अकाउंट हैक कर ऑनलाइन शॉपिंग कर बेचता था OLX पर, इस इंजीनियर ने किया लाखों का फ्रॉड
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लखनऊ नाका कोतवाली व साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने लोगों अकाउंट हैक करके लाखों रुपये उड़ाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर को मंगलवार दोपहर गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 43 प्री-एक्टीवेटेड सिमकार्ड, लैपटॉप, 3 फर्जी आधार कार्ड, रेलवे का फर्जी रेलवे पहचान पत्र आदि बरामद हुआ है। हत्थे चढ़ा जालसाज पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम कार्ड धारकों को निशाना बनाता था।
उनके कार्ड के नंबर मालूम करके विभिन्न कंपनियों से ऑनलाइन शॉपिंग करता और खरीदी वस्तु को अगले दिन ओएलएक्स पर अपलोड करके बेच देता था। इसके अलावा देवरिया की एक ट्रेवल एजेंसी से साठगांठ करके हैक अकाउंट से ऑनलाइन रेल व हवाई टिकट बनवाकर बेचता था। नाका इलाके में एक व्यक्ति के अकाउंट से 2.20 लाख उड़ाने के मामले में पुलिस को उसकी तलाश थी।
सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक की चारबाग शाखा में अजय नाथ मौर्या के अकाउंट से 2.20 लाख रुपये उड़ाने के मामले में पुलिस टीम ने बांदा के अतर्रा थाने के बजरंगनगर के मूल निवासी व कानपुर के कल्याणपुर इलाके में रह रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रदीप तिवारी को गिरफ्तार किया है।
प्रदीप के कब्जे से विभिन्न नेटवर्क कंपनियों के 43 प्री-एक्टीवेटेड सिमकार्ड, छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 3 फर्जी आधार कार्ड, 3 वोटरआईडी, रेलवे का फर्जी पहचानपत्र, फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र व चार एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। उसने कई लोगों के बैंक अकाउंट हैक करके ऑनलाइन शॉपिंग व खरीदी वस्तुओं को अगले ही दिन ओएलएक्स पर अपलोड करके बिक्री करके लाखों की जालसाजी के राज उगले हैं।
मोबाइल बंद कराकर उड़ाए थे 2.20 लाख
इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह ने बताया कि कानपुर में बेसिक शिक्षा विभाग में वित्त एवं लेखाधिकारी अजय नाथ मौर्या का पीएनबी की चारबाग शाखा में सैलरी अकाउंट है। अजय के मोबाइल पर 6 सितंबर को अज्ञात व्यक्ति ने कॉल करके खुद को बीएसएनएल का अधिकारी बताते हुए कहा कि सिमकार्ड की वैधता 16 सितंबर को समाप्त हो रही है। उसे तीन महीने के लिए बढ़ा रहे हैं।
कुछ देर बाद अजय के मोबाइल फोन पर सिग्नल आने बंद हो गए। पता चला कि उनके नंबर का नया सिमकार्ड जारी किया गया है। इस दौरान 6 सितंबर को अजय ने एटीएम से 35 सौ रुपये निकाले, जबकि मिनी स्टीमेट में कई बार छोटी रकम की निकासी नजर आई। इसमें यूपीआई से लेनदेन देखकर चौंके।
अगले दिन बैंक में तहकीकात में पता चला कि यूपीआई से लेनदेन जारी है। इस बीच अकाउंट से 2.20 लाख रुपये उड़ाए जा चुके थे। अजय ने अकाउंट व बीएसएनएल का नंबर बंद कराने के साथ नाका कोतवाली में केस दर्ज कराया। नाका पुलिस व साइबर क्राइम सेल ने पड़ताल शुरू की।
पीएनबी के एटीएम कार्ड धारकों को बनाता था शिकार
साइबर क्राइम सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रदीप तिवारी पीएनबी के एटीएम कार्ड धारकों को शिकार बनाता था। उसने एटीएम कार्ड के पीछे लिए 16 अंकों के सीवीवी नंबर के शुरुआती अंक रट रखे थे, जबकि आखिर के चार अंक एटीएम कार्ड धारक द्वारा पैसे निकालने के दौरान देख लेता था।
