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इंजीनियरिंग छात्रों ने परिवहन निगम का ई-पेमेंट सिस्टम किया हैक, उड़ाए लाखों रुपये

Sat, 04 Aug 2018 04:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 04 Aug 2018 04:20 PM IST
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engineering students hacked e-payment system of transport department in lucknow
गिरफ्त में मुदित और अमित - फोटो : amarujala
एसटीएफ ने यूपीएसआरटीसी के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम से छेड़छाड़ कर ई-टिकट बुकिंग का लाखों रुपया उड़ाने वाले दो इंजीनियरिंग छात्रों सहित चार शातिरों को शुक्रवार दोपहर लखनऊ के वजीरगंज से दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों को वजीरगंज पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
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एसटीएफ के एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि परिवहन विभाग की वेबसाइट यूपीएसआरटीसी डॉट कॉम से टिकट की बुकिंग में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट से टिकट तो बुक हो रहे हैं, लेकिन उनका पैसा नहीं मिल रहा है।
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ऐसा लग रहा है कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम से पैसा परिवहन विभाग के खाते में आने के बजाए कहीं और जा रहा है। अधिकारियों ने इस मामले में वजीरगंज कोतवाली में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।
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एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने जांच एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह को सौंपी थी। बकौल डॉ. त्रिवेणी, जांच के दौरान कानपुर के रावतपुर गांव निवासी व लखनऊ के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे अमित कुमार भारती को चिह्नित किया गया। उसे पकड़कर पूछताछ की गई तो पूरा खेल सामने आ गया।

फेसबुक और वॉट्सएप ग्रुप से सीखते थे तरीके

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डेमो
एएसपी ने बताया कि अमित अपने साथी कानपुर के रावतपुर गांव के आनंदनगर निवासी व वहीं के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग के छात्र मुदित शर्मा व दो किशोर साथ हुए। चारों ने मिलकर यूपीएसआरटीसी की वेबसाइट के ऑनलाइन सिस्टम को बर्प सुइट नाम के हैकिंग टूल से हैक कर लिया था।

शातिर छात्र वॉल्वो व अन्य बसों के ई-टिकट बुक करके लोगों से कैश रुपया ले रहे थे। डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि हैकर्स गिरोह में बंगलुरू, अहमदाबाद, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के इंजीनियरिंग के छात्र शामिल हैं।

अमित ने बताया कि ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को हैक करने वाले सैकड़ों गिरोह देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं। इस गिरोह के सदस्यों ने फेसबुक और वॉट्सएप पर अलग-अलग ग्रुप बना रखे हैं। गिरोह के सदस्य इन ग्रुप में हैकिंग के तरीके शेयर करते हैं।

डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि हैकर्स सोशल मीडिया पर ई-टिकट की बुकिंग पर हैवी डिस्काउंट के ऑफर देते थे। वॉट्सएप के कई ग्रुप में उन्होंने ई-टिकट की बुकिंग पर 10 से 40 प्रतिशत तक की छूट का ऑफर दिया।

फर्जी अकाउंट में जमा कराते थे रुपया

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डेमो - फोटो : डेमो
कानपुर में जिस कॉलेज में मुदित पढ़ता है, वहां के छात्रों के लिए टिकट बुक करके उनसे कैश रकम ले लेता था। हैकर्स यूपीएसआरटीसी के अलावा देश में ऑनलाइन खरीद-फरोख्त करने वाली कई वेबसाइट के सिस्टम को भी हैक करते थे।

डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि कानून के शिकंजे से बचने के लिए हैकर्स अपने नाम से कुछ काम नहीं करते थे। उन्होंने फर्जी आईडी से मोबाइल नंबर लिए। फर्जी ई-मेल आईडी बनाईं। यहां तक की पेटीएम का फर्जी अकाउंट भी खोला। वह ग्राहकों से या तो कैश रुपये लेते थे या फिर पेटीएम के फर्जी अकाउंट में रुपया जमा कराते थे।

डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि शातिर छात्र बर्प सुइट नाम के हैकिंग टूल के जरिए पेमेंट गेटवे को गलत मैसेज भेजकर घोटाला करते थे। उन्होंने बताया कि यूपीएसआरटीसी की वेबसाइट के ऑनलाइन बुकिंग ऑप्शन में टिकट का ब्यौरा डालने के बाद पेमेंट के लिए क्लिक करना होता है।

संबंधित ग्राहक के बैंक से पेमेंट के सफल या असफल होने का मैसेज गेटवे को भेजा जाता था। शातिर बर्प सुइट टूल के जरिए मनचाहा मैसेज भिजवा देते थे। वह ऐसे बैंक अकाउंट से पेमेंट करते, जिसमें रुपया ही नहीं होता था। बैंक से पेमेंट गेटवे को ट्रांजेक्शन असफल का मैसेज भेजा जाता।

हैकिंग के बाद देखते थे मूवी, मंगाते थे पिज्जा

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डेमो
इस मैसेज को वह बीच में ही हैक करके ट्रांजेक्शन सफल में बदल देते थे। गेटवे को पेमेंट पूरा होने का मैसेज मिल जाता और ई-टिकट की बुकिंग हो जाती। इधर, शातिर हैकर संबंधित ग्राहक से कैश ये पेटीएम अकाउंट में रुपया ट्रांसफर करा लेते थे।

परिवहन विभाग के रिकॉर्ड मिलाने पर पता चला कि कई बुकिंग के रुपये आए ही नहीं। इसके बाद एसटीएफ से मामले की शिकायत की गई। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 10 दिन में करीब नौ लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी।

हालांकि, एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि परिवहन विभाग में नियमित रूप से ऑडिट नहीं होता है इसलिए यह गड़बड़ी नहीं पकड़ी जा सकी।  डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि हैकिंग टूल से वेबसाइट का सिस्टम हैक करके शातिर इंजीनियर खूब मजे करते थे। वह मूवी के टिकट बुक कराकर फिल्में देखते थे। ऑनलाइन पिज्जा ऑर्डर करते थे।

 
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