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साइबर जालसाजों ने लोगों के खाते से उड़ाए 2.75 लाख रुपये, केस दर्ज

Mon, 14 Sep 2020 03:17 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 14 Sep 2020 03:17 PM IST
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cyber fraud with people, case filed in lucknow
साइबर जालसाजों ने एटीएम कार्ड क्लोनिंग कर व कस्टमर केयर कर्मचारी बनकर तीन लोगाें के खाते से 2.75 लाख रुपये पार कर दिए। पीड़ितों ने कृष्णानगर, जानकीपुरम व हजरतगंज में केस दर्ज कराया है।
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कृष्णानगर कन्हैया विहार निवासी प्रवीण कुमार ने अमेजन से एक पार्सल बुक कराया था।

कई दिन गुजरने के बाद भी सामान घर नहीं पहुंचा। प्रवीण ने इंटरनेट पर तलाश कर कस्टमर केयर के नंबर पर कॉल किया। उनकी बात हुई जिसमें पता चला कि दूसरी जगह पर पार्सल दे दिया है। इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर से कॉल कर बुक कराये गये सामान व खाते की डिटेल पूछी गई।
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फिर ठग ने प्रवीण से मोबाइल पर एनीडेस्क एप डाउनलोड करने को कहा। एप डाउनलोड करने के बाद आरोपी ने उनसे 9 डिजिट का कोड पूछा और खाते से 95 हजार रुपये निकाल लिए। उधर, जानकीपुरम निवासी रज्जू साहू का इंडसइंड बैंक में खाता है। रज्जू के मुताबिक, 11 सिंतबर को खाते से एक लाख 20 हजार रुपये निकाले गए।
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रकम निकलने का मैसेज मिलने पर उन्हें जानकारी हुई। बैंक पहुंच कर पूछताछ करने पर पता चला कि कार्ड क्लोनिंग की गई है। इसके अलावा महानगर निवासी मनीष राघव की मां को ठगों ने ट्रेजरी कर्मी बन कॉल किया था। केवाईसी अपडेट करने का झांसा देकर उनसे खाते की डिटेल लेने के बाद ठग ने 74 हजार रुपये हड़प लिए
 

हेल्थ पॉलिसी के नाम पर ठगे 60 हजार रुपये

गोमतीनगर विरामखंड में रहने वाले गिरीश कुमार पाण्डेय ने थाने में तहरीर दी है कि हेल्थ पॉलिसी के नाम पर जालसाजों ने उनको 60 हजार का चूना लगा दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से छानबीन की जा रही है।

गोमतीनगर थाना प्रभारी के मुताबिक, तहरीर में बताया गया है कि 4 सितंबर को गिरीश को जालसाजों ने कॉल किया और खुद को हेल्थ पॉलिसी का एजेंट बता हेल्थ बेनिफिट बताने के बाद खाते में पैसा जमा करने के लिए कहा। गिरीश ने साइबर जालसाजों के कहे अनुसार करीब 60 हजार रुपये तीन बार में जमा करा दिए।

इसके बाद जालसाज का फोन आया कि आपको 45 हजार रुपये और जमा करने पडे़ंगे लेकिन गिरीश ने मना कर दिया और 60 हजार रुपये वापस मांगे। उसके बाद से जालसाजों के नंबर बंद आ रहे हैं। 

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