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मुलायम का बेटा बन एक कॉल पर कमाता था लाखों, धरा गया

Mon, 22 Jun 2015 12:33 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला,लखनऊ Updated Mon, 22 Jun 2015 12:33 AM IST
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fraud on name of prateek yadav in lucknow

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव और कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की आवाज में फोन कर सिफारिशें करने वाले फर्जी आईएएस रामशंकर शाक्य और उसके पीए को शनिवार रात हजरतगंज चौराहा स्थित कसमंडा हाउस से पुलिस ने दबोच लिया।

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खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को फोन करके एक व्यक्ति को खनन भंडारण का लाइसेंस देने की सिफारिश करने के बाद शाक्य की कारगुजारी सामने आई थी। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। शाक्य प्रतीक और शिवपाल के नाम पर कई अफसरों को अर्दब में लेकर काम करा चुका है। इससे उसने करोड़ों रुपये कमाए।
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एसएसपी राजेश कुमार पांडेय के मुताबिक साइबर क्राइम सेल के साथ हजरतगंज व गौतम पल्ली थाने की पुलिस टीम ने कसमंडा हाउस में दो फ्लैट किराए पर लेकर रह रहे रामशंकर शाक्य व उसके पीए फिराक हुसैन को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन बरामद हुए।
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इनमें एक में प्रतीक यादव के नाम से जारी सिमकार्ड पड़ा था। इसके अलावा पंधारी यादव सचिव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन की मुहर, प्रबंध निदेशक भारतीय प्रशासनिक सेवा संस्थान (प्रा) की मुहर, डॉ आरएस शाक्य आईएएस का विजिटिंग कार्ड, डॉ. आरएस शाक्य मैनेजिंग डायरेक्टर का फोटोयुक्त विजिटिंग कार्ड, विभिन्न बैंकों के लाखों रुपये के भरे हुए चेक मिले।

सफाई कर्मी व समूह ‘ग’ की भर्ती व अन्य विभागों में नौकरी के लिए आवेदनपत्र, बड़ी संख्या में स्थानांतरण प्रार्थनापत्र, पुलिस भर्ती के प्रवेशपत्र, राज्य कृषि मंडी उत्पादन में भर्ती का आदेश, कई अफसरों के फर्जी सिफारिशी पत्र, ठेकेदारी पंजीकरण के संबंध में प्रमाणपत्र व अन्य प्रपत्र बरामद हुए हैं।

मंत्री को फोन कर कहा, मैं शिवपाल बोल रहा हूं

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एसएसपी राजेश कुमार पांडेय के मुताबिक रामशंकर शाक्य ने 12 जून को कबीना मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को कॉल किया। उसने आवाज बदलकर खुद को शिवपाल यादव बताया और इदरीश नामक शख्स को खनन भंडारण का लाइसेंस देने को कहा। थोड़ी देर बाद उसी नंबर से प्रतीक यादव के नाम से कॉल करके उसी शख्स की सिफारिश की गई।

संदेह तो हुआ, पर नंबर प्रतीक का नजर आने पर बढ़ा असमंजस
एसएसपी के मुताबिक शाक्य वॉयस चेंजर का इस्तेमाल कर रहा था। इसके जरिये वह आवाज बदलकर बात करता था।

मंत्री को सिफारिश पर संदेह तो हुआ लेकिन ट्रू-कॉलर पर ट्रेस करने पर नंबर प्रतीक यादव का मिला। दरअसल शातिर रामशंकर ने प्रतीक की फर्जी आईडी पर उस सिम को ले रखा था।

इस तरह आया शक के घेरे में
गायत्री प्रसाद प्रजापति ने शिवपाल यादव व प्रतीक यादव से संपर्क करके फोन के बारे में जानकारी की। पता चला कि उन्होंने कॉल ही नहीं की थी। बातचीत में इस्तेमाल नंबर उनका नहीं है।

इस पर गायत्री प्रजापति ने अपने पीए रामबचन के जरिये गौतमपल्ली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। एसओ सुरेंद्र कुमार कटियार ने साइबर क्राइम सेल की मदद से तहकीकात शुरू की।

