यूपी पुलिस के लिए मुसीबत बन गई हैं ये खूनी हसीनाएं
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एक से बढ़कर एक खूंखार और पेशेवर मुजरिमों को कानून के शिकंजे में कसने वाली इलाहाबाद पुलिस दो खूनी हसीनाओं से हार मान चुकी है। इनमें एक हसीना की बेली इलाके में तीन साल पहले हुए गैंगवार में तलाश है तो दूसरी रेडलाइट एरिया मीरगंज की सेक्स वर्कर है।
इसके आशिक ने ही डेढ़ साल पहले आईटीबीपी के दो सिपाहियों को दिनदहाडे़ गोली से उड़ा दिया था। पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच ने काफी हाथ-पैर मारे, तमाम जगहों पर छापामारी की, कई मोबाइल सर्विलांस पर लगाए, मुखबिरों का जाल फैलाया मगर पुलिस इन दो गुनहगार सुंदरियों की तस्वीर तक हासिल नहीं कर सकी है।
अब तो पुलिस इन दोनों की गिरफ्तारी करने के बारे में ध्यान भी नहीं दे रही है।पहले बात कोमल की। कोमल सिंह उर्फ निशा सिंह का नाम 20 जुलाई 2012 को बेली गांव में हुए सनसनीखेज दोहरे कत्ल के बाद दुनिया के सामने आया।
उस रोज बेली गांव में दो जानी दुश्मन गिरोहों के बीच गैंगवार छिड़ गया था। दोतरफा गोलीबारी में शाहगंज सब्जी मंडी के जैद और कसारी-मसारी के इकरार की मौत हो गई।
कोमल बन गई थी विषकन्या
जैद बरसों पहले मारे गए नसीम उर्फ नस्सन का पुत्र था जबकि इकरार कसारी-मसारी में कत्ल हुए अंसार बाबा के परिवार का था। 12 साल पहले शब-ए-रात पर नस्सन की हत्या में अंसार बाबा पर आरोप लगा था।
फिर नस्सन के पुत्रों ने शब-ए-रात पर ही अंसार बाबा को भी गोलियों से छलनी कर दिया था। उसी खूनी दुश्मनी में अंसार के पुत्र जुल्फिकार उर्फ तोता ने नस्सन के बेटे जैद को मारने के लिए कोमल को विषकन्या की तरह मोहरा बनाया।
तोता ने ही कोमल को साजिशन बेली गांव में कमरा किराए पर दिलाकर उसे जैद को प्रेमजाल में फंसाने का काम सौंपा। जैद जान पर खतरे के चलते मुंबई चला गया था। कोमल ने फोन पर बातचीत में उसे प्रेमजाल में फंसाकर बेली में अपने कमरे में मिलने के लिए बुलाया।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक, मुंबई से आने के बाद जैद अपने दोस्त सद्दाम के साथ कोमल से मिलने पहुंचा तो वहां छिपे तोता ने अपने साथियों संग उस पर गोलियों की बौछार कर दी। जैद मारा गया मगर उसके दोस्त सद्दाम की गोलियों ने तोता के सौतेले भाई इकरार की भी जान ले ली।
कोमल कमरे से अपने जरूरी सामान लेकर फरार हो गई। काफी छानबीन के बाद पता चला कि वह सोरांव के कुरगांव निवासी राजेंद्र सिंह की पुत्री है। वह शहर में धूमनगंज के ताड़बाग में अपने मामा राजेश उर्फ पप्पू सिंह के यहां रहती थी।
मगर कोमल तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके। गैंगवार में दो लोगों के खून में शामिल रही यह खूनी हसीना कहां हैं? यह रहस्य बना है। उसकी एक फोटो तक पुलिस के पास नहीं है।
इस सेक्स वर्कर को इसलिए ढूंढ रही है पुलिस
अब मीरगंज की मुस्कान का किस्सा सुनिए। सितंबर 2013 में रविवार की शाम मीरगंज इलाके में तफरीह के लिए पहुंचे आईटीबीपी के दो सिपाहियों को गली में दौड़ाकर गोलियों से छलनी कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, उन सिपाहियों को तवायफ मुस्कान के आशिक फैसल ने घर से राइफल लाकर निशाने पर लिया था। वे दोनों मुस्कान के पास सौदा करने गए थे। उसने इनकार किया तो बदसलूकी कर दी।
बस, बला की खूबसूरत मुस्कान ने अपने आशिक फैसल को बताया तो उसने संगीन वारदात अंजाम दे डाली। फैसल दो साथियों समेत गिरफ्तार हुआ मगर मुस्कान अब भी पुलिस के लिए छलावा बनी है।
मीरगंज के कोठे में वह कहां से आई थी, यह किसी को नहीं पता। कोलकाता और नेपाल में भी खोजबीन हुई लेकिन वह नहीं मिली। हालांकि चर्चा है कि वह अब शहर में ही आकर किसी फ्लैट में टिकी है लेकिन थक-हारकर पुलिस ने उसकी तलाश ही बंद कर दी है।
लेडी डॉन श्वेता भी बन गई है चुनौती
खूनी हसीनाओं कोमल और मुस्कान को गिरफ्तार करने में नाकाम इलाहाबाद पुलिस के लिए अब कानपुर से वाहन चोरों का गैंग ऑपरेट करने वाली श्वेता गुप्ता भी चुनौती बन गई है।
पुलिस ने छह मुकदमों में वांछित घोषित किया है मगर श्वेता कानपुर के अपने घर से फरार है। पुलिस का कहना है कि श्वेता के पकड़ में आने पर दर्जनों कार बरामद हो सकती है।