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राजधानी की यातायात व्यवस्था को लेकर शीर्ष स्तर पर नाराजगी, पुलिस कमिश्नरेट से बाहर भेजे जा सकते हैं रईस अख्तर
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लखनऊ। राजधानी में चरमराई यातायात व्यवस्था को लेकर शासन स्तर पर नाराजगी जाहिर की गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने 17 दिसंबर को पुलिस उपायुक्त यातायात रईस अख्तर को हटा दिया था। अब शासन स्तर से डीसीपी (मुख्यालय) रईस अख्तर का तबादला लखनऊ कमिश्नरेट से बाहर किया जा सकता है।
मालूम हो कि 15 दिसंबर को पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन के दौरान पूरे शहर में लगे जाम में मुख्यमंत्री की फ्लीट भी फंस गई थी। कार्यक्रम स्थल से मुख्यमंत्री की वापसी के वक्त खुद पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा था। वहीं, जाम से जूझ रहे शहरवासियों को राहत देने के लिए एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार को भी अपनी गाड़ी से उतरना पड़ा था। इसे लेकर पुलिस उपायुक्त (यातायात) रईस अख्तर को लेकर शासन स्तर तक कड़ी नाराजगी थी। 17 दिसंबर को उन्हें हटा दिया गया और सुभाष चंद्र शाक्य को पुलिस उपायुक्त (यातायात) बना दिया गया।
राजधानी के कई बड़े चौराहों व शहीद पथ पर आए दिन लगने वाले भीषण जाम की समस्या दूर करने को लेकर भी रईस अख्तर द्वारा कोई भी कदम नहीं उठाए गए थे। ऐसे में अब रईस अख्तर का तबादला लखनऊ कमिश्नरेट से बाहर करने की तैयारी है। जल्द ही इस पर निर्णय हो सकता है।
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मालूम हो कि 15 दिसंबर को पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन के दौरान पूरे शहर में लगे जाम में मुख्यमंत्री की फ्लीट भी फंस गई थी। कार्यक्रम स्थल से मुख्यमंत्री की वापसी के वक्त खुद पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा था। वहीं, जाम से जूझ रहे शहरवासियों को राहत देने के लिए एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार को भी अपनी गाड़ी से उतरना पड़ा था। इसे लेकर पुलिस उपायुक्त (यातायात) रईस अख्तर को लेकर शासन स्तर तक कड़ी नाराजगी थी। 17 दिसंबर को उन्हें हटा दिया गया और सुभाष चंद्र शाक्य को पुलिस उपायुक्त (यातायात) बना दिया गया।
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राजधानी के कई बड़े चौराहों व शहीद पथ पर आए दिन लगने वाले भीषण जाम की समस्या दूर करने को लेकर भी रईस अख्तर द्वारा कोई भी कदम नहीं उठाए गए थे। ऐसे में अब रईस अख्तर का तबादला लखनऊ कमिश्नरेट से बाहर करने की तैयारी है। जल्द ही इस पर निर्णय हो सकता है।
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