पांच से आठ लाख रुपये लेकर डीएम का चपरासी बांट रहा था नौकरी
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लखनऊ के डीएम कौशल राज शर्मा का चपरासी अवनीश कुमार राना एलडीए का नियुक्तिपत्र बांट रहा था। पीडित़ों ने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था फिर भी पुलिस की गिरफ्त से बचा था। सोमवार को पुलिस ने आरोपी चपरासी को मानसनगर से दबोच लिया।
अवनीश कई सालों से जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात है। उसकी ठगी का पर्दाफाश पिछले साल दिसंबर में हुआ। इसके बाद पीड़ितों ने कृष्णानगर थाने में केस दर्ज कराया। पर, वह अपने रसूख के दम पर पुलिस की गिरफ्त में आने से बचता रहा।
12 से ज्यादा युवकों से 5 लाख से लेकर 8 लाख तक ऐंठे
इंस्पेक्टर कृष्णानगर रवीन्द्र नाथ राय के मुताबिक अवनीश ने पिछले साल एलडीए में सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति कराने केनाम पर ठगी की। 12 से ज्यादा युवकों को उसने सुपरवाइजर पद पर तैनाती देने के नाम पर 5 लाख से लेकर आठ लाख रुपये तक ऐंठ लिए। इन युवकों को अक्तूबर में नियुक्ति पत्र सौंप जॉइन करने केलिए भेज दिया।
वहां पता चला कि सुपरवाइजर पद पर तो आवेदन ही नहीं मांगे गए तो नियुक्ति कैसी? रुपये डूबने और नियुक्ति न होने से परेशान सरोजनीनगर के बेहसा निवासी तरन्नुम ने कृष्णानगर कोतवाली में केस दर्ज कराया। यही नहीं अन्य मामलों में भी इसने ठगी की और करीब डेढ़ करोड़ रुपये ऐंठे।
बेरोजगारों की नौकरी के प्रति लालसा देखने के बाद तय करता था रेट
जिलाधिकारी का चपरासी अवनीश कुमार राना फर्जी नौकरी बांटने का गिरोह चला रहा था। इंस्पेक्टर कृष्णानगर रवीन्द्र नाथ राय के मुताबिक यह गिरोह इस फर्जीवाड़े का काम करता है। वह सरकारी विभागों की नियुक्ति पत्र से लेकर मेडिकल सर्टिफिकेट तक बांटता है।
इंसपेक्टर के मुताबिक, राना ने एलडीए में सुपरवाइजर के पद की नौकरी दिलाने के लिए एक दर्जन से अधिक लोगों को शिकार बनाया। बेरोजगारों की नौकरी के प्रति लालसा देखने के बाद वह रेट तय करता था।
उसने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की है। नियुक्ति न होने पर कुछ ने रुपये वापस करने का दबाव बनाया। इस पर जालसाज अवनीश ने कुछ लोगों को थोड़ी रकम भी लौटाई।
राम मनोहर लोहिया में कराया मेडिकल
विवेचक एसआई हरिनाथ ने बताया कि आरोपी अवनीश राना ने सरकारी नियुक्ति की सभी प्रक्रिया युवकों के साथ कराई। पहले एक अधिकारी से मुलाकात कराई। इसके बाद नियुक्ति पत्र जारी किया।
यहीं नहीं, संदेह न हो इसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट भी बनवाने का निर्देश दिया। पोल न खुले इसके लिए अवनीश ने सभी युवकों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भेजा, जहां एक कर्मचारी के जरिए मेडिकल कराकर सर्टिफिकेट जारी कराया।
इसके बाद एलडीए में जॉइन करने को कहा। उसने युवकों को हिदायत दी थी कि जॉइनिंग के लिए अकेले-अकेले जाना होगा। जब युवक वहां पहुंचे तो अवनीश के जालसाजी का पर्दाफाश हो गया।
तत्कालीन डीएम व एलडीए वीसी के कार्यकाल में हुआ फर्जीवाड़ा
पुलिस के मुताबिक, एलडीए में फर्जी नियुक्ति का मामला तत्कालीन डीएम सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल की है। उस वक्त सत्येन्द्र सिंह के पास डीएम के साथ एलडीए वीसी की भी जिम्मेदारी थी।
अवनीश उनका करीबी चपरासी गिना जाता था। इसका फायदा उठाते हुए अवनीश ने यह फर्जीवाड़े किया। इसका पर्दाफाश दिसंबर में हुआ, लेकिन उस समय सपा सरकार में रसूख के दम पर मामले को दबाने की हर कोशिश की गई।
पुलिस मामले में केस दर्ज कर शांत बैठ गई। सत्ता बदली तो जांच में तेजी आई और विवेचक ने सोमवार को आरोपी जालसाज चपरासी को दबोच लिया।