Lucknow : उमेश पाल हत्याकांड की जांच टेकओवर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है सीबीआई
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सीबीआई ने राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या के मामले को टेकओवर करने की दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। दरअसल जिस तरह अदालत ने अचानक राजूपाल हत्याकांड की जांच सीबीआई के सुपुर्द की थी, उसी तरह इस मामले के अहम गवाह की हत्या की जांच भी केंद्रीय एजेंसी को दिए जाने की संभावना के दृष्टिगत सीबीआई अपनी तैयारियां कर रही है। जांच एजेंसी ने उमेश पाल हत्याकांड में दर्ज हुई एफआईआर, अब तक हुई पुलिस कार्यवाही आदि का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। सीबीआई की एक टीम जल्द ही प्रयागराज भेजने की तैयारी है, जो वहां इस मामले से संबंधित तमाम जानकारियों को जुटाएगी जिसके बाद सीबीआई मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी।
सूत्रों की मानें तो सीबीआई जल्द ही राजूपाल हत्याकांड के बाकी गवाहों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखने जा रही है। दरअसल राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल के साथ ही बाकी गवाहों को भी अतीक अहमद, उसका भाई अशरफ और गुर्गे अपहरण कर गवाही नहीं देने के लिए धमका चुके हैं। सपा सरकार में हुए इस घटनाक्रम की अतीक के खौफ की वजह से एफआईआर तक दर्ज नहीं करायी जा सकी थी। वर्ष 2017 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद कई गवाहों ने मुकदमे दर्ज कराए थे।
वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में पूजा पाल की तरफ से अतीक अहमद के खिलाफ दाखिल याचिका में राजूपाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह उमेश पाल और सादिक का अपहरण कर धमकाने का उल्लेख किया गया है। वहीं अतीक के भाई अशरफ और उसके गुर्गों ने पूजा पाल को भी जान से मारने की धमकी दी थी। इसकी शिकायत 23 अगस्त 2016 को प्रयागराज के तत्कालीन धूमनगंज के एसओ, एसपी सिटी और एसएसपी से की गयी लेकिन अतीक पर राजनैतिक संरक्षण की वजह से पुलिस ने आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
पूजा पाल ने अदालत को बताया था कि 5 अक्टूबर 2016 की शाम वह जयंतीपुर स्थित उनके कार्यालय में अतीक, अशरफ और उसके गुर्गों ने आकर उसे सीबीआई के सामने गवाही देने पर जान से मारने की की धमकी दी। इसकी शिकायत तत्काल एसएसपी से की गयी लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इसके अगले दिन उन्होंने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक भेजकर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया था।
जेल से छूटते ही गवाहों को लगा धमकाने
वर्ष 2005 में राजूपाल की हत्या के बाद जेल में बंद अतीक को एक साल बाद जमानत मिल गयी जिसके बाद उसने गवाहों को धमकाना शुरू कर दिया था। जमानत से छूटते ही अतीक ने अपने गुर्गों की मदद से चश्मदीद ओमप्रकाश पाल का अपहरण कर लिया और कई दिनों तक बंधक बनाकर गवाही न देने की धमकियां देकर पीटता रहा। इसी तरह उसने एक और चश्मदीद सैफुल्लाह का 21 फरवरी 2006 को अपहरण किया था। इसका मुकदमा भी दर्ज हुआ था। तत्पश्चात गवाह महेंद्र पटेल उर्फ बुद्धिराजा का अपहरण किया और उसे भी गवाही नहीं देने के लिए धमकाया।
अतीक के इन गुर्गों के नाम आए थे सामने
गवाहों को धमकाने के मामले में अतीक, उसके भाई अशरफ और कई गुर्गों के नाम सामने आए थे। इनमें दिनेश पासी, अंसार, शौकर हनीफ, रफीक उर्फ गुलफुल, गुड्डू मुस्लिम, रंजीत पाल, इसरार, अब्दुल हक, शमशाद, नबी अहमद आदि मुख्य थे। अदालत को बताया गया था कि अतीक के गैंग में कुल 138 सदस्य शामिल हैं।