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Lucknow News: खुद की डॉक्टरी तो हो सकती है खून की गंभीर बीमारी
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लखनऊ। बीमार होने पर डॉक्टर से सलाह लिए बिना दवाएं खाना भारी पड़ सकता है। यह आदत खून की गंभीर बीमारी अप्लास्टिक एनीमिया की वजह भी बन सकती है। हिमेटोलॉजी फाउंडेशन की ओर से आयोजित यूथ हिमेटोलॉलिस्ट ओरिएंटेशन प्रोग्राम में गुडगांव के डॉ. राहुल भार्गव ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अप्लास्टिक एनीमिया वह स्थिति है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में नई रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बंद कर देता है। इस स्थिति में मरीज खुद को थका हुआ महसूस करता है। इसके साथ ही वह संक्रमण और चोट लगने पर अनियंत्रित खून बहने की समस्या से ग्रसित हो सकता है। यह वंशानुगत बीमारी हो सकती है, लेकिन वायरल संक्रमण, पानी में मौजूद हैवी मेटल के सेवन के साथ ही बिना परामर्श ली जाने वाली दवाओं की वजह से भी हो सकता है। इसका इलाज मुश्किल है और स्टेम सेल प्रत्यारोपण ही एक विकल्प बचता है। डॉ. भार्गव के मुताबिक भारत समेत अन्य अल्प विकसित देशों में यह बीमारी ज्यादा है। इन देशों में बगैर डॉक्टरी सलाह के दवाओं के सेवन की प्रवृत्ति ज्यादा पाई जाती है। आंकड़ों की बात करें तो विकसित देशों में यह बीमारी हर एक लाख में से महज दो व्यक्तियों में होती है। वहीं, अपने देश में यह बीमारी हर एक लाख में से करीब आठ से 10 नागरिकों में पाई जाती है।
भारतीय डाटा पर हो इलाज की गाइडलाइन
डॉ. राहुल भार्गव ने कहा कि मेडिकल के क्षेत्र में हम अभी भी अमेरिकी डाटा का काफी उपयोग कर रहे हैं, जबकि वहां की स्थितियां यहां से अलग हैं। इसलिए इलाज गाइडलाइन और शोध भारतीय डाटा पर आधारित होने चाहिए।
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अलग तरह का कार्यक्रम, फाउंडेशन ने उठाया पूरा खर्च
केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद जो हिमेटोलॉजी फाउंडेशन लखनऊ की संस्थापक हैं, उन्होंने बताया कि यह एक अलग तरह का कार्यक्रम है। इसमें देश भर के सुपर स्पेशियलिटी स्टूडेंट्स और फैकल्टी को फाउंडेशन के खर्च पर बुलाया गया। उनके रहने और खाने की व्यवस्था की गई। इसका मकसद भविष्य के हिमेटोलॉजिस्ट को बेहतर रूप से तैयार करना है।
रेफरल सिस्टम न होने से हो रही समस्या
एम्स नई दिल्ली के डॉक्टर मुकुल अग्रवाल ने बताया कि रेफरल सिस्टम न होने की वजह से एम्स दिल्ली की हर ओपीडी में करीब 50 मरीज ऐसे होते हैं जो सामान्य रूप से मेडिसिन की ओपीडी में ठीक हो सकते हैं। देश में हिमेटोलॉजी के विशेषज्ञों की कमी है। ऐसे में हिमेटोलॉजी या खून की बीमारी के संबंध में रेफरल सिस्टम बेहद अहम है।
ब्लड कैंसर और खून की अन्य बीमारियों के लक्षण
खून की कमी होना, बार-बार संक्रमण, लिम्फ नोड का बढ़ना, शरीर में दर्द रहना, लगातार बुखार, वजन में कमी आना।
उन्होंने बताया कि अप्लास्टिक एनीमिया वह स्थिति है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में नई रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बंद कर देता है। इस स्थिति में मरीज खुद को थका हुआ महसूस करता है। इसके साथ ही वह संक्रमण और चोट लगने पर अनियंत्रित खून बहने की समस्या से ग्रसित हो सकता है। यह वंशानुगत बीमारी हो सकती है, लेकिन वायरल संक्रमण, पानी में मौजूद हैवी मेटल के सेवन के साथ ही बिना परामर्श ली जाने वाली दवाओं की वजह से भी हो सकता है। इसका इलाज मुश्किल है और स्टेम सेल प्रत्यारोपण ही एक विकल्प बचता है। डॉ. भार्गव के मुताबिक भारत समेत अन्य अल्प विकसित देशों में यह बीमारी ज्यादा है। इन देशों में बगैर डॉक्टरी सलाह के दवाओं के सेवन की प्रवृत्ति ज्यादा पाई जाती है। आंकड़ों की बात करें तो विकसित देशों में यह बीमारी हर एक लाख में से महज दो व्यक्तियों में होती है। वहीं, अपने देश में यह बीमारी हर एक लाख में से करीब आठ से 10 नागरिकों में पाई जाती है।
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भारतीय डाटा पर हो इलाज की गाइडलाइन
डॉ. राहुल भार्गव ने कहा कि मेडिकल के क्षेत्र में हम अभी भी अमेरिकी डाटा का काफी उपयोग कर रहे हैं, जबकि वहां की स्थितियां यहां से अलग हैं। इसलिए इलाज गाइडलाइन और शोध भारतीय डाटा पर आधारित होने चाहिए।
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अलग तरह का कार्यक्रम, फाउंडेशन ने उठाया पूरा खर्च
केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद जो हिमेटोलॉजी फाउंडेशन लखनऊ की संस्थापक हैं, उन्होंने बताया कि यह एक अलग तरह का कार्यक्रम है। इसमें देश भर के सुपर स्पेशियलिटी स्टूडेंट्स और फैकल्टी को फाउंडेशन के खर्च पर बुलाया गया। उनके रहने और खाने की व्यवस्था की गई। इसका मकसद भविष्य के हिमेटोलॉजिस्ट को बेहतर रूप से तैयार करना है।
रेफरल सिस्टम न होने से हो रही समस्या
एम्स नई दिल्ली के डॉक्टर मुकुल अग्रवाल ने बताया कि रेफरल सिस्टम न होने की वजह से एम्स दिल्ली की हर ओपीडी में करीब 50 मरीज ऐसे होते हैं जो सामान्य रूप से मेडिसिन की ओपीडी में ठीक हो सकते हैं। देश में हिमेटोलॉजी के विशेषज्ञों की कमी है। ऐसे में हिमेटोलॉजी या खून की बीमारी के संबंध में रेफरल सिस्टम बेहद अहम है।
ब्लड कैंसर और खून की अन्य बीमारियों के लक्षण
खून की कमी होना, बार-बार संक्रमण, लिम्फ नोड का बढ़ना, शरीर में दर्द रहना, लगातार बुखार, वजन में कमी आना।