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विदेशी युवती बनकर फंसाते थे मुर्गा, अब तक करोड़ों ठगे

Sat, 01 Oct 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 01 Oct 2016 12:25 AM IST
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cyber cell of police arrested fraud in lucknow.
गिरफ्तार हुए ठग - फोटो : amar ujala
विदेशी युवती बनकर फेसबुक और वॉट्सएप के जरिये ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग के चार गुर्गों को साइबर सेल की टीम ने शुक्रवार दोपहर हजरतगंज से गिरफ्तार कर लिया। चारों शातिर दिल्ली में बैठे सरगना के लिए कमीशन पर काम करते थे।
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इनका मुख्य काम फर्जी आईडी बनवाकर विभिन्न बैंकों में अकाउंट खुलवाना था। ठगों ने राजधानी के विभिन्न बैंकों में 25 से ज्यादा फर्जी अकाउंट खुलवाकर करोड़ों रुपये की ठगी की है।
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एएसपी पूर्वी शिवराम यादव ने बताया कि शातिर बरेली के बारादरी निवासी मो. साहिल उर्फ विवेक गुप्ता उर्फ विनय, कोतवाली घंटाघर में रहने वाले शहजादे हुसैन उर्फ इमरान, इज्जतनगर का शारिफ उर्फ सोमपाल व राजाजीपुरम के हबीबपुर में रहने वाला इमरान खान उर्फ शाहजेब है।
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चारों तीन महीने से लखनऊ में किराये के मकान में रहकर दिल्ली में बैठे नाइजीरिया के साइबर ठगों के लिए काम कर रहे थे। गिरोह का सरगना और चार लड़कियां फेसबुक पर विदेशी युवतियों के नाम से प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाते थे।

इसके बाद घूमने के लिए भारत आने, तोहफे भेजने व अन्य बहानों से फर्जी आईडी से खोले गए अकाउंट में रुपये मंगाते थे। ठगों ने मोबाइल फोन कंपनियों के टॉवर लगाने के नाम पर भी कई लोगों से रुपये ऐंठे।

लंदन की युवती बनकर ठगे 65 हजार रुपये

cyber cell of police arrested fraud in lucknow.

इसी गिरोह ने लंदन के लीवरपूल की लेंडर जेरी नाम की युवती बनकर गोमतीनगर के विशालखंड निवासी बिजली ठेकेदार सुरेश गुप्ता से फेसबुक पर दोस्ती की और भारत घूमने का झांसा देकर 65 हजार रुपये ठगे थे। सुरेश ने एफआईआर दर्ज कराई थी।

आईसीआईसीआई बैंक के जिस खाते में सुरेश ने रुपये जमा कराए थे वह लखनऊ के विवेक गुप्ता के नाम पर था। साइबर सेल ने बैंक जाकर छानबीन की तो पता चला कि अकाउंट वजीरबाग निवासी विवेक गुप्ता की फर्म गुप्ता इंटरप्राइजेज के नाम से है।

साइबर सेल की टीम उक्त पते पर पहुंची तो पता चला कि न कोई विवेक गुप्ता वहां रहता था न ही गुप्ता इंटरप्राइजेज फर्म का ऑफिस था। साइबर सेल के नोडल अधिकारी सीओ हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि उक्त अकाउंट से जुड़े अन्य अकाउंट के बारे में जानकारियां जुटाकर ठगों को दबोचा गया।

पूछताछ में साहिल ने कुबूला कि वह फर्जी दस्तावेज बनाकर बैंक अकाउंट खुलवाता था। इसके बाद अकाउंट के आधार पर ही वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य फर्जी दस्तावेज बनवा लेता था। दिल्ली में बैठा नाइजीरियन ठग और उसके साथी अपने शिकार को यही अकाउंट नंबर बताकर पैसा मंगाते थे।

चौथी फेल है मास्टर माइंड

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बरामद हुए फेक चेक - फोटो : amar ujala

पूछताछ में मास्टरमाइंड मो. साहिल ने कुबूला कि वह चौथी फेल है और ठगी के धंधे में रोजाना 30 हजार रुपये तक कमा लेता था। सीओ ने बताया कि साहिल का बरेली में हेयर कटिंग सैलून था। उसके साथी भी यही काम करते थे।

छह महीने पहले सैलून में आने वाले इज्जतनगर निवासी सिराज ने उसे गाजियाबाद के सिधाकत से मिलवाया। सिधाकत ने ही उसे दिल्ली के नाइजीरियन ठगों से जोड़ा।

करीब साढ़े तीन महीने पहले नाइजीरियन ठग ने उसे व साथियों को फर्जी अकाउंट खुलवाने के लिए लखनऊ भेजा। ठगों के पास एक डायरी मिली है जिसमें दो महीने के दौरान सवा करोड़ रुपये का हिसाब-किताब लिखा है।

यह हुई बरामदगी
बिजली ठेकेदार से ठगे गए 65 हजार रुपये, 22 बैंकों में फर्जी खातों की चेकबुक, 11 फर्जी एटीएम कार्ड, फर्जी पतों से बनवाए गए चार ड्राइविंग लाइसेंस, तीन वोटर आईडी कार्ड, पांच पैन कार्ड, नौ मोबाइल फोन, लेबर डिपार्टमेंट के दो फर्जी सर्टिफिकेट, फर्जी फर्म के चार स्टैम्प और पांच पासबुक।

बैंककर्मी भी ठगों के साथी, कसेगा शिकंजा

cyber cell of police arrested fraud in lucknow.

फर्जी कंपनी का करंट अकाउंट खुलवाने में आईसीआईसीआई बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। सीओ हजरतगंज ने बताया कि बैंककर्मियों के सहयोग से ही साहिल और उसके साथी अकाउंट खुलवाते थे।

साहिल ने वजीरबाग के जिस पते से अकाउंट खुलवाया, वहां बिना सत्यापन के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने रिपोर्ट लगा दी।

पता लगाया जा रहा है कि बैंकों में खुलवाए गए फर्जी अकाउंट में किन-किन अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं? किस फील्ड अफसर ने सत्यापन किया? कौन-कौन से कर्मचारी ठगों के लिए काम कर रहे थे।

इस टीम को मिली शाबाशी
साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह, दरोगा विजयवीर सिंह सिरोही, कांस्टेबल फिरोज बदर, अखिलेश कुमार सिंह, रामप्रवेश मौर्य, शरीफ खान और संतोष कुमार।

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