरूआत की गई। मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह जब बोलेने लगे तो माइक ही काम नहींं कर रहा था, जिससे वह नाराज हो गए और माइक फेंक दिया। इसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया ओर माइक की व्यवस्था सही कराई गई।
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ये प्रस्ताव भी हुए पास
- नगर आयुक्त ने कहा कि सीवर सफाई को लेकर मुख्य जिम्मेदारी जलकल विभाग की है। शुएज कंपनी तो ठेकेदार है। उससे काम कराना और उसको देखना जलकल की जिम्मेदारी है। जलकल विभाग भी पानी और सीवर मेंटेनेंस के नाम पर कर्मचारियों और अन्य कार्यों पर सालाना 375 करोड़ रुपये खर्च करता है।
- नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम की जमीन पर यदि कहीं कब्जे होते हैं तो उसे रोकने की जिम्मेदारी जोनल अफसर की है। वह यह कहकर नहीं बच सकते कि यह संपत्ति विभाग का मामला है। यदि वह ऐसा कहते हैं तो उनको जोनल अफसर बनने का अधिकार नहीं है।
- सदन में कानपुर रोड पर स्ट्रीट लाइट पोल के करंट से हुई बच्ची के मौत मामले को देखते हुए नगर आयुक्त ने सदन में कहा कि शहर में जो भी पोल स्ट्रीट लाइट के लगे हैं, उनमें यदि कहीं तार खुले हैं बाहर हैं तो उनकी टेपिंग की जाएगी। इसका प्रमाण भी स्ट्रीट लाइट वाले देंगे।
- टूटी पुलिया की मरम्मत, सीवर का ढक्कन आदि छोटे ऐसे जरूरी काम जो एक लाख रुपये से कम के हैं, उनको जोनल इंजीनियर कराने के लिए अधिकृत हैं।
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लखनऊ। नवगठित नगर निगम सदन की शनिवार को हुई पहली बैठक में पप्पू और रावण कहने पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच कई बार कहासुनी और हंगामा भ हुआ। हालांकि इसी बीच पार्षद कोटा 1.50 करोड़ से बढ़ाकर 1.75 करोड़ सालाना और 10 लाख रुपये से कम के काम भी ई टेंडर से नहीं कराने पर सहमति बन गई। नगर आयुक्त ने सदन में कहा कि वार्ड विकास निधि से होने वाले महापौर कोटा, नगर आयुक्त कोटा और पार्षद कोटा सभी के काम मैनुअल टेंडर से कराए जाएंगे। करीब सात घंटे चली सदन की बैठक हंगामे के चलते दो बार स्थगित हुई और एजेंडे में शामिल कचरा प्रबंधन, मार्ग प्रकाश लाइटों की खरीद, सफाई उपकरणोंं की खरीद सहित कई प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। अब रविवार को फिर सदन की बैठक होगी, जिसमें प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी। बीती 26 जून को हुई नगर निगम कार्यकारिणी की पहली बैठक में महापौर कोटा 17 करोड़ से बढ़ाकर 35 करोड़, नगर आयुक्त कोटा 10 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ और पार्षद कोटा 1.25 करोड़ से बढ़ाकर 1.50 करोड़ किया गया था। सदन में भाजपा पार्षद सौरभ सिंह मोनू ने प्रस्ताव रखा कि कार्यकारिणी में पास प्रस्ताव के तहत महापौर और पार्षद कोटे में जीएसटी शामिल न हो, पार्षद कोटा जो बढ़कर 1.50 करोड़ किया गया है, उमसें करीब 25 लाख रुपये जीएसटी भी शामिल है। जिस पर सदन में सहमति जताई। भाजपा पार्षद दल के उप नेता सुशील तिवारी पम्मी ने सदन में कहा कि कार्यकारिणी ने 10 लाख रुपये से कम के काम मैनुअल टेंडर से कराए जाने का प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद पार्षद और महापौर कोटे पर तो यह नियम लागू है, मगर नगर आयुक्त कोटे के काम ई टेंडर से हो रहे हैं। वार्ड विकास निधि में यह दोहरी व्यवस्था नहीं चलेगी। नगर आयुक्त कोटे के काम भी मैनुअल टेंडर से कराए जाएं। इसपर नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने सदन में कहा कि वार्ड नगर आयुक्त कोटे के काम भी मैनुअल टेंडर से कराए जाएंगे, लेकिन 15वां वित्त या अवस्थापना निधि के काम ई टेंडर से ही कराए जाएंगे। इस बीच भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान और कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी ने कहा कि जब प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 10 लाख रुपये तक के काम ई टेंडर से बाहर कर दिए तो फिर नगर निगम अड़ंगा क्यों लगा रहा है। जिस पर नगर आयुक्त ने केंद्र व राज्य सरकार से मिलने वाले बजट को लेकर शासनादेश का हवाला दिया कि उसमें ई टेंडर ही लागू होगा।
पप्पू और रावण से गर्माया माहौल
कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान और भाजपा पार्षद भृगुनाथ शुक्ला के बीच पप्पू और रावण कहने को लेकर दो बार हंगामा बवाल हुआ, जिसके कारण एक बार सदन की बैठक भी स्थगित की गई। सदन में चर्चा के दौरान जहां भाजपा पार्षद ने कांग्रेस पार्षद के बीच में बोलने पर राहुल का नाम लिए बिना ही पप्पू कहा तो कांग्रेस पार्षद ने मोदी का नाम लिए बिना कहा कि अहंकार तो रावण का नहीं चला, इसको लेकर खूब हंगामा हुआ।
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रंजीत ने फेंका माइक
नगर निगम सदन की पहली बैठक शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई। पार्षदोंं को वार्ड की समस्याओंं को उठाने के लिए मौका दिया गया। वार्ड के सीरियल नंबर से शुरूआत की गई। मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह जब बोलेने लगे तो माइक ही काम नहींं कर रहा था, जिससे वह नाराज हो गए और माइक फेंक दिया। इसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया ओर माइक की व्यवस्था सही कराई गई।
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ये प्रस्ताव भी हुए पास
- नगर आयुक्त ने कहा कि सीवर सफाई को लेकर मुख्य जिम्मेदारी जलकल विभाग की है। शुएज कंपनी तो ठेकेदार है। उससे काम कराना और उसको देखना जलकल की जिम्मेदारी है। जलकल विभाग भी पानी और सीवर मेंटेनेंस के नाम पर कर्मचारियों और अन्य कार्यों पर सालाना 375 करोड़ रुपये खर्च करता है।
- नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम की जमीन पर यदि कहीं कब्जे होते हैं तो उसे रोकने की जिम्मेदारी जोनल अफसर की है। वह यह कहकर नहीं बच सकते कि यह संपत्ति विभाग का मामला है। यदि वह ऐसा कहते हैं तो उनको जोनल अफसर बनने का अधिकार नहीं है।
- सदन में कानपुर रोड पर स्ट्रीट लाइट पोल के करंट से हुई बच्ची के मौत मामले को देखते हुए नगर आयुक्त ने सदन में कहा कि शहर में जो भी पोल स्ट्रीट लाइट के लगे हैं, उनमें यदि कहीं तार खुले हैं बाहर हैं तो उनकी टेपिंग की जाएगी। इसका प्रमाण भी स्ट्रीट लाइट वाले देंगे।
- टूटी पुलिया की मरम्मत, सीवर का ढक्कन आदि छोटे ऐसे जरूरी काम जो एक लाख रुपये से कम के हैं, उनको जोनल इंजीनियर कराने के लिए अधिकृत हैं।