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कोरोना: केंद्र ने मार्च, अप्रैल व मई में हुई मौतों का ब्योरा मांगा, विपक्ष की धार कुंद करने की तैयारी

Thu, 27 May 2021 12:25 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 27 May 2021 12:25 PM IST
सार

कोरोना के कारण हुई मौतों को राज्यों के विधानसभा चुनाव में विपक्ष मुद्दा बना सकता है जिसे ध्यान में रखते हुए केंद्र शहरी क्षेत्रों में हुई मौतों का वास्तविक डाटा तैयार करवा रहा है जिसके लिए पूरा ब्योरा मांगा गया है।

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Central asked for real data of deaths from states.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से पिछले वर्ष मार्च, अप्रैल व मई व इस वर्ष इन्हीं तीन महीनों के दौरान हुई मौतों का ब्योरा तलब किया है। इसी कड़ी में यूपी में सभी नगर निकायों को इन तीन महीनों के दौरान हुई मौतों और कारणों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

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दरअसल, कोरोना नियंत्रण व्यवस्था और इससे हुई मौतों की संख्या को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। चुनावी साल में विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है। इसे देखते हुए सरकार इस मुद्दे की धार कुंद करने के लिए कोरोना से हुई वास्तविक मौतों का डाटा तैयार करके आम लोगों को सही जानकारी देने की तैयारी कर रही है। हालांकि इसकी पहल केंद्र सरकार के स्तर से हो रही है, क्योंकि इस मुद्दे को सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि उन सभी राज्यों में भी तूल दिया जा रहा है, जहां अगले साल चुनाव होने हैं।
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सूत्रों का कहना है कि इसी रणनीति के तहत ही केंद्रीय शहरी विकास एवं स्थानीय स्वशासन केंद्र के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने सभी राज्यों से दोनों साल के इन तीन महीनों के दौरान हुई मौतों की जानकारी मांगी है। इस आधार पर प्रदेश के स्थानीय निकाय निदेशालय ने नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों से नगर निकाय क्षेत्रों में मार्च, अप्रैल व मई में हुई मौतों का ब्योरा तैयार करने का निर्देश दिया है।

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इस तरह देना होगा ब्योरा

निदेशालय की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मौत के आंकड़े में श्मशान में जलाए गए और कब्रिस्तानों में दफनाए गए शवों का ब्योरा शामिल किया जाएगा। डाटा में दोनों साल के इन तीन महीनों में हुई मौतों की संख्या और कारण का भी उल्लेख करना होगा। इस आधार पर रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

शासन के निर्देश पर नगर निकायों को पहले चरण में इस साल और पिछले साल इसी अवधि में हुई मौतों की अलग-अलग जानकारी देनी होगी। इसी प्रकार इनमें से कोरोना के अलावा अन्य कारणों से हुई मौतों का भी अलग-अलग ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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