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आतंकी यासीन के खुलासे से खुली जांच एजेंसियों की पोल
विष्णु मोहन/लखनऊ
Updated Wed, 02 Oct 2013 09:38 AM IST
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वाराणसी के शीतला घाट पर कौन सा विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। इसे लेकर न सिर्फ दुविधा बनी है बल्कि जांच प्रयोगशालाओं के परीक्षण परिणाम पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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शीतला घाट से बरामद साक्ष्यों का जो परीक्षण कराया गया था, उसमें सामने आए नतीजे के विपरीत यासीन भटकल ने जांच अधिकारियों से कहा है कि उसने वहां केमिकल बम का इस्तेमाल किया था।
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यासीन के इस खुलासे के बाद जांच अधिकारियों ने उससे बम में इस्तेमाल किए गए मिश्रण के बारे में जानकारी की तो उसने बताया कि बम में हाइड्रोजन पैराक्साइड का प्रयोग किया गया था।
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गौरतलब है जांच एजेंसियों ने विस्फोट की जांच के बाद यह दावा किया था कि जो बम शीतला घाट विस्फोट में इस्तेमाल में लाया गया, उसमें आरडीएक्स का प्रयोग किया गया था।
एटीएस के सूत्र बताते हैं कि शीतला घाट विस्फोट के मौके से बरामद हुए नमूनों की जांच अहमदाबाद स्थित फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में कराई गई थी।
यहां हुई जांच में विस्फोटक में आरडीएक्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी। यह नतीजा उस जानकारी से अलग है जो यासीन ने दी है।
सूत्र बताते हैं कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) द्वारा केमिकल बम का इस्तेमाल करने के लिए संगठन के सदस्यों को इसका प्रशिक्षण दिलाए जाने की सूचना केंद्रीय खुफिया संगठनों को पहले से ही है। लेकिन अभी इसके नतीजे कहीं देखने को नहीं मिले थे।
सूत्रों की मानें तो जांच से जुड़े अधिकारियों ने यासीन की बयान की जानकारी अहमदाबाद स्थित एफएसएल के जिम्मेदार लोगों को भी दे दी है।
इसके साथ ही अब यासीन से इस बात की जानकारी करने की कोशिश की जा रही है कि आईएम ने विभिन्न प्रांतों में जो विस्फोट किए हैं, वह किस पैटर्न पर किए हैं और कहां कौन सा विस्फोटक इस्तेमाल किया गया।