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घूमने निकले थे दुनिया, बिता रहे थे नरक सा जीवन

Wed, 27 Nov 2013 01:22 PM IST
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
संजय त्रिपाठी/लखनऊ Updated Wed, 27 Nov 2013 01:22 PM IST
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Child labour

नाका स्थित जयभारत रेस्टोरेंट का मालिक बदायूं के तीन बच्चों को चार महीने से बंधक बनाए था। घरवालों को बताए बिना घूमने निकले बच्चे रेस्टोरेंट मालिक के चंगुल में फंस गए थे।

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रेस्टोरेंट से निकाले गए मैनेजर की सूचना पर मंगलवार दोपहर पहुंची बदायूं पुलिस ने तीनों को छुड़ाने के साथ मालिक को पकड़ा है।

बदायूं के हजरतपुर थाने के गांव गढ़िया पैगंबरपुर के जयपाल के बेटे अनिल (10) व यादराम (11) गांव के राजेश सिंह के बेटे संदीप (12) के साथ 4 जुलाई को घर वालों को बताए बिना घूमने निकल पड़े।
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ट्रेन में सवार हुए और चारबाग पहुंच गए। उधर दोनों के परिवारवालों ने बच्चों की तलाश शुरू की। पता न चलने पर 8 जुलाई को हजरतपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
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इधर, चारबाग में भटकते तीनों बच्चों को जयभारत रेस्टोरेंट के मालिक सुनील शुक्ला ने सहयोगियों की मदद से फंसाया।

अच्छे खाने व तीन हजार रुपये महीने की तनख्वाह का झांसा देकर रेस्टोरेंट लाया और बंधक बनाकर काम कराने लगा। बच्चों को बाहर निकलने तक की इजाजत नहीं थी। रेस्टोरेंट के कर्मचारी भी मालिक के डर की वजह से चुप्पी साधे रहे।

सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले किसी बात पर विवाद के बाद मैनेजर राघवेंद्र को सुनील ने काम से हटा दिया।

झल्लाए राघवेंद्र ने बच्चों की सूचना बदायूं पुलिस को दे दी। बच्चों के परिवार को लेकर पहुंची बदायूं पुलिस ने रेस्टोरेंट पर छापा मारा।

बच्चों को मुक्त कराने के साथ ही रेस्टोरेंट मालिक को गिरफ्तार कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया।

परिवार को देख बिलख पड़े मासूम
चार महीने से रेस्टोरेंट में बंधक बने तीनों बच्चों ने घरवालों से दुबारा मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। गलती पर पछताते और किस्मत को कोसते हुए बंधुआ मजदूरी कर रहे थे।


पुलिस के साथ अपने पिता व परिवार को देखकर बच्चे बिलख पड़े। अभिभावकों के कलेजे से लिपट कर आपबीती सुनाने के साथ दुबारा गलती न करने की कसम खाने लगे।

रेस्टोरेंट मालिक को देने होंगे 75 हजार रुपये
इंस्पेक्टर नाका ने बताया कि बच्चों को मुक्त कराने के दौरान श्रम विभाग व चाइल्ड लाइन की टीम बुला ली गई थी। श्रम विभाग के अधिकारियों ने रेस्टोरेंट मालिक सुनील शुक्ला के बयान दर्ज किए। उसने सफाई दी कि भटक रहे बच्चों को काम दिया था।

अधिकारियों के अनुसा बालश्रम कानून के तहत उसे सजा के साथ ही बच्चों के परिवार को 25-25 हजार रुपये हर्जाना देना होगा।

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