मरने के बाद क्या होता है, जानने के लिए लगा ली फांसी
अलीगंज में कैंटीन संचालक अचल मिश्रा (31) ने अजीबोगरीब तरीके से फांसी लगाकर जान दे दी। सोमवार सुबह उसका शव बंद कमरे में लटका मिला। साथ रहने वाली मंगेतर गायब थी।
मड़ियांव पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अचल के दोनों हाथ पीछे बंधे देख होश उड़ गए। लोगों ने हत्या की आशंका जताई। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली, लेकिन दरवाजे के अलावा बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
कमरे में सुसाइड नोट और अन्य पर्चियां मिलीं, जिसमें उसने जीवन के बाद की सच्चाई जानने के लिए आत्महत्या करने की बात लिखी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फांसी से मौत की पुष्टि हुई है।
मूल रूप से खुर्शेदबाग निवासी अचल पांच साल से सेक्टर क्यू स्थित प्रशांत गुप्ता के मकान में किराएदार था। डेढ़ साल से उसकी मंगेतर भी साथ रह रही थी। इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अचल का स्वभाव अजीबोगरीब था। वह बात-बात पर मंगेतर, बहन व बहनोई को डांटता रहता था। कुछ दिनों से दोनों में मनमुटाव था।
हाथ बंधे नहीं थे बल्कि गमछे से लपेट रखे थे
रविवार शाम उसने मंगेतर को डांटा और भगा दिया। मंगेतर ने इसकी जानकारी उसके बहनोई अलीगंज निवासी नीरज वर्मा को दी। साथ ही उसके गलत कदम उठाने की आशंका भी जताई।
इंस्पेक्टर ने बताया कि नीरज रात में अचल के घर आया और उसे समझाकर शांत किया। सोमवार सुबह करीब सात बजे नीरज ने अचल को फोन किया तो कॉल नहीं रिसीव हुई। नीरज घर पहुंचा तो दरवाजा बंद था। नीरज ने खिड़की से झांका तो अचल शव फंदे से लटक रहा था। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव निकलवाया।
इंस्पेक्टर ने बताया कि अचल के दोनों हाथ बंधे नहीं थे, बल्कि उसने एक अंगोछे से हाथ लपेट रखे थे। अचल ने एक सुसाइड नोट, एक वसीयत और दो छोटी पर्चियों पर इच्छाएं लिखी थीं।
उसके माता-पिता की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। उसकी दो बहनें हैं और वह एमिटी यूनिवर्सिटी के पास कैंटीन चलाता था। उसकी मंगेतर व परिवार के अन्य सदस्यों को पूछताछ के लिए बुलवाया गया है।
मेरी लाश परिवार को मत देना
अचल ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह स्थिर व शुद्ध मन से शरीर का त्याग कर जीवन पर्यंत किए गए पाप का प्रायश्चित कर रहा है। उसने लिखा कि आत्महत्या करने से पहले मैंने मोबाइल, फेसबुक या सोशल मीडिया पर जिससे भी अंतिम बार बात की है, उसे परेशान न किया जाए।
अचल ने लिखा था कि वह जीवन के बाद की सच्चाई पता करने के लिए आत्महत्या कर रहा है इसलिए इसका दोषारोपण किसी व्यक्ति विशेष पर न किया जाए। लाश परिवार को न दी जाए। क्योंकि रिश्ते ऐसे हैं कि वह अंतिम संस्कार करने में असमर्थ होंगे।
मौत की खबर दोस्तों को न देने की बात भी उसने लिखी है। उसने लिखा के कम से कम खर्च में अंतिम संस्कार करा दिया जाए। अगर यह संभव न हो तो शव दान कर दिया जाए। उसने लिखा कि शरीर के अलावा फोन व अन्य वस्तुओं पर पुलिस या कानून का कोई अधिकार नहीं होगा।
फोन फारमेट कर दें, रजिस्टर-कॉपी नष्ट कर दें
अचल ने पर्चियों में लिखा है कि फोन इस्तेमाल करने से पहले फारमेट जरूर कर लें ‘याद से’। आगे लिखा है कि सिम तोड़ कर फेंक दें। भूलें नहीं। एक सिम दोस्त का भी है। दूसरी पर्ची में लिखा है कि उसके रजिस्टर-कॉपी सहित सारे दस्तावेज नष्ट कर दिए जाएं।
एक जगह लिखा है, ‘यार मरने वाले की कुछ तो सुनकर ईमानदारी रखना।’ नीचे उसने लिखा, ‘जो किसी का न हो सकता दुरात्मा।’