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मुर्ग मुसल्लम हो या फिर लजीज कबाब पराठा..., नॉनवेज के शौकीनों को अभी करना होगा इंतजार

Sat, 13 Jun 2020 01:41 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 13 Jun 2020 01:41 PM IST
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Covid 19 badly effected meat business in Lucknow
फाइल फोटो
मुर्ग मुसल्लम, बिरयानी, रोस्टेड चिकन हो या फिर लजीज कबाब पराठा...। फिलहाल नॉनवेज के शौकीनों को इसका स्वाद लेने के लिए और इंतजार करना होगा। लॉकडाउन खुल चुका है, लेकिन नॉनवेज रेस्टोरेंटों पर अभी भी ताले लगे हैं। वहीं, लाइसेंस के फेर में कच्चा गोश्त सप्लाई करने वाले आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।


नॉनवेज कारोबारी बताते हैं कि शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो जब उनके पुराने ग्राहकों ने फोन करके न पूछा हो कि रेस्टोरेंट, दुकानें कब से खुलेंगी। शहर में गोश्त के शौकीनों की लंबी फेहरिस्त है, जो सामान्य दिनों में करीब 70 लाख रुपये का ताजा गोश्त खा जाते हैं। यानी एक महीने में करीब 21 करोड़ का गोश्त का कारोबार होता है। लॉकडाउन के दौरान रमजान का पाक महीना भी था, वैवाहिक आयोजनों का वक्त भी था, यानी इन दिनों बिक्री कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कारोबार ठप रहा।
Covid 19 badly effected meat business in Lucknow
शमील शम्मी - फोटो : amar ujala
असमंजस में कारोबारी
नॉनवेज रेस्टोरेंट संचालक शमील शम्सी कहते हैं कि यदि हम खोल भी दें तो कम से कम 15 लाख रुपये चाहिए। हम सारी तैयारियां करें और पता चला कि लॉकडाउन फिर हो गया तो हमारी बचत भी खत्म हो जाएगी। सामान्य दिनों में मटन 350-400 रुपये किलो तक मिलता है, लेकिन इन दिनों 800 रुपये किलो है। 

 
Covid 19 badly effected meat business in Lucknow
शोएब रिजवान कुरैशी - फोटो : amar ujala
स्टाफ नहीं, मीट की बिक्री बंद
अकबरी गेट स्थित नॉनवेज रेस्टोरेंट के संचालक शोएब रिजवान कुरैशी कहते हैं कि शुरुआत में तो स्टाफ का ही खर्च बहुत था। बाद में स्टाफ चला गया। शेफ यहां के हैं, लेकिन कारीगर अलग-अलग जगह से हैं। वे फिलहाल आने की स्थिति में नहीं हैं। वे डरे भी हैं। गोश्त की सप्लाई लाइसेंस के नवीनीकरण में अटकी है। 

 
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रहनुमा कुरैशी - फोटो : amar ujala
लाइसेंस रिन्यू करने का आग्रह
मीट कारोबारी रहनुमा कुरैशी बताते हैं कि एक जाने-माने रेस्टोरेंट की चेन की एक ब्रांच पर रोजाना 700-800 किलो मटन, चिकन जाता है। सरकार से हमारा आग्रह है कि हमारा लाइसेंस रिन्यू कर दे, ताकि आर्थिक संकट से बच सकें।

 
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मुर्गे हो गए मोटे, न बनेगा मुर्ग मुसल्लम, न रोस्टेड चिकन
मीट कारोबारियों का कहना है कि हम 650 या 700 ग्राम का मुर्गा लेते हैं, लेकिन जो मिल रहा है वो ढाई से चार किलो का मुर्गा है। लेग और चेस्ट पीस के लिए हमें तीन-चार किलो खरीदना पड़ेगा। छोटे साइज के मुर्गे से मुर्ग मुसल्लम और रोस्टेड चिकन बनता है, जो फिलहाल संभव नहीं।
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