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ये माना कि हम गुनहगार हैं पर.... सुसाइड नोट में लिख ये बात, मांगी माफी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 18 Jan 2018 03:24 PM IST
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लखनऊ में डिप्रेशन में आकर महिला डॉक्टर सहित दो लोगों ने खुदकुशी कर ली। पुलिस शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की पड़ताल कर रही है। बीमारी और कर्ज से परेशान विकासनगर सेक्टर एच निवासी रामानुज चारी (49) ने मंगलवार रात फांसी लगा ली। यतीराज चारी ने बताया कि उनके पिता रामानुज ने पास में ही किराये पर मकान ले रखा था।
वहां सामान रखने की तैयारी चल रही थी। इसी सिलसिले में वह अलीगंज सेक्टर एच के पुराने मकान गया था। इस दौरान पिता रात 11 बजे विकासनगर में थे। कई बार उनके मोबाइल पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। यतीराज कुछ देर बाद विकासनगर वाले मकान पर पहुंचा तो देखा पिता ने कमरे में पंखे से रस्सी के सहारे फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी।
यतीराज ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकाला। मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ। एसओ विकासनगर सचिन गुप्ता ने बताया कि रामानुज काफी दिनों से बीमार थे। इसी कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी। आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर इलाज को कई जगह से कर्ज लिया था। जो लगातार वसूली कर रहे थे। इससे वह परेशान थे।
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ये माना कि हम गुनहगार है पर.., तुमसे उम्मीद है के अता बख्शों हम पर। सब जानने व न जानने वालों से क्षमा मांगता हूं, हो न हो सभी को मुझसे कुछ न कुछ कष्ट हुआ होगा। अक्का मैं सबसे बड़ा गुनहगार तुम्हारा हूं, क्योंकि तुम्हारा धन व प्यार नहीं वरन विश्वास तोड़ के जा रहा हूं। फिर कभी जन्म लिया तो तुम्हारे घर ही जन्म लूंगा, ताकि इस जन्म का कर्ज चुका सकूं।
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वहां सामान रखने की तैयारी चल रही थी। इसी सिलसिले में वह अलीगंज सेक्टर एच के पुराने मकान गया था। इस दौरान पिता रात 11 बजे विकासनगर में थे। कई बार उनके मोबाइल पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। यतीराज कुछ देर बाद विकासनगर वाले मकान पर पहुंचा तो देखा पिता ने कमरे में पंखे से रस्सी के सहारे फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी।
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यतीराज ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकाला। मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ। एसओ विकासनगर सचिन गुप्ता ने बताया कि रामानुज काफी दिनों से बीमार थे। इसी कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी। आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर इलाज को कई जगह से कर्ज लिया था। जो लगातार वसूली कर रहे थे। इससे वह परेशान थे।
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ये माना कि हम गुनहगार है पर.., तुमसे उम्मीद है के अता बख्शों हम पर। सब जानने व न जानने वालों से क्षमा मांगता हूं, हो न हो सभी को मुझसे कुछ न कुछ कष्ट हुआ होगा। अक्का मैं सबसे बड़ा गुनहगार तुम्हारा हूं, क्योंकि तुम्हारा धन व प्यार नहीं वरन विश्वास तोड़ के जा रहा हूं। फिर कभी जन्म लिया तो तुम्हारे घर ही जन्म लूंगा, ताकि इस जन्म का कर्ज चुका सकूं।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
डेमो
प्लीज माफ कर देना, इस जन्म के लिए हमको...। ये शब्द रामानुज ने परिवारीजनों के लिए छह पन्ने के सुसाइड नोट में लिखे। पिता के लिए लिखा, अप्पा मुझे माफ कर दीजिएगा। इस जन्म में आपके लिए कुछ नहीं कर पाया। इसका अफसोस लिए जा रहा हूं। मेरे बाद आद्या और पुन्नु की जिम्मेदारी आप पर नहीं है। चाहे तो दोनों को घर से निकाल दीजिएगा। मैं तो बेटा बनने की कोशिश करता रहा, पर ये न बेटी बन पाई और न वो पोता।
मां, आप बहुत मजबूत हो। आप सब संभाल लेंगी, लेकिन जितना प्यार हमसे और पुन्नु से करती हैं आपको कष्ट भी उतना ज्यादा रहेगा। पत्नी के बारे में लिखा, शायद तुमको अपने आप में घमंड है कि बहुत सामर्थवान हो, लेकिन सबसे बड़ा रोग गलतफहमी है। सभी लोगों माफी मांग रहा हूं।
उधर, मड़ियांव के आईआईएम रोड स्थित महर्षि विद्या मंदिर के पास रहने वाले विवेक मिश्रा होटल में मैनेजर हैं। निजी अस्पताल में चिकित्सक उनकी पत्नी शिल्पी (33) ने मंगलवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालात में उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां देर रात उनकी मौत हो गई।
शिल्पी के भाई राहुल के मुताबिक उसकी शादी स्वाति नाम की युवती से हुई थी। कुछ दिनों बाद वह अचानक मायके चली गई और परिवार के सभी सदस्यों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए केस करा दिया। इसमें अपने ससुराल में रह रही उसकी बहन शिल्पी को भी आरोपी बनाया। इसके बाद से ही वह काफी परेशान रहने लगी थी।
मां, आप बहुत मजबूत हो। आप सब संभाल लेंगी, लेकिन जितना प्यार हमसे और पुन्नु से करती हैं आपको कष्ट भी उतना ज्यादा रहेगा। पत्नी के बारे में लिखा, शायद तुमको अपने आप में घमंड है कि बहुत सामर्थवान हो, लेकिन सबसे बड़ा रोग गलतफहमी है। सभी लोगों माफी मांग रहा हूं।
उधर, मड़ियांव के आईआईएम रोड स्थित महर्षि विद्या मंदिर के पास रहने वाले विवेक मिश्रा होटल में मैनेजर हैं। निजी अस्पताल में चिकित्सक उनकी पत्नी शिल्पी (33) ने मंगलवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालात में उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां देर रात उनकी मौत हो गई।
शिल्पी के भाई राहुल के मुताबिक उसकी शादी स्वाति नाम की युवती से हुई थी। कुछ दिनों बाद वह अचानक मायके चली गई और परिवार के सभी सदस्यों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए केस करा दिया। इसमें अपने ससुराल में रह रही उसकी बहन शिल्पी को भी आरोपी बनाया। इसके बाद से ही वह काफी परेशान रहने लगी थी।