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आपदा में भी खेल : कोरोना काल में सब कुछ बंद था मगर मदरसों में कर डाली नियुक्तियां, सरकार को सौंपी रिपोर्ट

Tue, 21 Jun 2022 01:35 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमित मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 21 Jun 2022 01:35 AM IST
सार

अहम सवाल यह भी है कि मदरसों में छात्र लगातार कम हो रहे हैं। फिर ऐसी जल्दी में नियुक्तियों की क्या आवश्यकता थी?  वर्ष 2016 में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में कुल 4 लाख 22 हजार 667 विद्यार्थी रजिस्टर्ड थे।

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Even in disaster, everything was closed during the Corona period, but appointments were made in madrasas, report submitted to the government
मदरसा - फोटो : Twitter

विस्तार

कोरोना महामारी के दौरान मदरसों में की गई नियुक्तियों को लेकर खेल सामने आ रहा है। उस वक्त जब सभी स्कूल-कॉलेज बंद चल रहे थे, लॉकडाउन लगा हुआ था, मौका देखकर मदरसों में अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों की गलत तरीके से नियुक्तियां कर दी गईं। यही नहीं, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने भी गुपचुप तरीके से इन्हें स्वीकृति दे दी। पूरे प्रकरण की अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिवों से जांच कराई गई तो भर्ती का यह खेल सामने आया। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। इसमें नियुक्तियों में खेल की बात कहकर संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई एवं उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की सिफारिश की गई है।

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उप्र में 558 मदरसे ऐसे हैं जो अनुदानित हैं। इनमें शिक्षक तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों का अधिकार प्रबंधक कमेटियों को है। नियम यह है कि यहां नियुक्तियों के लिए उप्र मदरसा शिक्षा परिषद काअनुमोदन लेना पड़ता है। कोरोना के दौरान विभिन्न जिलों में मदरसों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गईं। वह भी तब जबकि मदरसे, स्कूल-कॉलेज सब बंद चल रहे थे। 
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गलत हुई हैं नियुक्तियां : धर्मपाल
‘कोरोना काल में नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए थीं। बताया गया है कि नियुक्तियां विधि विरुद्घ की गई हैं। पत्रावली का पूरा अध्ययन कर कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता हुई तो उच्च स्तरीय कमेटी से विस्तृत जांच भी कराएंगे।’ 
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- धर्मपाल सिंह कैबिनेट मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

नियुक्तियों का ब्यौरा मांगा तो करते रहे टालमटोल

कोरोना महामारी के दौरान मदरसों में की गई नियुक्तियों की बाबत प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एक अप्रैल 2020 से की गई नियुक्तियों का पूरा ब्यौरा रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद से मांगा था। पहले तो इसमें टाल मटोल की गई, पर रिमाइंडर भेजने पर सूचनाएं प्रेषित कर दी गईं। इन सभी की जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में सामने आया कि आजमगढ़ मंडल में ही लगभग सौ नियुक्तियां, प्रयागराज में तीस से ज्यादा, कानपुर में 20 से ज्यादा नियुक्तियां दी गई हैं। बताया जा रहा है कि कुल तीन सौ से ज्यादा नियुक्तियां इस अवधि में की गईं। विशेष सचिवों ने अपनी रिपोर्ट में मामले की विस्तृत जांच की सिफारिश की है।

बड़ा सवाल : छात्र लगातार कम हो रहे तो नियुक्तियों में जल्दबाजी क्यों
अहम सवाल यह भी है कि मदरसों में छात्र लगातार कम हो रहे हैं। फिर ऐसी जल्दी में नियुक्तियों की क्या आवश्यकता थी?  वर्ष 2016 में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में कुल 4 लाख 22 हजार 667 विद्यार्थी रजिस्टर्ड थे। वर्ष 2017 में यह संख्या घटकर तीन लाख 71 हजार 52 रह गई। वर्ष 2018 में दो लाख 70 हजार 755, वर्ष 2019 में दो लाख छह हजार 337, वर्ष 2020 में एक लाख 82 हजार 259, वर्ष 2021 में एक लाख 82 हजार थे। इस वर्ष 2022 में एक लाख 63 हजार 999 छात्र ही रह गए हैं।

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