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Lucknow News: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सिविल सेवा की तैयारी के लिए भी शुरू होगा कोर्स

Fri, 31 May 2024 05:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2024 05:26 AM IST
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civil services exam central sanskrit university
सचिन त्रिपाठी
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लखनऊ। गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत की पढ़ाई के साथ ही प्रशासनिक सेवा का रास्ता भी खुलेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय में बीए इन संस्कृत एंड सिविल सर्विस स्टडीज पाठ्यक्रम की शुरुआत होगी। बोर्ड ऑफ स्टडीज से इसका प्रस्ताव तैयार होकर सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

विवि के इनोवेटिव कोर्स कोआर्डिनेटर प्रो. पवन दीक्षित ने बताया कि कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी की पहल पर यह पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति के हिसाब से तैयार होगा। यह पाठ्यक्रम चार वर्ष का होगा। इसमें मल्टी एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था भी होगी। इसका मतलब प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर विद्यार्थी को डिप्लोमा, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा, तीन साल पर डिग्री और चार साल पर डिग्री विद रिसर्च की उपाधि मिलेगी। इसमें क्रेडिट जोड़े जाएंगे और इनके आधार पर विद्यार्थी को किसी भी वर्ष में सीधे दाखिला भी मिल सकेगा। इस पाठ्यक्रम का मकसद विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए तैयार करना है।
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प्राइवेट नौकरी में भी मिलेगा फायदा

प्रो. पवन दीक्षित ने बताया कि यह पाठ्यक्रम सिविल सेवा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, लेकिन इसका फायदा अन्य क्षेत्र में भी मिलेगा। प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए ज्ञान और व्यक्तित्व पर ध्यान की परख की जाती है। इसके माध्यम से सौ से अधिक एलाइड सेवाओं में भी तैनाती दी जाएगी। इतना ही नहीं यूपीएससी की वेटिंग लिस्ट से भी बहुत सी निजी कंपनियां अपने यहां प्रशासनिक सेवक का चयन करती हैं।
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राजशास्त्र और नीतिशास्त्र की भी होगी पढ़ाई

बीए इन संस्कृत एंड सिविल सर्विस स्टडीज पाठ्यक्रम में संस्कृत के साथ ही लोक प्रशासन की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके साथ ही इसमें राजशास्त्र और नीतिशास्त्र का अध्ययन भी होगा। संस्कृत में राजशास्त्र एक अलग भाग है। इसके तहत राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में बताया जाता था। प्रो. पवन दीक्षित ने बताया कि प्राचीन काल में नीतिशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद ही राजकुमारों को राज सिंहासन पर बिठाया जाता था। इसको आधुनिकता के साथ जोड़ने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
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