इसके बाद बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके डाटा हासिल करता। खाता धारक द्वारा बैंक में पंजीकृत मोबाइल नंबर मालूम होते ही उसके गुम होने की ई-रिपोर्ट करके नया सिमकार्ड प्राप्त कर लेता था। खाते से उड़ाई रकम के मैसेज खाताधारक के मोबाइल पर नहीं पहुंचते थे।
ऑनलाइन शॉपिंग कर ओएलएक्स पर बिक्री
हत्थे चढ़े प्रदीप तिवारी ने कुबूला कि खाता हैक करके पेटीएम, शॉपक्लू, स्नैपडील से लैपटॉप व मोबाइल फोन आदि इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की ऑनलाइन शॉपिंग करता था। डिलीवरी मिलते ही उसे कुछ कम कीमत पर बिक्री के लिए ओएलएक्स पर अपलोड कर देता था। बैंक में फर्जी खाता खोलकर रकम ट्रांसफर कराने के बजाय इसमें कम जोखिम नजर आया और लाखों की कमाई की थी।
चेहरा दिखाने की जिद पर लौटाया लैपटॉप
जालसाजी में पूरी सतर्कता रखने वाला प्रदीप ऑनलाइन शॉपिंग करके मंगाई वस्तु लेने के दौरान अपने चेहरे पर गमछा लपेटे रहता था। कुबूला कि कुछ दिनों पहले उसने फ्लिप कार्ट से 55 हजार रुपये का लैपटॉप मंगाया था। डिलीवरी मैन ने चेहरा दिखाने की जिद की। इस पर उसने लैपटॉप लौटा दिया था।
20 दिन में उड़ा डाले 2.20 लाख, जालसाज के खाते में सिर्फ 20 रुपये
लोगों के बैंक अकाउंट हैक करके लाखों रुपये उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रदीप तिवारी के बैंक खाते में सिर्फ 20 रुपये थे। फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र से रोडवेज बस में मुफ्त में सफर करने वाले जालसाज ने 20 दिन पहले वित्त एवं लेखाधिकारी के अकाउंट से उड़ाए 2.20 लाख रुपये मौजमस्ती में खर्च कर डाले थे।
साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर विजयवीर सिंह सिरोही व कांस्टेबल फिरोज बदर की गहन पूछताछ में प्रदीप तिवारी ने कुबूला कि उसने अपने घरवालों को भी रेलवे में टेक्नीशियन की नौकरी करने की जानकारी दे रखी थी।
उसके खाते में सिर्फ 20 रुपये शेष होने के सवाल पर कुबूला कि विकलांगता प्रमाणपत्र दिखाकर रोडवेज बस में मुफ्त में सफर करता था। दिल्ली के बड़े होटलों में ठहरकर मौजमस्ती में रकम उड़ाता रहा। ब्रांडेड कपड़े, जूते व रेस्टोरेंट में खाने का शौक था। बीसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में निकला।
प्राइवेट नौकरी करने वाले पिता द्वारा मोटा खर्च न दे पाने पर जालसाजी शुरू की। दो साल पहले बांदा में एक व्यक्ति के अकाउंट से रकम उड़ाने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। जमानत पर छूटने के बाद उसने सावधानी बरतते हुए खातों से रकम उड़ाना शुरू किया।
ट्रेवल एजेंसी से साठगांठ कर रेल व हवाई टिकट की बिक्री
प्रदीप ने खुलासा किया कि देवरिया की एक ट्रेवल एजेंसी से साठगांठ करके रेल व हवाई टिकटों की बिक्री करता था। ट्रेवल एजेंसी द्वारा प्रदीप के जरिए रेल व हवाई टिकटों की बुकिंग की जाती थी। वह हैक खाते से उड़ाई रकम से आईआरसीटीसी के माध्यम से रेल व हवाई टिकट खरीदकर ट्रेवल एजेंट को सौंपता और उससे नगद भुगतान प्राप्त करता था।
इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जालसाजी में ट्रेवल एजेंट की संलिप्तता की छानबीन की जा रही है। सुबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
विकलांगता प्रमाणपत्र की छानबीन
इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह ने बताया कि प्रदीप के कब्जे से बरामद विकलांगता प्रमाणपत्र के बारे में छानबीन की जा रही है। वह औरैया के सीएमओ की तरफ से जारी दर्शाया गया है। प्रदीप का कहना है कि सफर के दौरान वह मूकबधिर होने का नाटक करता था। कई बार पुलिस को भी चकमा दिया।