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जेल से निकला, पुलिस से भिड़ा, फिर भेजा गया जेल
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 03 Sep 2014 03:32 AM IST
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आठ साल से जेल में बंद पाकिस्तानी जासूस सोमवार को सजा काटकर निकलते ही पुलिस टीम से भिड़ गया। पुलिस टीम उसे अटारी बार्डर पर छोड़ने ले जा रही थी।
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आईएसआई एजेंट को चलती गाड़ी में दरोगा से गुत्थमगुत्था करते देख पुलिस टीम ने किसी तरह काबू में किया और मोहनलालगंज कोतवाली ले जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। कोर्ट ने उसे दोबारा जेल भेज दिया है।
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13 सितंबर 06 को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार पाकिस्तानी जासूस/आईएसआई एजेंट तसीन अजीम उर्फ लारेब खां को कोर्ट ने आठ साल की सजा सुनाने के साथ सजा पूरी होने पर देश से बाहर छोड़ने के आदेश दिए थे।
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सोमवार को सजा पूरी होने पर देर शाम एसआई आदेश चंद्र और सतीश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस व एलआईयू की टीम उसे अटारी बार्डर पर छोड़ने बोलेरो से रवाना हुई।
मोहनलालगंज क्षेत्र में रेलवे फाटक बंद होने पर चालक ने बोलेरो रोकी, तभी तसीन ने साथ में बैठे एसआई आदेश चंद्र से झगड़ना शुरू किया। गालीगलौज से साथ जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट करने लगा।
पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उसे काबू में किया और मोहनलालगंज कोतवाली ले गए। रिपोर्ट दर्ज कर तसीन अजीम को बंदी बनाकर मंगलवार दोपहर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। पाकिस्तान के नार्थ करांची निवासी आईएसआई एजेंट तसीन अजीम ने पासपोर्ट के बगैर सरहद पार की थी और फर्जी आईडी तैयार कराई।
इसमें उसने खुद को लारेब खां निवासी जेके नगर करेली इलाहाबाद दिखाया था। एसटीएफ ने 13 सितंबर 2006 को कैंट इलाके से उसे गिरफ्तार किया था।
उसके कब्जे से उत्तर प्रदेश का मानचित्र मिला था, जिसमें झांसी व लखनऊ के कैंट को चिह्नित किया गया था। इसके अलावा अन्य खुफिया व जाली दस्तावेज बरामद हुए थे।
विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) के अपर सत्र न्यायाधीश बीडी नकवी के समक्ष सुनवाई के दौरान तसीन ने स्वीकार किया था कि बेरोजगार होने के कारण वह भारत में जासूसी करने आया था।
इस पर कोर्ट ने 10 अप्रैल 14 को उसे आठ साल सश्रम कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जेल में बिताई अवधि को सजा में शामिल करने व सजा पूरी होने पर उसे देश से निष्कासित करने के आदेश दिए थे।
फैसले के पांच महीने में पूरी हुई सजा
आईएसआई एजेंट तसीन अजीम को 13 सितंबर 06 को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। संगीन धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे की सात साल सुनवाई चली। इसके बाद गवाहों से जिरह, आरोपी की सुनवाई में छह महीने लगे।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर अपर सत्र न्यायाधीश बीडी नकवी ने 10 अप्रैल को उसे आठ साल की सजा सुनाई। जेल में बिताई अवधि सजा में शामिल थी।
आठ साल की कैद के फैसले के पांच महीने बाद तसीन अजीम सोमवार को जेल से रिहा हुआ था।
हाईकोर्ट में अपील पर हो रही सुनवाई
एसएसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि पाकिस्तानी जासूस/आईएसआई एजेंट तसीन अजीम उर्फ लारेब खां को जिन संगीन धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था उनमें कोर्ट ने धारा 467/468/471 आईपीसी व धारा 3/9 एवं 5/9 कार्यालय गोपनीयता अधिनियम व धारा 3/14 विदेशी अधिनियम में दोषी पाया था।
इनमें धारा 467 के तहत आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कारावास व जुर्माने से दंडित किया जा सकता था।
इसके अलावा कोर्ट ने धारा 15/120बी/121/121ए व 123 का आरोप नहीं माना था। एडीजे के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई है। इस पर सुनवाई चल रही है।