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सपा में सबकुछ शांत नहीं, टिकटों पर हो सकता है घमासान

Sat, 24 Sep 2016 02:29 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 24 Sep 2016 02:29 AM IST
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 Conflicts may come up in SP over ticket issue.
अखिलेश यादव ‌व शिवपाल यादव - फोटो : amar ujala

समाजवादी पार्टी में चल रहा घमासान कुछ युवा नेताओं पर कार्रवाई के बाद से भले ही शांत दिख रहा हो लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हैं। हारी हुई दर्जन भर सीटों पर तय होने के बावजूद प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हो रही है।

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पूर्व घोषित सीटों पर उम्मीदवार बदलने और सिंटिग विधायकों के टिकटों को लेकर घमासान के आसार हैं। सीएम 2017 के चुनाव के लिए टिकट वितरण का अधिकार चाहते हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह उन्हें फ्री हैंड देंगे, इसमें संदेह है।
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सपा में पिछले 12 दिनों से चल रही उठापटक अभी थमने का नाम नहीं ले रही है। युवा संगठनों के नेताओं, कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन व इस्तीफों को छोड़ दें तो मुलायम परिवार या उनके नजदीकी लोगों के अलावा पार्टी का कोई भी नेता इस विवाद में खुलकर बोलने को तैयार नही है। अधिकतर विधायकों, मंत्रियों ने मौन साध रखा है।
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अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर प्रदेश इकाई और जिला संगठनों में खामोशी है। यूं तो सपा मुखिया के दखल से सपा का पारिवारिक विवाद थम गया लगता है लेकिन अंदर ही अंदर आग धधक रही है। इसका प्रभाव पूरी पार्टी पर दिख रहा है। यही हाल रहा तो चुनावी संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

हालात अभी भी विस्फोटक

 Conflicts may come up in SP over ticket issue.

जिस तरह से सपा नेतृत्व के नजदीकी विधायक, सांसद बयानबाजी कर रहे हैं, उससे साफ है कि स्थिति विस्फोटक बनी हुई है।

एमएलसी अरविंद प्रताप यादव को निष्कासित किए जाने पर पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के सांसद बेटे अक्षय यादव मुखर हुए, उन्होंने शिवपाल यादव को निशाने पर लिया।

इसकी प्रतिक्रिया में बृहस्पतिवार को सपा मुखिया के नजदीकी समझे जाने वाले विधान परिषद के सभापति रमेश चन्द्र यादव के बेटे और एटा से विधायक आशीष यादव ने रामगोपाल पर तीखा हमला किया।

50-60 उम्मीदवारों को बदलना चाहती है सपा

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शिवपाल यादव - फोटो : amar ujala

सपा में झगड़े की शुरुआत उस समय हुई है जब सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं। चुनावी तैयारियों में सपा भी पीछे नहीं थी। हारी हुई सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिए छह महीने पहले ही प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

एक कमेटी बनाकर हारी हुई सीटों पर दावेदारों के पैनल बनाकर पार्टी नेतृत्व को सौंप दिए गए थे। सपा 160 से ज्यादा हारी हुई सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। करीब एक दर्जन सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान बाकी है। इन सीटों के उम्मीदवार तय है लेकिन पार्टी में चल रहे विवाद के चलते घोषणा नहीं हो पा रही है।

सपा पूर्व घोषित प्रत्याशियों में लगभग 50-60 को बदलना चाहती है। इसके संकेत पार्टी दे चुकी है। मंडल प्रभारियों की रिपोर्ट और सर्वे का इनपुट मिल चुका है। प्रत्याशियों में बदलाव को लेकर अखिलेश और शिवपाल की राय जुदा-जुदा है।

वे अलग-अलग उम्मीदवारों के पैरोकार हैं। इसी कारण पार्टी उन्हें बदलने का फैसला नहीं ले पा रही है। माना जा रही है कि अखिलेश व शिवपाल में टिकटों के बंटवारे में फिर विवाद बढ़ सकता है।

बागी विधायकों वाली सीट पर नए उम्मीदवार चुनने की चुनौती

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सपा के इस समय 226 विधायक हैं। इसमें करीब एक दर्जन विधायक या तो बागी हो गए हैं या बागी होने की राह पर है। इनकी जगह नए प्रत्याशी चुने जाएंगे। शेष विधायकों में बहुत सारों से टिकट काटे जाएंगे। मौजूदा विधायकों की सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया सपा सुप्रीमो की 6 अक्तूबर को आजमगढ़ रैली के बाद शुरू होनी है।

सीएम अखिलेश चाहते हैं न केवल सिटिंग सीटों पर उनकी राय से उम्मीदवार तय किए जाएं वरन हारी हुई सीटों पर बदलाव भी उनकी राय से किया जाए। वह साफ कह चुके हैं कि विधानसभा चुनाव में उनकी परीक्षा होनी है, इसलिए टिकट तय करने में उनकी भूमिका होनी चाहिए।

मौजूदा हालात में नहीं लगता नहीं कि सपा मुखिया उन्हें प्रत्याशी तय करने की आजादी देंगे। शिवपाल भी समर्थक विधायकों के टिकट बचाने और अपन नजदीकी लोगों को उम्मीदवार बनवाने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे।

खुद सपा मुखिया भी सूबे के सियासी समीकरणों के गहरे जानकार हैं। उन्हें हर सीट के समीकरण का अंदाज है। वह खुद भी उम्मीदवार घोषित करने के अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे। सपा में घमासान की अगली बड़ी वजह यह मुद्दा बन सकता है।

नहीं हुआ सुलह के फार्मूले पर अमल

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अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल सिंह को जिम्मेदारी सौंपने की प्रतिक्रिया में सीएम ने शिवपाल के सभी महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए थे। इससे आहत शिवपाल ने तीन दिन बाद प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यहीं से परिवार का विवाद सड़कों पर आया।

पहले शिवपाल के समर्थन में देर रात प्रदर्शन हुआ और अगले दिन अखिलेश समर्थकों ने उग्र प्रदर्शन किया। मुलायम सिंह ने अखिलेश व शिवपाल से बात करके सुलह का रास्ता निकाला।

इसके तहत पीडब्लूडी को छोड़कर शिवपाल के छिने विभाग वापस हो गए, वह प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे लेकिन अखिलेश यादव को टिकट वितरण में तरजीह देने का कोई फार्मूला सामने नहीं आया।

उन्हें राज्य संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने की पहल भी नहीं हुई। सपा मुखिया मुलायम सिंह के राजधानी आने पर सीएम उनसे इस मुद्दे पर बात कर सकते हैं।

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