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Lucknow News: बैडमिंटन और गोल्फ के शौकीन थे डॉ. अरुण
Thu, 07 Dec 2023 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:53 AM IST
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दो बार कर्मचारियों के साथ किसी बात को लेकर हुआ था झगड़ा
दोनों बच्चों से करते थे बहुत प्यार, रोज साथ टहलाने ले जाते थे
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज (रायबरेली)। आरेडिका में तैनात डॉ. अरुण सिंह बैडमिंटन और गोल्फ खेलने के बेहद शौकीन थे। बताया जा रहा है कि बैडमिंटन और गोल्फ खेलते समय वहां के कर्मचारियों से दो दफा किसी बात को लेकर उनसे झड़प भी हुई थी। डॉ. अरुण ने अधिकारियों से मौखिक रूप से कर्मचारियों की शिकायत की थी, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया था। अरुण पत्नी और बच्चों के साथ रोज शाम को टहलने जाते थे। उन्हें देखकर कभी किसी को नहीं लगा कि उनमें आपस में कोई मनमुटाव था।
आरव था माता-पिता का लाडला
चार वर्षीय आरव आवासीय परिसर के भीतर बने स्कूल ज्ञानदा बाल मंदिर में नर्सरी का छात्र था। वह पढ़ने में थोड़ा कमजोर था तो प्राय: स्कूल फोन करके डॉक्टर शिक्षकों को सहेजा करते थे कि उसका ध्यान रखा जाए। बच्चे को छोड़ने डॉक्टर जाते थे और लेने उनकी पत्नी जाती थीं। बच्ची अदीवा कस्बे के एसजेएस स्कूल की सातवीं कक्षा की बड़ी टैलेंटेड छात्रा थी। प्रिंसिपल ने बताया कि वह बड़ी होनहार बच्ची थी।
...तो क्या नशे के आदी थे डॉक्टर
कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर गांजा और चरस के आदी थे। कारखाने के ही कुछ नशे के रैकेट से जुड़े युवक ही उन्हें नशे की चीजें मुहैया कराते थे। नशा करने की वजह से उनकी पत्नी से मनमुटाव हो जाता था, लेकिन इस बारे में पुलिस अफसर और आरेडिका के कर्मचारी कुछ नहीं बोल रहे हैं।
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मरीजों की लगती थी लाइन
चिकित्सक के रूप में डॉ. अरुण सिंह बहुत मशहूर थे। प्राय: उनके रहने पर मरीज उन्हें ही दिखाना चाहते थे। कई भावुक मरीजों ने उनकी बड़ी तारीफ करते हुए बताया कि डॉक्टर बहुत रहमदिल इंसान थे। उनकी दवाएं मरीजों पर अचूक काम करतीं थीं। आरेडिका मेंं काम करने वाले कर्मचारी पप्पू ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने डॉक्टर से अपना इलाज कराया था। डॉक्टर अच्छे थे और उनके चेहरे पर किसी तरह का कोई तनाव नहीं था। मंगलवार की देर रात घटना की जानकारी हुई तो अवाक रह गया।
पहले सरकारी नौकरी की थी
पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुण ने पहले वाराणसी में सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी। कुछ दिन करने के बाद फिर कोलकाता पीजी करने गए। पीजी करने के बाद रेलवे में यहां एडीएमओ के रूप में तैनात हुए। बाद में पदोन्नति पाकर डीएमओ बन गए।
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दोनों बच्चों से करते थे बहुत प्यार, रोज साथ टहलाने ले जाते थे
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज (रायबरेली)। आरेडिका में तैनात डॉ. अरुण सिंह बैडमिंटन और गोल्फ खेलने के बेहद शौकीन थे। बताया जा रहा है कि बैडमिंटन और गोल्फ खेलते समय वहां के कर्मचारियों से दो दफा किसी बात को लेकर उनसे झड़प भी हुई थी। डॉ. अरुण ने अधिकारियों से मौखिक रूप से कर्मचारियों की शिकायत की थी, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया था। अरुण पत्नी और बच्चों के साथ रोज शाम को टहलने जाते थे। उन्हें देखकर कभी किसी को नहीं लगा कि उनमें आपस में कोई मनमुटाव था।
आरव था माता-पिता का लाडला
चार वर्षीय आरव आवासीय परिसर के भीतर बने स्कूल ज्ञानदा बाल मंदिर में नर्सरी का छात्र था। वह पढ़ने में थोड़ा कमजोर था तो प्राय: स्कूल फोन करके डॉक्टर शिक्षकों को सहेजा करते थे कि उसका ध्यान रखा जाए। बच्चे को छोड़ने डॉक्टर जाते थे और लेने उनकी पत्नी जाती थीं। बच्ची अदीवा कस्बे के एसजेएस स्कूल की सातवीं कक्षा की बड़ी टैलेंटेड छात्रा थी। प्रिंसिपल ने बताया कि वह बड़ी होनहार बच्ची थी।
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...तो क्या नशे के आदी थे डॉक्टर
कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर गांजा और चरस के आदी थे। कारखाने के ही कुछ नशे के रैकेट से जुड़े युवक ही उन्हें नशे की चीजें मुहैया कराते थे। नशा करने की वजह से उनकी पत्नी से मनमुटाव हो जाता था, लेकिन इस बारे में पुलिस अफसर और आरेडिका के कर्मचारी कुछ नहीं बोल रहे हैं।
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मरीजों की लगती थी लाइन
चिकित्सक के रूप में डॉ. अरुण सिंह बहुत मशहूर थे। प्राय: उनके रहने पर मरीज उन्हें ही दिखाना चाहते थे। कई भावुक मरीजों ने उनकी बड़ी तारीफ करते हुए बताया कि डॉक्टर बहुत रहमदिल इंसान थे। उनकी दवाएं मरीजों पर अचूक काम करतीं थीं। आरेडिका मेंं काम करने वाले कर्मचारी पप्पू ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने डॉक्टर से अपना इलाज कराया था। डॉक्टर अच्छे थे और उनके चेहरे पर किसी तरह का कोई तनाव नहीं था। मंगलवार की देर रात घटना की जानकारी हुई तो अवाक रह गया।
पहले सरकारी नौकरी की थी
पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुण ने पहले वाराणसी में सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी। कुछ दिन करने के बाद फिर कोलकाता पीजी करने गए। पीजी करने के बाद रेलवे में यहां एडीएमओ के रूप में तैनात हुए। बाद में पदोन्नति पाकर डीएमओ बन गए।