जमीनी विवाद में भाजपा की महिला कार्यकर्ता को फावड़े से काट डाला, आठ के खिलाफ नामजद केस दर्ज
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लखनऊ में इटौंजा के ढिलवासीखानपुर में भाजपा कार्यकर्ता बबली रावत (27) की उसके मासूम भतीजे के सामने फावड़े से काटकर हत्या कर दी गई। भाजपा कार्यकर्ता ने सहन की जमीन पर दरवाजा खोलने का विरोध किया था। इस पर पड़ोसियों ने वारदात अंजाम दे डाली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भिजवाया। बबली के मामा महावीर का पुरवा निवासी रामभरोसे की तहरीर पर पुलिस ने आठ के खिलाफ नामजद केस दर्ज कर तलाश कर रही है।
ढिलवासी के मजरा खानपुर निवासी बबली रावत उर्फ सुदामा कुम्हरावा मंडल से भाजपा की सदस्य थीं। उनके पिता रामस्वरूप, मां भगवान देई और भाई संतराम की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। बबली अपने भतीजे शिवम (12) के साथ रहती थीं। बबली का पड़ोसी लक्ष्मण से मकान के सहन की जमीन को लेकर विवाद था। जिसकी शिकायत बबली ने कई बार इटौंजा थाने से लेकर तहसील तक की थी। लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी।
गांव के कुछ लोग भी पंचायत कर विवाद का हल निकालने की कोशिश कर रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक, बबली का विरोधी लक्ष्मण का परिवार सोमवार सुबह सहन की जमीन पर दरवाजा खोलने लगा। इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। पुलिस समझौता कराकर लौट गई।
दोबारा शाम पांच बजे लक्ष्मण और उसके अन्य सहयोगी बबली पर फावड़ा लेकर हमला करने पहुंच गए। ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। बबली खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर गईं। इस बीच ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस बबली को साढ़ामऊ अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया
इलाके में तेज तर्रार कार्यकर्ता के रूप में थी पहचान
बबली रावत इटौंजा इलाके में तेज तर्रार कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती थीं। किसानों व ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर वह थाना, तहसील व ब्लाक में संघर्ष करती रहती थीं। दो साल पहले बाराबंकी जिले में एक रिश्तेदार के अपहरण व उससे फिरौती के मामले को लेकर बबली ने बीकेटी थाने में काफी संघर्ष किया था। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
वारदात कर फरार हुए आरोपी
मौके पर पहुंची क्षेत्राधिकारी बीकेटी डॉ. बीनू सिंह और प्रभारी निरीक्षक महेश चंद्र ने आरोपियों की तलाश शुरू की। लेकिन सभी फरार थे। मौके पर मौजूद बबली के भतीजे शिवम ने पुलिस को बताया कि पड़ोसी लक्ष्मण और उसके परिवारीजनों ने फावड़े से हमला किया था। बबली के सिर पर कई गंभीर चोटें आई थीं।
छिन गया शिवम का इकलौता सहारा
ग्रामीणों के मुताबिक, शिवम के पिता संतराम की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। कुछ दिन बाद उसकी मां भी संदिग्ध हालात में लापता हो गई। वह गांव के ही स्कूल में कक्षा पांच का छात्र है। बुआ बबली की मौत के बाद शिवम बेसहारा हो गया है और वारदात से डरा-सहमा है।
पुलिस व प्रशासन पर लापरवाही की आरोप
ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने पूरे मामले में पुलिस व प्रशासन पर लापरवाही की आरोप लगाया है। रिश्तेदारों व ग्रामीणों का आरोप है कि मकान के सहन की जमीन के विवाद को लेकर बबली ने थाना व तहसील में कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला टरका दिया। अगर अधिकारियों द्वारा मामले का स्थायी समाधान किया जाता तो युवती की हत्या नहीं होती।
विवाद को लेकर कई बार लगा चुकी थी गुहार
सांसद कौशल किशोर ने बताया कि बबली भाजपा के कुम्हरावां मंडल कार्य समिति की सदस्य व खानपुर बूथ की अध्यक्ष थी। मकान की सहन की भूमि के विवाद को लेकर सुदामा ने कई बार उससे गुहार भी लगाई।
सांसद ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर थाने से लेकर तहसील के अधिकारियों को फोन भी किया, लेकिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती। इसके कारण सहन की जमीन को लेकर हुआ विवाद युवती बबली की मौत का कारण बना।