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रितेश हत्याकांड: बेटे की रट लगाते-लगाते टूट गईं मां की सांसें

Fri, 11 Mar 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 11 Mar 2016 02:17 AM IST
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A mother dead after her son was murdered.
मिठाई वाले चौराहे पर गोलीमार कर हुई थी उसकी हत्या - फोटो : amar ujala

रिंकू....., रिंकू कहां है, उसे बुलाओ। वह आ क्यों नहीं रहा, कहां है वह, कुछ छिपा तो नहीं रहे तुम लोग.....। वेंटीलेटर पर होने के बावजूद उन्हें क्षण भर के लिए जब-जब होश आया, वह रितेश, जिसे प्यार से रिंकू कहती थीं को बुलाने की जिद करती थीं।

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आखिरकार बेटे के नाम की रट लगाते-लगाते दृष्टिबाधित मां रश्मि (65) ने भी बृहस्पतिवार की सुबह दम तोड़ दिया। स्यूडो मेंब्रिनेस कोलाइटिस (आंतों के संक्रमण) से गंभीर रूप से पीड़ित रश्मि 26 फरवरी से गुडंबा के श्री साईं हॉस्पिटल में भर्ती थीं। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था।
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परिवारीजनों ने दो दिन तक तो किसी तरह से रितेश की मौत की बात छिपाई लेकिन बेटे को बुलाने की जिद बढ़ती गई तो सोमवार को उन्हें एक्सीडेंट के बारे में बताया गया। इसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
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गौरतलब है कि बीते शनिवार को दोपहर में मिठाईवाले चौराहे के पास कार मालिक ने रितेश अवस्थी को गोलियों से उड़ा दिया था। उसका कुसूर सिर्फ इतना था कि उसने कार के बोनट को छू दिया था।

उसका कसूर सिर्फ इतना था
शनिवार को रितेश गोमतीनगर के मिठाईवाले चौराहे पर होर्डिंग की फोटोग्राफी करने गया था। वह एक विज्ञापन एजेंसी में एक्जीक्यूटिव था। इस दौरान उसने पास ही खड़ी कार के बोनट पर हाथ रख दिया। इस पर कार मालिक ने उसे गोली से उड़ा दिया था।

नहीं रहा वह इस दुनिया में...

A mother dead after her son was murdered.
सिर्फ कार के बोनट पर हाथ रखने पर उसे मार दी गोली - फोटो : amar ujala
परिवार में एकलौते बचे छोटे बेटे विभोर ने बताया कि दो दिन तक तो हमसब बहाना बना कर टाल देते थे। रविवार को दिनभर वह नहीं दिखा तो उन्होंने उसे बुलाने को कहा। छोटी बहू स्वीटी ने किसी तरह उन्हें बहलाया।

सोमवार को उन्होंने रितेश को बुलाने की जिद पकड़ ली थी। इस कारण सच बताना पड़ा। रितेश अब दुनिया में नहीं रहा। इसी के बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी थी।

बृहस्पतिवार की सुबह 8.20 मिनट पर उन्होंने दम तोड़ दिया। रश्मि का शव लेकर परिवारीजन इंदिरानगर डी ब्लॉक स्थित घर पहुंचे। यहां से अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा बैकुंठधाम के लिए रवाना हुई।

घंटों मां का हाथ थामे बैठा रहता था
तीन बेटों में रितेश सबसे दुलारा था। मां की देखभाल के लिए वह काम-धंधा भूल गया था। दिनभर में वह अस्पताल के कई चक्कर लगाता। घंटों मां की हथेली थामे बैठा रहता था। रात को भी अस्पताल में वही रुकता था। नींद में भी उसी का नाम बड़बड़ाती रहती थीं।

बुधवार को भी उन्होंने रिंकू को बुलाने की जिद की और अड़ी रहीं। आखिर बुधवार रात उनके सवालों ने बहुओं के सब्र का बांध तोड़ दिया। उन्होंने रितेश की मौत की खबर दी तो रश्मि पर जैसे आसमान टूटकर गिर पड़ा। इसके बाद वह एकदम शांत थीं और सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

पांच दिन में उठी दूसरी अर्थी, हंसता-खेलता परिवार तबाह

A mother dead after her son was murdered.
इंदिरा नगर के डी ब्लॉक स्थित रितेश के घर पर शोकाकुल परिवारीजन। - फोटो : amar ujala

...अभी तो जवान बेटे की मौत हुई थी। क्या चाची भी नहीं रहीं? इंदिरानगर के डी ब्लॉक में सबकी जुबान पर यही सवाल था। रितेश की गली के आसपास लोग एकत्र हो गए। ...कब हुआ? कितने बजे? ऐसे सवाल गूंजने लगे।

जैसे ही रितेश की मां रश्मि का शव आया... रोना-पीटना मच गया। पड़ोस की महिलाएं आपस में बात करने लगीं। ...हाय राम! ऊपरवाला कितना बेरहम है। दया भी नहीं आई। एक ने कहा ...कितना हंसता-खेलता परिवार था। न जाने किस शैतान की नजर लग गई?

रश्मि की मौत की खबर मुहल्लेवालों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। सुबह से ही उनके घर के आसपास भीड़ लग गई थी। सभी स्तब्ध थे। करीब दस बजे रश्मि का शव लेकर परिवारीजन घर पहुंच गए।

शव देखते ही रश्मि की तीनों बहू और परिवार की अन्य महिलाओं में चीख-पुकार मच गई। आसपास खड़े लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पांच दिन में इसी चौखट से दूसरी अर्थी उठी थी।

एक-एक कर सभी साथ छोड़कर चले गए

A mother dead after her son was murdered.
अस्पताल में रितेश को मृत घोषित कर दिया गया था - फोटो : amar ujala

विभोर ने कहा कि परिवार के सभी जिम्मेदार एक-एक करके उसे अकेला छोड़कर चले गए। 2006 में उसके बड़े भाई प्रकाश की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। वह जगरानी अस्पताल में काम करते थे और वहीं मृत पाए गए। परिवारीजनों ने प्रकाश की हत्या के आरोप में जगरानी अस्पताल के संचालकों पर एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

बीते वर्ष अक्तूबर में डाक विभाग से रिटायर्ड पिता रामबाबू अवस्थी की बीमारी से मौत हो गई। शनिवार दोपहर एडवरटाइजिंग एजेंसी में काम करने वाले विभोर के दूसरे नंबर के भाई रितेश की मिठाईवाला चौराहा के पास कार सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। ...और बृहस्पतिवार सुबह बीमार मां रश्मि ने भी अस्पताल दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने बताया कि वह आरटीओ से रिटायर्ड थीं।

बकौल विभोर अब घर में उसके अलावा बड़े भाई प्रकाश की विधवा पत्नी तृप्ति और कक्षा सात में पढ़ने वाला बेटा प्रगल्व, रितेश की पत्नी रुचि और उसकी पत्नी स्वीटी व कक्षा दो में पढ़ने वाली बेटी अनिहिता रह गए हैं। रुचि चिनहट में टाटा कंपनी में नौकरी करती हैं, जबकि स्वीटी मेडिकल फील्ड में है।

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