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गोरखपुर हवाई हड्डे का मैप जुटाने में लगा था समीर

Wed, 04 Mar 2015 11:48 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 04 Mar 2015 11:48 PM IST
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ISI agent Sameer wanted the map of Gorakhpur Airport.

राजधानी के नाका इलाके से दबोचा गया उत्तर भारत में जाली नोटों का सप्लायर डॉ. समीर उर्फ अली अहमद आईएसआई के इशारे पर नापाक मंसूबे में जुटा था। वह गोरखपुर हवाई अड्डे का नक्शा हासिल करने की कोशिश में लगा था।

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सामने आया है कि उसे यह नक्शा नेपाल में पाकिस्तानी दूतावास के एक अफसर को देना था। जिस अफसर को यह नक्शा सौंपा जाना था वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का बड़ा ओहदेदार बताया जा रहा है।
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समीर के इस मंसूबे की जानकारी सामने आने के बाद उससे एटीएस के अलावा एनआईए व आईबी ने भी पूछताछ की। समीर को बुधवार को नाका पुलिस ने अदालत के समक्ष हाजिर किया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। अब उसे रिमांड पर लेने की कोशिश शुरू होगी।

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यूपी से गुजरात तक बनाया नेटवर्क

ISI agent Sameer wanted the map of Gorakhpur Airport.

एसटीएफ के सूत्रों का कहना है कि उससे पूछताछ में यूपी से लेकर गुजरात तक के नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। विभिन्न राज्यों में उसने अपना खास एजेंट बनाया हुआ था।

ऐसे एक दर्जन से अधिक नाम उसने एसटीएफ को बताए हैं सामने आया कि इन्हीं खास एजेंटों के जरिये जाली नोटों की खपत कराई जाती थी। अब एसटीएफ इन सभी नामों के बारे में तस्दीक कर रही है।

सूचना की तस्दीक होने के बाद गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू होगा। इस दौरान जिनके नाम सामने आए हैं वे सभी यूपी एसटीएफ या संबंधित राज्यों की एसटीएफ अथवा क्राइम ब्रांच की नजर में रहेंगे।

बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में बनाना था नेटवर्क

ISI agent Sameer wanted the map of Gorakhpur Airport.

सूत्रों के अनुसार समीर ने यह भी जानकारी दी है कि नेपाल सीमा पर सख्ती बढ़ जाने की वजह से उसे जाली नोटों की खपत के लिए बांग्लादेश की सीमा पर नेटवर्क फैलाने को कहा गया था। इसका आदेश उसे नेपाल स्थित पाक दूतावास के कुछ अधिकारियों से मिला था।

ये अफसर आईएसआई से जुड़े हैं। इनसे वह लगातार संपर्क में था। समीर ने जानकारी दी है कि बांग्लादेश की सीमा पर जो नेटवर्क बनाया जाना था, उसकी पूरी जिम्मेदारी उसे ही निभानी थी। बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल होते हुए जाली नोटों की खेप एजेंटों तक पहुंचाई जानी थी।

यह खेप बिहार की तरफ लाकर आगे भेजा जाना था तो कुछ यूपी और कुछ पश्चिम बंगाल से ही विभिन्न प्रांतों के लिए भेजे जाने की योजना थी। इसके लिए कई लोगों को संपर्क में लिया गया था, जिनको नए नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया जाना था।

दस सालों से कर रहा था नकली नोटों की सप्लाई

ISI agent Sameer wanted the map of Gorakhpur Airport.

एसटीएफ को जानकारी मिली है कि जाली नोटों का नेटवर्क नेपाल के काठमांडू क्षेत्र से वीरगंज तथा भैरहवां एवं संबंधित भारतीय सीमा क्षेत्र रक्सौल एवं सुनौली में है। जाली नोटों के कारोबार से जुड़े लोगों के साथ ही आईएसआई के एजेंट व उनके गुर्गे भी इस नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे।

समीर ने पूछताछ में बताया है कि वह पिछले लगभग 10 सालों से जाली नोटों के धंधे में लिप्त है। काठमांडू तथा वीरगंज के बड़े कारोबारियों से भारतीय जाली करेंसी हासिल कर उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ अन्य राज्यों में भी सप्लाई करता रहा है। डॉ समीर का नेटवर्क पश्चिमी बंगाल, बिहार, झारखंड, गुजरात, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में होना बताया गया।

चेहरा एक पर नाम कई

समीर कितना शातिर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने कई नाम रख रखे थे। डॉ. समीर, अली अहमद, वसीम खान, एसके अली के नाम से उसे धंधे से जुड़े लोग जानते थे।

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