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श्वेत पत्र जारी कर योगी ने सपा-बसपा पर लगाए गंभीर आरोप, निशाने पर रहे मुलायम-माया-अखिलेश

Tue, 19 Sep 2017 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 19 Sep 2017 12:33 AM IST
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Cm yogi presented six month report card of his government
श्वेत पत्र जारी करते सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती अखिलेश यादव और मायावती सरकार पर आरोपों की बौछार लगा दी है। उन्होंने आंकड़ों और तथ्यों के हवाले से बताया है कि किस तरह सपा- बसपा सरकारों के भ्रष्टाचार व बदइंतजामी से प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगी, संसाधनों की बर्बादी हुई, जनता लाभ से वंचित रही और प्रदेश प्रगति की दौड़ में पिछड़ता चला गया। ये सब बातें एक श्वेत-पत्र में कही गई हैं।

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2003-04 से 2016-17 के बीच रही विपक्षी सरकारों की योगी ने खुलकर खबर ली है। इस दौरान सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की सरकार रही।
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श्वेत-पत्र में कानून-व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, सरकारी नौकरियों की भर्ती में भेदभाव व भ्रष्टाचार का आरोप तो है ही, यह भी बताया है कि किस तरह बसपा राज में चीनी मिलों की बिक्री में 375 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया। स्मारकों के निर्माण में घोर अनियमितता का हवाला देते हुए कहा गया है कि 943.73 करोड़ की मूल परियोजना बढ़ाकर 4558.01 करोड़ की गई।
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परियोजनाओं में 3537.68 करोड़ के नए काम जोड़े गए। यह पूरी तरह अनुपयोगी व्यय था।


यहां पढ़ें पूरा श्वेत पत्र-

http://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2017/09/18/white-paper-2017_59bfac379be69.pdf

विशेष समूह को लाभ पहुंचाने का किया गया प्रयास

Cm yogi presented six month report card of his government

आबकारी विभाग में एक विशेष समूह को लाभ पहुंचाने के लिए 2011 से शराब नीति बनाने व सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। इसी नीति से सरकार को 2015-16 में राजस्व प्राप्ति के निर्धारित लक्ष्य 17,500 करोड़ की जगह 14,083 करोड़ रुपये तथा 2016-17 में 19,250 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष 14,273 करोड़ रुपये ही मिले। इससे सरकार के राजस्व में करीब 800 करोड़ रुपये की कमी रह गई।

श्वेत-पत्र में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह सार्वजनिक उपक्रमों को बर्बाद कर कर्ज के जाल में उलझा दिया गया। 2011-12 में जहां 35,952.78 करोड़ का पीएसयू पर ऋण था, 2015-16 में बढ़कर 75,950.27 करोड़ हो गया।

यह भी बताया है कि केंद्रीय सड़क निधि से प्रदेश को हर साल 600 करोड़ रुपये मिलने चाहिए लेकिन अखिलेश सरकार ने सांसदों के प्रस्ताव ही नहीं भेजे। इस नाते 2015-16 में 225.39 करोड़ व 2016-17 में 219.17 करोड़ ही मिले। दो वर्ष में प्रदेश को करीब 600 करोड़ रुपये के काम का नुकसान हुआ। पैसा न ला पाने की वजह से काम नहीं हो पाए।

अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 2012-13 से 2016-17 तक 13,804 करोड़ का बजट था लेकिन 4830 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। अल्पसंख्यकों की हमदर्द बनने वाली सरकार ने उन्हें मात्र वोट हासिल करने का जरिया बना डाला। पैसा खर्च कर उन्हें लाभ नहीं पहुंचाया।

15 साल की सरकारों का रिपोर्ट कार्ड

Cm yogi presented six month report card of his government

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों के गैर जिम्मेदाराना काम, भ्रष्ट व अलोकतांत्रिक कार्यप्रणाली ने प्रदेश को आगे ले जाने के बजाय पीछे धकेल दिया। जनता के प्रति जवाबदेही की प्रतिबद्धता व संवेदनशीलता से जिम्मेदारी निभाने की जगह भ्रष्टाचारियों को प्रश्रय दिया। सार्वजनिक उद्यमों की दुर्गति की और प्रदेश को कर्ज के जाल में उलझा दिया। उन्हें विरासत में अराजकता, गुंडागर्दी, अपराध और भ्रष्टाचार युक्त विषाक्त वातावरण मिला।

मुख्यमंत्री ने कहा, पिछले 12-15 वर्षों में प्रदेश की सरकारों के कारनामों की अनंत श्रृंखला है। लेकिन वह मुख्य बिंदुओं पर फोकस कर 22 करोड़ जनता को बताना चाहते हैं कि उन्हें  किन हालात में प्रदेश की जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने कहा,पिछली सरकारों ने सार्वजनिक उद्यमों की जमकर दुर्गति की। पब्लिक सेक्टर की 65 पीएसयू (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग) थीं। 2011-12 में इन पर हानियां 6489.58 करोड़ थीं जो 2015-16 में बढ़कर 17,789.91 करोड़ हो गई। इसी तरह पीएसयू की संचित हानियां 2013-14 में 29,380.10 करोड़ थी। यह 2015-16 में बढ़कर 91,401.19 करोड़ हो गई। इसके अलावा 2011-12 में पीएसयू का ऋण 35,952.78 करोड़ था। यह 15-16 में बढ़कर 75,950.27 करोड़ हो गया।

योगी ने कहा, पब्लिक सेक्टर यूटिलिटी रोजगार के लिए विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती थी। लेकिन यह कहते बहुत दुख हो रहा है कि गैर जिम्मेदार, भ्रष्ट व जनविरोधी कार्यप्रणाली से 10-12 वर्षों में सभी पीएसयू बंद हो गए।

राजस्व बढ़ाने की कोशिश नहीं की बल्कि खर्च बढ़ा दिया

Cm yogi presented six month report card of his government

योगी ने कहा, एक तरफ पिछली सरकारों ने खुद कर राजस्व बढ़ाने के प्रयास नहीं किए, वहीं राजस्व व्यय में अत्यधिक वृद्धि हुई। इससे सरकार के पूंजीगत खर्च में कमी आई। उनकी सरकार को खजाना खाली मिला। पिछली सरकारों ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब कर दी।

31 मार्च 2007 को प्रदेश की ऋणग्रस्तता 1.35 लाख करोड़ थी। मार्च 2017 को बढ़कर यह 3.75 हजार करोड़ हो गई। इस तरह 10 वर्ष में प्रदेश की ऋण ग्रस्तता ढाई गुना से अधिक बढ़ गई।

मुख्यमंत्री ने राजकोषीय घाटे की चर्चा करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में यह हमेशा तीन प्रतिशत से अधिक रहा। विकास के मद में खर्च कम किया गया और फिजूलखर्ची, भ्रष्टाचार पर जोर रहा। उन्होंने इसे राजकोषीय घाटे पर संतुलन बनाने का शरारतपूर्ण प्रयास करार दिया।

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