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Lucknow News: ड्रैगन फ्रूट होगा अब ज्यादा मीठा, किसानों की आमदनी भी बढ़ाएगा
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कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल को विवि में उत्पादित ड्रैगन फ्रूट भेंट करते उद्यान विभाग के सह आच
अभिषेक सहज
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) ने अपने परिसर में ड्रैगन फ्रूट का एक नवाचार और प्रदर्शन केंद्र स्थापित किया है। विवि ने ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती का एक ऐसा मॉड्यूल विकसित किया है जिसका उद्देश्य बेहतर और स्थायी उत्पादन है। बीबीएयू में उद्यान विज्ञान विभाग के सह आचार्य डॉ. सुतनु माजी के निर्देशन में 12 छात्रों ने शोध किया है जिससे ड्रैगन फ्रूट अब पहले से ज्यादा मीठा होगा। फसल चक्र बढ़ाया जा सकेगा जिससे किसानों की आमदनी भी कई गुना बढ़ जाएगी।
डॉ. सुतनु माजी और उनकी टीम ने परिपक्वता सूचकांक प्रोटोकॉल को मानकीकृत किया है। साथ ही कम लागत वाली प्रभावी पौध उत्पादन विधियों का विकास किया है। पोषक प्रबंधन प्रोटोकॉल और किसानों की उन्नति के लिए एकीकृत फसल प्रणालियां भी विकसित की गई हैं। डॉ. माजी ने बताया कि यह वास्तव में बहुत बड़ी उपलब्धि है। ड्रैगन फ्रूट में आमतौर पर मिठास टीसीएस (टोटल सोल्युबल सॉलिड्स) 12 से 15 डिग्री ब्रिक्स तक ही होती है लेकिन इसे बढ़ाकर 20-21 डिग्री ब्रिक्स तक करना और इसके फसल चक्र (फूटिंग सीजन) को लंबा करना, खेती और व्यवसाय दोनों के लिहाज से शानदार है। डॉ. माजी ने कहा कि यह रिसर्च ड्रैगन फ्रूट की गुणवत्ता और किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकती है। डॉ. सुतनु माजी ने ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती पर दो पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।
बीबीएयू ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई संस्थानों और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली पौध सामग्री की आपूर्ति की है। यह ड्रैगन फ्रूट बाग अब विभिन्न राज्यों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए एक शैक्षिक भ्रमण स्थल बन गया है। विवि के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि हमारा लक्ष्य बीबीएयू को ड्रैगन फ्रूट अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र बनाना है।
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पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर है ड्रैगन फ्रूट
ड्रैगन फ्रूट को पिताया भी कहते हैं। यह अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम का समृद्ध स्रोत है। सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है और चिंता को कम करता है। यह हृदय स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा प्रणाली सुधार और श्वसन संक्रमण उपचार के लिए भी फायदेमंद है। यह कैंसर कोशिकाओं, उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है। मधुमेह रोगियों के लिए भी यह फल काफी अच्छा है क्योंकि यह इंसुलिन उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के विकास को प्रोत्साहित करता है। इसके प्राकृतिक रंग एजेंटों के कारण इसे खाद्य रंग और कॉस्मेटिक उत्पादों में भी उपयोग किया जा सकता है।
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लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) ने अपने परिसर में ड्रैगन फ्रूट का एक नवाचार और प्रदर्शन केंद्र स्थापित किया है। विवि ने ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती का एक ऐसा मॉड्यूल विकसित किया है जिसका उद्देश्य बेहतर और स्थायी उत्पादन है। बीबीएयू में उद्यान विज्ञान विभाग के सह आचार्य डॉ. सुतनु माजी के निर्देशन में 12 छात्रों ने शोध किया है जिससे ड्रैगन फ्रूट अब पहले से ज्यादा मीठा होगा। फसल चक्र बढ़ाया जा सकेगा जिससे किसानों की आमदनी भी कई गुना बढ़ जाएगी।
डॉ. सुतनु माजी और उनकी टीम ने परिपक्वता सूचकांक प्रोटोकॉल को मानकीकृत किया है। साथ ही कम लागत वाली प्रभावी पौध उत्पादन विधियों का विकास किया है। पोषक प्रबंधन प्रोटोकॉल और किसानों की उन्नति के लिए एकीकृत फसल प्रणालियां भी विकसित की गई हैं। डॉ. माजी ने बताया कि यह वास्तव में बहुत बड़ी उपलब्धि है। ड्रैगन फ्रूट में आमतौर पर मिठास टीसीएस (टोटल सोल्युबल सॉलिड्स) 12 से 15 डिग्री ब्रिक्स तक ही होती है लेकिन इसे बढ़ाकर 20-21 डिग्री ब्रिक्स तक करना और इसके फसल चक्र (फूटिंग सीजन) को लंबा करना, खेती और व्यवसाय दोनों के लिहाज से शानदार है। डॉ. माजी ने कहा कि यह रिसर्च ड्रैगन फ्रूट की गुणवत्ता और किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकती है। डॉ. सुतनु माजी ने ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती पर दो पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।
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बीबीएयू ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई संस्थानों और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली पौध सामग्री की आपूर्ति की है। यह ड्रैगन फ्रूट बाग अब विभिन्न राज्यों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए एक शैक्षिक भ्रमण स्थल बन गया है। विवि के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि हमारा लक्ष्य बीबीएयू को ड्रैगन फ्रूट अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र बनाना है।
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पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर है ड्रैगन फ्रूट
ड्रैगन फ्रूट को पिताया भी कहते हैं। यह अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम का समृद्ध स्रोत है। सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है और चिंता को कम करता है। यह हृदय स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा प्रणाली सुधार और श्वसन संक्रमण उपचार के लिए भी फायदेमंद है। यह कैंसर कोशिकाओं, उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है। मधुमेह रोगियों के लिए भी यह फल काफी अच्छा है क्योंकि यह इंसुलिन उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के विकास को प्रोत्साहित करता है। इसके प्राकृतिक रंग एजेंटों के कारण इसे खाद्य रंग और कॉस्मेटिक उत्पादों में भी उपयोग किया जा सकता है।