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Lucknow News: बजट न मिलने से स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर खुद खरीद रहे सामान
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- हर केंद्र का ढाई लाख रुपये का बजट, दो साल से फंसा हुआ है बजट
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। दो साल से बजट न मिलने से पीएचसी व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संचालन में अड़चन आ रही है। यहां तैनात डॉक्टर अपने वेतन से झाड़ू, पोछा, पेन, पेपर, साबुन समेत अन्य जरूरी सामान खरीद रहे हैं। डॉक्टरों ने कई बार इसकी शिकायत सीएमओ से की, मगर सुनवाई नहीं हुई।
सीएमओ के अधीन 108 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर), 54 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) है। इनमें से आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) और पीएचसी को करीब दो साल से बजट नहीं दिया गया है। हर सरकारी अस्पताल के मेंटनेंस के लिए आठ हजार रुपये प्रतिमाह का बजट तय है। इसके अलावा आरकेएस (रोगी कल्याण समिति) का सालाना बजट पौने दो लाख रुपये समेत अन्य खर्च के लिए करीब ढाई लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित है।
कई पीएचसी प्रभारियों ने बताया कि सीएमओ, डिस्ट्रिक्ट अकाउंट मैनेजर (डैम) समेत अन्य अफसरों से कई बार बजट न मिलने की शिकायत की गई, लेकिन बजट नहीं जारी किया गया है। ऐसे में मरीजों की दवाओं को ट्रांसपोर्टनगर स्टोर से लाने से लेकर ओपीडी स्लिप, पर्चा बनवाने के लिए प्रिंटर का कॉर्टेज तक खरीदने की समस्या आ रही है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि बजट का कोई भी मसला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि बजट के अभाव में समस्या हो रही है तो उसे दूर कराया जाएगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। दो साल से बजट न मिलने से पीएचसी व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संचालन में अड़चन आ रही है। यहां तैनात डॉक्टर अपने वेतन से झाड़ू, पोछा, पेन, पेपर, साबुन समेत अन्य जरूरी सामान खरीद रहे हैं। डॉक्टरों ने कई बार इसकी शिकायत सीएमओ से की, मगर सुनवाई नहीं हुई।
सीएमओ के अधीन 108 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर), 54 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) है। इनमें से आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) और पीएचसी को करीब दो साल से बजट नहीं दिया गया है। हर सरकारी अस्पताल के मेंटनेंस के लिए आठ हजार रुपये प्रतिमाह का बजट तय है। इसके अलावा आरकेएस (रोगी कल्याण समिति) का सालाना बजट पौने दो लाख रुपये समेत अन्य खर्च के लिए करीब ढाई लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित है।
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कई पीएचसी प्रभारियों ने बताया कि सीएमओ, डिस्ट्रिक्ट अकाउंट मैनेजर (डैम) समेत अन्य अफसरों से कई बार बजट न मिलने की शिकायत की गई, लेकिन बजट नहीं जारी किया गया है। ऐसे में मरीजों की दवाओं को ट्रांसपोर्टनगर स्टोर से लाने से लेकर ओपीडी स्लिप, पर्चा बनवाने के लिए प्रिंटर का कॉर्टेज तक खरीदने की समस्या आ रही है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि बजट का कोई भी मसला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि बजट के अभाव में समस्या हो रही है तो उसे दूर कराया जाएगा।
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