ऐसे दिया झांसा: पहले सात लाख लूटे फिर उसी से लूटे 22 लाख रुपये
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नौकरी और बिजनेस में साझेदारी के नाम पर ठगी करने वाले अलीनगर सुनहरा निवासी अनूप सिंह चौहान और उसके पिता रामस्वरूप सिंह के खिलाफ कृष्णानगर कोतवाली में तीन पीड़ितों ने एफआईआर दर्ज कराई है। ठगी के आरोपी पिता-पुत्र घर से फरार हैं।
कृष्णानगर के बजरंगनगर निवासी अशोक सिंह ने बताया कि अनूप और उसके परिवारीजनों को वह पांच साल से जानता था। अनूप अक्सर सिंचाई विभाग में अच्छी जान-पहचान बताते हुए किसी जरूरतमंद को अच्छे पद पर नौकरी दिलाने के बारे में कहा करता था।
2012 में अशोक ने अपने भाई मनोज सिंह के लिए नौकरी की बात की। अनूप ने सात लाख रुपये देने पर क्लर्क के पद पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। अशोक ने सात लाख रुपये दिए लेकिन, भाई की नौकरी नहीं लगी।
उसने अपनी रकम वापस मांगी तो अनूप ने कहा कि नौकरी में कुछ नहीं रखा। उसके साथ स्कूलों में स्टेशनरी सप्लाई के बिजनेस में पार्टनर बन जाओ तो 35 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। लाखों रुपयों का मुनाफा होगा।
उसकी बातों पर भरोसा करके अशोक ने दो साल पहले रिश्तेदारों व परिचितों से 22 लाख रुपये उधार लेकर अनूप के बिजनेस में लगा दिए। अनूप ने न्यू पब्लिक स्कूल में सप्लाई होने और अच्छा मुनाफा दिलाने की बात कही। हालांकि, कई महीने बाद भी अशोक को फूटी कौड़ी नहीं मिली। अशोक को मुनाफा मिला न ही मूल रकम।
घर आकर दे गए चेक की फोटोकॉपी
इस बीच उसके भाई मनोज को टीचर की नौकरी मिल गई। अशोक ने अपनी रकम मांगी तो अनूप व उसके पिता टरकाते रहे। एक दिन दोनों घर आए और अशोक को एक करोड़ 45 लाख रुपये की चेक दिखाते हुए कहा कि यह चेक न्यू पब्लिक स्कूल में स्टेशनरी सप्लाई के पेमेंट की है। चेक कैश होते ही वह रकम लौटा देंगे।
उसने चेक की फोटोकॉपी भी दी। कई दिन गुजर गए और रुपये नहीं मिले तो अशोक ने न्यू पब्लिक स्कूल जाकर छानबीन की। वहां पता चला कि चेक फर्जी है। अशोक ने अनूप के घर जाकर शिकायत की तो उसने 22 लाख के चेक थमा दिए।
इन्हें बैंक में पेश किया गया तो बाउंस हो गए। एसओ विजय कुमार यादव ने बताया कि अशोक की पत्नी मीनू की तरफ से एफआईआर दर्ज कराकर जांच की जा रही है।
एडीजी के आदेश पर दर्ज हुए मामले
अशोक की पत्नी मीनू ने बताया कि उसने अमर उजाला में बीती 15 जुलाई को अनूप और उसके पिता रामस्वरूप सिंह की कारगुजारी की खबर पढ़ी थी। 19 जुलाई को उसने अन्य पीड़ितों के साथ एडीजी कानून व्यवस्था से मुलाकात कर ठग पिता-पुत्र की शिकायत की। इसके बाद उन्होंने कृष्णानगर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
इंदिरानगर के अफीक को लगाया 51 लाख का चूना
शातिर अनूप सिंह चौहान और उसके पिता ने इंदिरानगर के सी ब्लॉक निवासी मोहम्मद अफीक सिद्दीकी को भी 51 लाख 54 हजार रुपये का चूना लगाया। दोनों ने अफीक से नजदीकियां बनाईं। इसके बाद बड़े लोगों से संबंध और कई विभागों में जान-पहचान का झांसा देकर बिजनेस पार्टनर बना लिया।
अफीक बिजनेस के नाम पर ठगों को रुपये देते रहे लेकिन, एक रुपया भी वापस नहीं मिला। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने दबाव बनाया तो शातिर पिता-पुत्रों ने चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसी तरह चिनहट के कमता स्थित बसंत विहार कॉलोनी निवासी शहजाद आलम ने भी अनूप और उसके पिता राम स्वरूप सिंह को नौकरी लगवाने के लिए चार लाख 85 हजार रुपये दिए थे।
दोनों ने कृष्णानगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी है। इससे पहले आलमबाग के चंदरनगर में कॉस्मेटिक की दुकान करने वाले सतपाल सिंह गोल्डी से उन्होंने लाखों रुपये ठगे। कृष्णानगर के सुंदरनगर निवासी रतपाल सिंह की तरफ से बीती 14 जुलाई को पिता-पुत्रों पर बिजनेस में पार्टनरशिप का झांसा देकर आठ लाख रुपये ठगने की एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
स्टेशनरी फर्म को भी लगाया चूना
अनूप और उसके पिता ने स्टेशनरी सप्लाई के नाम पर स्टेशनरी फर्मों को भी चूना लगाया। पारा के मिश्रा बुक डिपो के संचालक से पार्टनरशिप के नाम पर ढाई लाख और गणेशगंज के आशीष गोयल से सवा चार लाख रुपये वसूले।
आशीष ने बीते वर्ष एफआईआर दर्ज कराई थी। मुरादाबाद की फर्म हिन्दुस्तान बुक स्टाल से साढ़े छह लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में अनूप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। दिल्ली की एक फार्म ने साढ़े छह व पांच लाख रुपये की धोखाधड़ी की दो एफआईआर दर्ज कराई हैं।