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साहिल फाउंडेशन के संचालक सहित नौ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Tue, 17 Dec 2013 02:14 AM IST
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फर्जी आईएएस अफसर बनकर लाखों की ठगी करने वाले साहिल फाउंडेशन के संचालक एसएस साहिल उर्फ निस्सू सहित उसके नौ साथियों को आरोपी बनाते हुए हजरतगंज पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
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साहिल के खिलाफ धोखाधड़ी के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं। चार्जशीट में एसटीएफ और साइबर क्राइम ब्रांच से मिले एविडेंस शामिल करने के साथ ही वाहन चोरी,सचिवालय के फर्जी पास बनवाने से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
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सर्वपल्ली मॉल एवेन्यू निवासी एसएस साहिल उर्फ सैय्यद मो. नजर उर्फ निस्सू और उसके साथियों को हजरतगंज पुलिस व साइबर क्राइम सेल की टीम ने 20 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
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गैंग में पीएसी और पुलिस के दो सिपाही भी शामिल थे। साहिल ने पहला शिकार अपने ही साथी व सआदतगंज निवासी टेंट हाउस व्यवसायी नंद प्रकाश मिश्रा से 25 लाख रुपये ठगे थे।
बुलंदशहर खुर्जा के मोर्चा स्ट्रीट पठान बाड़ा निवासी सिराज अहमद से स्लाटर हाउस की एनओसी जारी कराने के नाम पर उसने 40 लाख रुपये की डील की थी। सिराज ने उसे 10 लाख रुपये दे दिए थे और बाकी रकम दिल्ली में एक व्यक्ति को पहुंचाने के लिए कहा था।
हालांकि, इससे पहले ही गैंग का खुलासा हो गया। मिश्रा और सिराज ने हजरतगंज कोतवाली में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई थीं। तीसरी एफआईआर दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन निवासी संजीव कटारिया की तरफ से 28 सितंबर को हुई थी।
साहिल ने संजीव की कंपनी कैट-6 सिस्टम्स को 14 करोड़ रुपये से सीसीटीवी कैमरे लगाने का टेंडर दिलाने के नाम पर 25 लाख की ठगी की थी। नंद प्रकाश मिश्रा के साथ हुई धोखाधड़ी की विवेचना इंस्पेक्टर हजरतगंज कर रहे थे।
सिराज अहमद का मामला साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर एसएस मालवीय देख रहे थे। दिल्ली के संजीव कटारिया की एफआईआर की जांच विवेचना सेल के सब इंस्पेक्टर श्याम त्रिपाठी कर रहे थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि तीनों मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
साहिल के पास से मिली टाटा सफारी गाजियाबाद से चोरी की गई थी। जांच में उस पर पड़ा नंबर फर्जी पाया गया था। साहिल की कार में लगे सचिवालय पास फर्जी मिले थे इसलिए चार्जशीट में वाहन चोरी,फर्जी दस्तावेज बनवाने और चोरी का वाहन बरामद करने की धारा भी जोड़ी गई है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक चार्जशीट में साहिल की रिकार्ड की हुई आवाज और दिल्ली के व्यापारी संजीव कटारिया से मिली मोबाइल कैमरे की फुटेज की फारेंसिक रिपोर्ट के साथ ही एसटीएफ और साइबर सेल को मिले साक्ष्य भी शामिल किए गए हैं।