याद ही नहीं कितनों को ठगा

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रामशंकर शाक्य को याद नहीं कि उसने कितने नेताओं व अफसरों को शिवपाल और प्रतीक के नाम से अर्दब में लेकर कितने लोगों के काम कराए। फर्जी पत्र से भी कई लोगों के काम बने। एक कॉल पर से लाखों की कमाई हो जाती थी। उसने करोड़ों रुपये कमाए और दिल खोलकर खर्च करता था।

शानदार फ्लैट के बाहर निजी सिक्योरिटी गार्ड तैनात कर रखे थे। दरवाजे पर लगी डॉ. आरएस शाक्य प्रबंध निदेशक भारतीय प्रशासनिक सेवा संस्थान की नेम प्लेट ही लोगों को प्रभावित कर देती थी।

प्रतीक के नाम पर लिया सिम सात साल से था एक्टिवेट
सीओ हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि रामशंकर ने प्रतीक यादव पुत्र मुलायम सिंह यादव निवासी 5 विक्रमादित्य मार्ग लखनऊ के नाम से फर्जी वोटर आईडी तैयार कराया और उससे सिमकार्ड खरीदा था। सिमकार्ड सात साल से एक्टीवेट था। हालांकि रामशंकर ने आठ महीने से ठगी व जालसाजी करने का जुर्म कुबूला है। इसकी तहकीकात की जा रही है।

1.30 करोड़ की ठगी के दो मुकदमे
इंस्पेक्टर हजरतगंज विजयमल यादव ने बताया कि रामशंकर ने आगरा के रंजन गुप्ता व अतुल गुप्ता को जालौन में मौरंग-बालू के खनन का पट्टा दिलाने के लिए न सिर्फ मंत्री व अफसरों को फोन किए थे, बल्कि अनु सचिव एमएम झा के फर्जी दस्तखत से जालौन के डीएम को पत्र लिखा था।

इसके एवज में उसने रंजन से 1.15 करोड़ लिए थे। काम बनने देख रंजन गुप्ता ने आगरा विकास प्राधिकरण की एक बिल्डिंग की सील खुलवाने के लिए संपर्क किया। रामशंकर शाक्य ने उससे दस लाख रुपये लिए थे। झांसी के मनीष यादव को नौकरी का झांसा देकर पांच लाख की ठगी की थी। दोनों मुकदमे हजरतगंज कोतवाली में दर्ज हैं।

नेताओं के संपर्क में आया और शुरू कर दिया ठगी

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कॉल डिटेल से पता चलेगा किन मंत्रियों व अफसरों को बनाया शिकार
एसएसपी ने जानकारी दी कि रामशंकर द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चारों मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल खंगाले जा रहे हैं। इससे पता चलेगा कि उसने किन मंत्रियों व अफसरों को कितने बार कॉल की?

इससे उसके कारनामों का पता चलेगा। इसके अलावा उसके द्वारा खनन लाइसेंस, तबादले व अन्य कामों के लिए लिखे पत्रों का भी पता लगाया जा रहा है।

मैनपुरी के बरनहवा थाने के सराय मुगलपुर के मूलनिवासी रामशंकर शाक्य ने पूछताछ में खुलासा किया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी की परीक्षा पास करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू की। इस दौरान अनेक नेताओं व अफसरों से संपर्क हुआ। इसके बाद उसने अलीगंज इलाके में कोचिंग खोली।

कद्दावर नेताओं के फोन पर बड़े काम होते देख उसने मोटी कमाई के लालच में जालसाजी शुरू की। पहले खुद को आईएएस के रूप में प्रचारित किया।

कैसरबाग के घसियारी मंडी के बाग मुन्नू निवासी कंप्यूटर मैकेनिक फिराक हुसैन को साथ मिलाया। उसे बातचीत का अंदाज सिखाया और ठगी शुरू कर दी। पहले सचिवालय के चक्कर काटकर शिकार फंसाए। इसके बाद लोगों ने खुद संपर्क करना शुरू कर दिया।

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