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ओटीपी पूछकर खाते से रकम उड़ा रहे जालसाज, ऐसा एक भी गिरोह नहीं पकड़ पाई पुलिस

Fri, 19 Jun 2020 05:14 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 19 Jun 2020 05:14 PM IST
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cyber crime with the help of OTP
केस- 1
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आशियाना निवासी दीपा मिश्रा ने लॉकडाउन के दौरान हजरतगंज स्थित रेस्टोरेंट से ऑनलाइन खाने का पैकेट मंगाना चाहा। नेट पर रेस्टोरेंट की साइट पर गईं और 200 में दो प्लेट खाने का ऑर्डर किया। कुछ देर बाद साइबर जालसाजों ने फोन किया और झांसे में लेकर 26000 रुपये ठग लिए। उन्होंने आशियाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया।  

केस-2
इंदिरा नगर निवासी नीतू वर्मा के मोबाइल पर कुछ दिन पहले एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बैंककर्मी बताया और खाता अपडेट करने के नाम पर ओटीपी हासिल की। कुछ ही देर में खाते से 15000 रुपये साफ हो गए। पीड़ित ने मुकदमा दर्ज कराया। मामले की जांच साइबर सेल कर रही है।   

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केस-3
रकाबगंज निवासी जितेंद्र कुमार को कुछ दिन पहले साइबर जालसाजों ने अपनी बातों में फंसा कर ओटीपी हासिल की और तीन बार में उनके खाते से 30000 रुपये साफ कर दिए। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है।   

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गोमती नगर के विशाल खंड निवासी पार्थ रस्तोगी से साइबर जालसाजों ने ओटीपी हासिल कर खाते से 40000 रुपये साफ कर दिए। मोबाइल पर मैसेज आने पर जानकारी हुई। तो उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

ये मामले तो लखनऊ में साइबर जालसाजी के कुछेक उदाहरण हैं। राजधानी में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिनसे साइबर जालसाज हर महीने लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। पीड़ित बैंक से लेकर पुलिस के दरवाजे तक दस्तक देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ही रकम वापस उनके खाते में पहुंच पाती है। अब तक कोई ऐसा गिरोह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा जो ओटीपी हासिल कर लोगों के खातों से रकम उड़ा रहा है। साइबर जालसाज लगातार लोगों के मोबाइल पर फोन कर खातों से संबंधित जानकारियां हासिल कर खाते से रकम साफ कर रहे हैं।

साढे़ पांच माह में 21 लाख वापस कराए

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प्रतीकात्मक तस्वीर
राजधानी में साइबर जालसाजों पर अंकुश लगाने के लिए साइबर क्राइम सेल का गठन किया गया था। करीब एक दशक से यह सेल काम कर रहा है। जनवरी में राजधानी में कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुई। इसके बाद साइबर सेल का भी एक तरह से नव निर्माण हुआ। जहां एक दशक से साइबर सेल का नोडल अधिकारी तत्कालीन क्षेत्राधिकारी हजरतगंज हुआ करता था।

वहीं अब इसे अलग क्राइम ब्रांच के साथ सम्मिलित कर एक डिप्टी एसपी रैंक का अधिकारी बैठा दिया गया। साइबर सेल के रिकॉर्ड के मुताबिक एक जनवरी से लेकर 15 जून के बीच 983 जालसाजी के मामले आए, जिनमें से 947 का निस्तारण कर दिया गया। इससे संबंधित पीड़ितों के खातों में 21,41,631 रुपये वापस करा दिए गए। एसीपी साइबर सेल विवेक रंजन राय के मुताबिक बैंक का कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी भी ग्राहक से फोन पर ओटीपी नहीं पूछता है। 

फ्रॉड से बचने के सुझाव 
- फोन कॉल जिसमें आपके बैंक संबंधी जानकारी मांगी जा रही हो उनसे साझा ना करें।  - मैसेज के द्वारा प्राप्त कोई लिंक ना खोलें।  - अपने बैंक खाते में कोई भी अपडेट करना हो तो संबंधित शाखा में जाकर करें।  - कभी भी अपनी बैंक संबंधी जानकारी फोन पर शेयर ना करें।  - अपने फोन पर आए किसी भी ओटीपी को किसी से साझा ना करें।  - ऐसी कोई भी इनामी लॉटरी का मैसेज जिसका आपने आवेदन नहीं किया है उसको ना खोलें।  - किसी भी इनामी योजना के कॉल पर कोई जानकारी शेयर ना करें। - रुपये के लेनदेन संबंधी कोई भी बातचीत किसी सार्वजनिक स्थल पर न करें।
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